बदल रहा है गोरखपुर: नौकरी छोड़कर युवाओं ने जमाए उद्योग, दे रहे हैं रोजगार
गीडा सीईओ अनुज मलिक ने कहा कि अब युवा नौकरी खोजने की बजाय नौकरी देने वाले बन रहे हैं। यह पूर्वांचल के लिए अच्छी बात है। बड़ी संख्या में युवा गीडा में अपनी फैक्टरी खोल रहे हैं। फैक्टरी के लिए जमीन की तलाश में सबसे अधिक आवेदन युवाओं के ही आ रहे हैं।
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गोरखपुर जिले में गीडा के विभिन्न सेक्टरों में युवा उद्यमियों ने अपनी मेहनत से नई पहचान बनाई है। गीडा की तरक्की में इनके उद्योगों की सफलता का भी बड़ा योगदान है। कोई प्लास्टिक का डिब्बा बना रहा है तो कोई डिस्पोजल पेपर। फ्लोर मिल से लेकर लौह उपकरणों तक में युवा उद्यमी हाथ आजमा रहे हैं।
पूर्वांचल में रोजगार की कमी का सबसे बड़ा कारण यही था कि आसपास कोई बड़ा औद्योगिक क्षेत्र नहीं था। ऐसे में जिन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिली, वे यहां से रोजगार की तलाश में दिल्ली-मुंबई से लेकर विदेश तक की खाक छानते थे। अब इस स्थिति में बदलाव आने लगा है। गीडा में उद्योगों की स्थापना ने खुद को साबित करने का प्रयास करने वाले युवाओं को एक मौका दिया।
सस्ते रेट में जमीन, मजदूर और कच्चे माल की उपलब्धता ने इन युवाओं को उद्योग स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। नतीजा यह है कि फ्लोर मिल, रेडिमेड गारमेंट्स, प्लास्टिक फैक्टरी से लेकर डिस्पोजल पेपर तक की फैक्टरी युवाओं ने लगाई और उसे सफलतापूर्वक चला भी रहे हैं। यहां तैयार माल को पड़ोसी प्रांत बिहार व पश्चिम बंगाल के अलावा नेपाल के मैदानी इलाकों तक भेजना आसान है, इसलिए उत्पादों को अच्छा व सस्ता बाजार भी मिल रहा है।
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बाजार की अच्छी समझ से मिल रहा फायदा
युवा उद्यमी बाजार की मांग व जरूरत को अच्छी तरह से समझ रहे हैं। यही वजह है कि वे ऐसी फैक्टरी लगा रहे हैं, जिसका उत्पादन यहां नहीं होता, लेकिन बाजार अच्छा है। इसका फायदा यह है कि इनके उत्पाद को तुरंत बाजार मिल जाता है। आयुष की फैक्टरी में खिलौने बनते हैं, जो मार्केट में हाथों-हाथ बिक जाते हैं तो वहीं मोहित ने बोतल बंद पानी का काम शुरू किया। इनका माल भी आसपास के बाजार के अलावा बिहार में खप जाता है।
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उद्यमी श्रेय जैन ने कहा कि मैंने एक कंपनी में पांच साल तक की नौकरी की। गोरखपुर का रहने वाला हूं तो यहां गीडा में हो रहे बदलाव से वाकिफ था। कोरोना संकट के बाद नौकरी के बजाय खुद की फैक्टरी खोलने के लिए गीडा कार्यालय से संपर्क किया। जमीन मिली तो यहां प्लास्टिक के कंटेनर व जार बनाने की फैक्टरी लगाई। आसपास के बाजार की पहले से ही अच्छी जानकारी थी। लिहाजा उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने में कोई दिक्कत नहीं आई। आज फैक्टरी व मार्केटिंग टीम मिलाकर करीब 60 लोगों को रोजगार मिला है।
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गीडा सीईओ अनुज मलिक ने कहा कि अब युवा नौकरी खोजने की बजाय नौकरी देने वाले बन रहे हैं। यह पूर्वांचल के लिए अच्छी बात है। बड़ी संख्या में युवा गीडा में अपनी फैक्टरी खोल रहे हैं। फैक्टरी के लिए जमीन की तलाश में सबसे अधिक आवेदन युवाओं के ही आ रहे हैं।