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Gorakhpur Zoo: महराज चाहते हैं चिड़ियाघर में वन्यजीवों, पर्यटकों को मिले ठंडा पानी, कुछ की मंशा कैंटीन चले

Fri, 12 May 2023 12:13 PM IST
vivek shukla रोहित सिंह, गोरखपुर।
रोहित सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 12 May 2023 12:13 PM IST
सार

चिड़ियाघर के निदेशक एच राजामोहन ने कहा कि प्लांट के नहीं चलने से काफी दिक्कतें होती हैं। कई बार कार्यदायी संस्था को पत्र लिखा गया। प्रबंधन अपनी तरफ से दर्शकों के पीने के पानी का आरओ तैयार करवाया है। अगर आरओ खराब है तो उसे ठीक करवा दिया जाएगा।

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Zoo water treatment plant built at a cost of Rs 50 lakh useless for three years
सीएम योगी के ड्रिम प्रोजेक्ट गोरखपुर जू में वॉटर ट्रीटमेंट मशीन खराब है। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सीएम योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट गोरखपुर चिड़ियाघर में इस तपिश भरी गर्मी में इंसान ही नहीं, जानवर भी शुद्ध पानी के लिए तरस रहे हैं। 50 लाख खर्च करके तीन साल पहले यहां लगाया गया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट सूखा है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत तीन-चार आरओ लगाए गए थे, वे भी खराब हैं। चिड़ियाघर में ही तीन कैंटीन हैं। जहां से रोजाना करीब एक हजार पानी की बोतलें बिक जाती हैं, वह भी प्रिंट रेट से ज्यादा कीमत पर। एक तरफ मुफ्त में पानी की व्यवस्था को शुरू कराने में अड़चनें और दूसरी तरफ पानी बेचकर मालामाल होने के शातिरपन से सहज अंदाजा लगाएं तो पानी का यह खेल फौरन समझ में आ जाएगा।

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चिड़ियाघर में आने वाले दर्शकों के साथ ही वन्य जीवों को पानी पिलाने, नहलाने, पौधों की सिंचाई, मछली पालन के लिए चिड़ियाघर परिसर में 13 जून 2020 को वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर तैयार कर दिया गया। इसे दिल्ली की एक्वा प्राइवेट लिटिमेंट ने 50 लाख रुपये में स्थापित किया। 27 मार्च 2021 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका उद्घाटन किया था।
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जानकारों की माने तो अधिकारियों ने कंपनी के पांच लाख रूपये भुगतान ही नहीं किया। जिसके चलते कंपनी ने भी प्लांट को हैंडओवर नहीं किया। वहीं, प्लांट को चलाने के लिए बिजली का कनेक्शन भी नहीं लिया गया। जबकि, वन मंत्री से लेकर वाइल्ड लाइफ उत्तर प्रदेश शासन की टीम ने प्लांट को शुरू कराने का निर्देश दिया था। लेकिन, जिम्मेदार अधिकारियों ने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को शुरू कराना जरूरी नहीं समझा।
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प्लांट शुरू होता तो बंद हो जाता पानी का खेल

वाटर ट्रीटमेंट अगर चालू हो जाता तो कैंटीन में पीने के पानी की बोतल बिक्री नहीं होती। जानकारों की माने तो परिसर में प्रतिदिन 2500 से 3 हजार दर्शक आते हैं। जिसमें करीब एक हजार लोग पीने का पानी खरीदते हैं। पिछले दिनों 25 रुपये से 30 रुपये तक में ठंडे पानी की बोतल बेचे जाने की शिकायत सामने आ चुकी हैं। आरोप यह भी लगा कि मनमाने तरीके से अपने चहेतों से कैंटीन संचालन करवाया जा रहा है।

एक्वा प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सुजीत कुमार ने कहा कि चिड़ियाघर के बनने के पहले ही वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार करा दिया गया था। लेकिन, इसे प्रयोग में लाने के लिए बिजली कनेक्शन नहीं दिया जा सका। इसके अलावा भुगतान भी अभी पूरा नहीं हुआ है। भुगतान हो जाए और बिजली कनेक्शन दे दिया जाए तो इसे चालू करवा दूंगा।

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राजकीय निर्माण खंड के एसडीओ सिविल बीबी निरंजन ने कहा कि बिजली कनेक्शन के लिए बोला गया था। चालू क्यों नहीं हो सका, यह मेरे भी समझ में नहीं आ रहा है। प्लंट लगाने वाली कंपनी को पूरा भुगतान कर दिया गया था। उन्हें प्लांट चालू करना चाहिए था। मेरे निर्देशन में ही इसे बनाकर तैयार करवाया गया था।

चिड़ियाघर के निदेशक एच राजामोहन ने कहा कि प्लांट के नहीं चलने से काफी दिक्कतें होती हैं। कई बार कार्यदायी संस्था को पत्र लिखा गया। प्रबंधन अपनी तरफ से दर्शकों के पीने के पानी का आरओ तैयार करवाया है। अगर आरओ खराब है तो उसे ठीक करवा दिया जाएगा।




 
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