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- निजी क्षेत्र में 2500 से 3000 रुपये का यह इंजेक्शन अभियान के दौरान लगाया निशुल्क लगेगा
Updated Tue, 24 Apr 2018 01:48 AM IST
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जिले में कल से शुरू होगा खसरा, रूबेला टीकाकरण अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
सिविल सर्जन डॉ. विनोद गुप्ता ने बताया कि प्रदेश को खसरा मुक्त बनाने के लिए तथा रूबेला रोग के नियंत्रण के लिए 25 अप्रैल से खसरा, रूबेला टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान बच्चों को यह टीका निशुल्क लगाया जाएगा जबकि निजी क्षेत्र में यह टीका लगवाने के लिए चिकित्सकों द्वारा 2500 से 3000 रुपये लिये जाते हैं। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रमाणित यह टीका उच्च गुणवत्ता का है। टीका लगाने के लिए एक सिरिंज केवल एक बार ही प्रयोग की जाएगी और इसके लिए विशेष प्रकार की सिरिंज उपलब्ध कराई गई है।
कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डॉ. गुप्ता ने बताया कि नौ माह से लेकर 15 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए चार सप्ताह तक चलने वाला यह टीकाकरण अभियान दो चरण में पूरा किया जाएगा। पहले दो सप्ताह के दौरान जिला के सभी 1267 राजकीय और प्राइवेट स्कूलों में यह टीका लगाया जाएगा। उसके बाद आगामी दो सप्ताह में आंगनबाड़ी केंद्रों में यह टीकाकरण किया जाएगा। इस अवसर पर जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. बेला शर्मा, सुदेश कंबोज सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
रूबेला इंजेक्शन न लगाने पर गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ता है प्रभाव
सिविल सर्जन ने बताया कि जिन बच्चियों को यह टीका लगाया जाएगा, समय आने पर उनकी संतान रूबेला बीमारी से बिल्कुल सुरक्षित रहेगी। उन्होंने बताया कि रूबेला नामक वायरस गर्भ के दौरान भ्रूण पर प्रभाव डालता है जिसके कारण गर्भपात, जन्म के समय बच्चे की मृत्यु, बच्चों के दिल में छेद, नेत्रहीनता, सुनने व बोलने की असमर्थता और मानसिक विकार आदि होने लगते हैं। इसलिए आने वाली संतानों को ऐसी बीमारियों से सुरक्षित करने के लिए 9 मास से 15 वर्ष तक की बच्चियों को यह टीका लगवाना जरूरी है।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
सिविल सर्जन डॉ. विनोद गुप्ता ने बताया कि प्रदेश को खसरा मुक्त बनाने के लिए तथा रूबेला रोग के नियंत्रण के लिए 25 अप्रैल से खसरा, रूबेला टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान बच्चों को यह टीका निशुल्क लगाया जाएगा जबकि निजी क्षेत्र में यह टीका लगवाने के लिए चिकित्सकों द्वारा 2500 से 3000 रुपये लिये जाते हैं। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रमाणित यह टीका उच्च गुणवत्ता का है। टीका लगाने के लिए एक सिरिंज केवल एक बार ही प्रयोग की जाएगी और इसके लिए विशेष प्रकार की सिरिंज उपलब्ध कराई गई है।
कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डॉ. गुप्ता ने बताया कि नौ माह से लेकर 15 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए चार सप्ताह तक चलने वाला यह टीकाकरण अभियान दो चरण में पूरा किया जाएगा। पहले दो सप्ताह के दौरान जिला के सभी 1267 राजकीय और प्राइवेट स्कूलों में यह टीका लगाया जाएगा। उसके बाद आगामी दो सप्ताह में आंगनबाड़ी केंद्रों में यह टीकाकरण किया जाएगा। इस अवसर पर जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. बेला शर्मा, सुदेश कंबोज सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
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रूबेला इंजेक्शन न लगाने पर गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ता है प्रभाव
सिविल सर्जन ने बताया कि जिन बच्चियों को यह टीका लगाया जाएगा, समय आने पर उनकी संतान रूबेला बीमारी से बिल्कुल सुरक्षित रहेगी। उन्होंने बताया कि रूबेला नामक वायरस गर्भ के दौरान भ्रूण पर प्रभाव डालता है जिसके कारण गर्भपात, जन्म के समय बच्चे की मृत्यु, बच्चों के दिल में छेद, नेत्रहीनता, सुनने व बोलने की असमर्थता और मानसिक विकार आदि होने लगते हैं। इसलिए आने वाली संतानों को ऐसी बीमारियों से सुरक्षित करने के लिए 9 मास से 15 वर्ष तक की बच्चियों को यह टीका लगवाना जरूरी है।
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