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सोनीपत: कुंडली बॉर्डर पर किसान आंदोलन के 11 माह पूरे, लखीमपुर हत्याकांड के विरोध में आज देशभर में तीन घंटे प्रदर्शन करेंगे किसान

Tue, 26 Oct 2021 09:40 AM IST
प्रमोद कुमार अमर उजाला ब्यूरो, सोनीपत
अमर उजाला ब्यूरो, सोनीपत Published by: प्रमोद कुमार Updated Tue, 26 Oct 2021 09:40 AM IST
सार

सोनीपत के कुंडली बॉर्डर पर किसान आंदोलन को 11 माह पूरे हो गए हैं। मंगलवार को आंदोलन 12वें महीने में प्रवेश कर गया। किसानों का कहना है कि वे कतई पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। सरकार को उनकी मांगें माननी ही होंगी। जब तक मांगें नहीं मानी जाती, आंदोलन जारी रहेगा। लखीमपुर हत्याकांड के विरोध में आज किसान तीन घंटे तक देशभर में प्रदर्शन करेंगे।

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11 months of farmers agitation completed at Kundli border of Sonipat
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सोनीपत के कुंडली बॉर्डर पर किसान आंदोलन के 11 माह पूरे हो चुके हैं। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने घोषणा की है कि आंदोलन के 11 माह पूरे होने व लखीमपुर में किसान हत्याकांड के विरोध में मंगलवार को देशभर में धरने देकर किसान प्रदर्शन करेंगे। एसकेएम सदस्य डॉ. दर्शनपाल ने बताया कि सुबह 11 से दोपहर 2 बजे के बीच तहसील और जिला मुख्यालयों पर राष्ट्रव्यापी विरोध का आह्वान किया गया है। किसान केंद्रीय राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी की गिरफ्तारी और केंद्रीय मंत्रिपरिषद से बर्खास्तगी की मांग के लिए यह सब कर रहे हैं।

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जिला उपायुक्तों को सौंपे जाएंगे ज्ञापन
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति के नाम सभी जिलों के उपायुक्तों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का यह दावा गलत है कि भारत में अधिकांश किसान संगठन कारपोरेट-समर्थक, किसान-विरोधी कानूनों का समर्थन करते हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने उन्हें इस बारे में अपने सबूत पेश करने की चुनौती दी है, जिससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि देश में कुछ संगठन ही इन किसान विरोधी कानूनों के समर्थन में हो सकते हैं। इनमें वे लोग शामिल हैं, जो भाजपा-आरएसएस से जुड़े हैं या जिनका कोई जनाधार नहीं है।
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पीछे हटने को तैयार नहीं हैं किसान
कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर जारी आंदोलन को 11 माह का लंबा समय बीत गया है। अब तक हर मौसम का सामना कर चुके किसान पीछे हटने को कतई तैयार नहीं हैं। किसान दो टूक कह चुके हैं कि वह कानून वापसी तक वापस नहीं जाएंगे। किसानों व सरकार के बीज बातचीत भी लंबे समय से बंद है। आखिरी बैठक 22 जनवरी को हुई थी और उसके बाद से बातचीत का रास्ता बंद पड़ा है। यह माना जा रहा था कि सरकार व किसान एक-दूसरे से बातचीत की पहल चाहते हैं, लेकिन दोनों में कोई भी अब तैयार नहीं है।


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कामधंधे पूरी तरह से हुए चौपट
वहीं, लगातार बॉर्डर बंद रहने से आसपास के कामधंधे पूरी तरह से चौपट हो गए हैं, जिससे आसपास के ग्रामीण, दुकानदार, फैक्टरी संचालकों की हालत खराब है। 26 अक्तूबर को आंदोलन 12वें महीने में प्रवेश कर गया है। अभी आंदोलन खत्म होता भी दिखाई नहीं दे रहा। बॉर्डर पर जमे किसानों का साफ कहना है कि भले ही उन्हें यहां 11 माह का लंबा समय हो गया है, लेकिन वे यहां से जाने वाले नहीं हैं, जब तक कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस लेते हुए एमएसपी के लिए गारंटी कानून नहीं बना देती।

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22 जनवरी से बंद है बातचीत
22 जनवरी के बाद से सरकार से किसानों की बातचीत बंद है। किसानों के पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र भेजने के बावजूद सरकार से बातचीत का रास्ता नहीं खुला। किसान आंदोलन को प्रभावी बनाने के लिए संसद तक आयोजित कर चुके हैं। आंदोलन खत्म न होने के कारण कुंडली के जो उद्यमी, व्यापारी और आम लोग कुंडली बॉर्डर से रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें भी कोई उम्मीद की किरण नजर नहीं आ रही है। सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई दिसंबर तक टल गई है।



 

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