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ऐलनाबाद के सरकारी अस्पताल में 42 में से 23 पद खाली

Sat, 30 Nov 2013 10:41 PM IST
ऐलनाबाद/सिरसा/ब्यूरो
ऐलनाबाद/सिरसा/ब्यूरो Updated Sat, 30 Nov 2013 10:41 PM IST
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23 out of 42 vacant posts in government hospitals Ellenabad
हरियाणा के जिला सिरसा के उपमंडल ऐलनाबाद के नाथसूरी चोपटा में अक्तूबर महीने में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने ऐलनाबाद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को 30 से बढ़ाकर 50 बेड करने की घोषणा की है, लेकिन पिछले नौ सालों से स्टॉफ की कमी को पूरा नहीं किया जा सका।
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हैरानीजनक पहलू यह है कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद सामान्य अस्पताल सिरसा रेफर कर दिया जाता है।

अस्पताल में डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों के कुल 42 पद स्वीकृत हैं। इनमें से महज 19 ही कार्यरत हैं। वहीं, इनमें से कई छुट्टी पर चले जाते हैं या फिर देरी से ड्यूटी पर आते हैं।
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दुखद है कि यहां एसएमओ का पद ही स्वीकृत नहीं है। इस वजह से स्टाफ को अपने वेतन और अन्य खर्चों के बिलों की स्वीकृति के लिए रानियां एसएमओ के पास जाना पड़ता है।
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पोस्टमार्टम के लिए बनाई मोर्चरी आज तक कभी नहीं खुली। इसके बनने से लेकर आज तक यहां पर ताला ही लटक रहा है। एक्सरे रूम पर भी अभी तक ताला ही लटका है।

अस्पताल परिसर में एंबुलेंस चालक के लिए अस्थाई तौर पर रहने का इंतजाम जरूर किया गया है, लेकिन चालक के अभाव में डॉक्टरों के लिए आई गाड़ी को वापस सिरसा भेज दिया गया।

डॉक्टरों की है कमी...पद खाली
अस्पताल प्रभारी डॉ. प्रमोद शर्मा ने बताया कि 42 स्वीकृत पदों में से 23 रिक्त पड़े हैं। इनमें मेडिकल ऑफिसर के सात पद स्वीकृत हैं, जिनमें से एक रिक्त है।


स्टाफ नर्स के तीन में से तीन, डेंटल सर्जन के दो में से एक, लेबोरेट्री टेक्नीशियन के दो में से दो, रेडियोग्राफर के दो में से दो, स्वीपर के चार में से तीन, चतुर्थ श्रेणी के दस में से सात, एकाउंटेंट, पब्लिक हेल्थ नर्स, हेल्थ इंस्पेक्टर, स्टेनो, क्लर्क, चालक, धोबी के पद शुरू से ही खाली हैं।

मोर्चरी के लिए आवश्यक उपकरण मांगा
डॉ. आरके दहिया ने बताया कि मोर्चरी को शुरू करवाने के लिए आवश्यक उपकरण और स्टाफ की कमी महसूस की जा रही है।

इन उपकरणों और स्टाफ को उपलब्ध करवाने के लिए सरकार को पत्र भेजा गया था, परंतु आज तक उसका कोई जबाब नहीं आया।

24 घंटे की ड्यूटी पर मिलते हैं महज दो हजार
अस्पताल में सफाई कर्मचारी राजवीर सिंह ने बताया कि वह दिन में अस्पताल की सफाई और रात में अस्पताल भवन की चौकीदारी करता है।

उसे 24 घंटे ड्यूटी देनी पड़ती है, जबकि इसके बदले में उसे महज 2000 रुपये ही मिलते हैं। महंगाई के जमाने में 2000 रुपये में गुजारा कैसे करें?

घोषणा नहीं सुविधा की जरूरत
समाजसेवी प्रवीण फुटेला, रूपराम जैपाल, विनोद शर्मा आदि ने बताया कि अस्पताल नाम का ही सामुदायिक चिकित्सा केंद्र है।

वास्तव में यह सुविधाओं के नाम पर गांवों में होने वाले प्राथमिक चिकित्सा केंद्र जैसा ही है।

हुड्डा सरकार इसकी क्षमता 30 से बढ़ाकर 50 बेड का करने जा रही है, लेकिन यदि यहां 30 बेड जितनी सुविधाएं ही दे दी जाएं तो लोगों को काफी राहत मिलेगी।
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