विश्व महिला समानता दिवस: संघर्षों से भरा है 'शांति' का सफर, खुद के साथ 30 महिलाओं की बदली तकदीर
- हल्दी प्रोसेसिंग यूनिट लगाई, अब पैकेजिंग कर बाजार में बेचती हैं शुद्ध हल्दी
- गांव में अपने टोले की सड़क, नाली और हैंडपंप की व्यवस्था भी करवाई
विस्तार
मुफलिसी और बेबसी के बीच अपने बुलंद हौसलों से एक महिला ने न सिर्फ खुद की माली हालत सुधारी है बल्कि गांव की 30 महिलाओं को रोजगार भी मुहैया कराया है। वह हल्दी उगाती हैं और उसको पीस कर पैकेजिंग के बाद बाजार में बेचती भी हैं। यही नहीं, जैविक खाद की मास्टरनी भी हैं। आसपास के गांवों की महिलाओं को वर्मी कंपोस्ट, नाडेप कंपोस्ट, मटका खाद बनाने की ट्रेनिंग भी देती हैं।
हम बात कर रहे हैं गोरखपुर जिले के जंगलकौड़िया ब्लॉक के पंचगांवा गांव की शांति देवी की, जिन्होंने महिला सशक्तीकरण की अनूठी मिसाल पेश की है। सामान्य गृहिणी से परिवर्तन की उत्प्रेरक बनने वाली इस महिला का सफर संघर्षों से भरा है। वह अपने गांव के धोबी टोले में रहती हैं। यह टोला नाली, सड़क, पेयजल आदि मूलभूत सुविधाओं से वंचित था। लेकिन शांति के प्रयासों से अब यहां सारी सुविधाएं हो गई है।
शांति बताती हैं, वर्ष 2016 में वह गोरखपुर एनवायरमेंटल एक्शन ग्रुप से जुड़ीं। ग्रुप के प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर अजय सिंह व उनकी सहयोगी अर्चना श्रीवास्तव से जैविक खाद बनाना सीखा। इसके बाद गांव के लोगों को यह हुनर सिखाने लगीं।
पाइप देती हैं किराए पर
शांति ने बताया कि 2019 में जय मां लक्ष्मी नाम से स्वयं सहायता समूह का गठन किया। इसमें 15 महिलाओं को जोड़ा। छोटी-छोटी बचत से उन्होंने सदस्यों को खेती संबंधित जरूरत के सामानों को मुहैया कराया। इसके बाद एक और स्वयं सहायता समूह बनाया। सभी महिलाओं को लेकर प्रधान से लेकर सचिव तक से मिलीं और अपने टोले का विकास करवाया।
शांति कृषि सेवा केंद्र की अध्यक्ष भी हैं। केंद्र से वह पाइप और पंपसेट किराए पर देती हैं। 100 मीटर पाइप को दस रुपये प्रति दिन के हिसाब से किराए पर देती हैं। इसके अलावा पंपसेट भी किराए पर मुहैया कराया जाता है। इससे भी आमदनी का स्रोत बढ़ा है।
हर महीने बेचती हैं सवा कुंतल हल्दी
शांति ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, नई दिल्ली के सौजन्य से हल्दी प्रोसेसिंग यूनिट लगाई। उनके पास एक एकड़ खेत है। जिसके आधे हिस्से में वह हल्दी की खेती करती हैं। अब वह हल्दी उगाने से लेकर उसकी पिसाई कर पैकेट बनाती हैं। ढाई सौ ग्राम, पांच सौ ग्राम और एक किलोग्राम के पैकेट बनातीं है। डब्बे में भी पैकेजिंग होती है।
बता दें कि सुरभि बीज प्रोड्यूसर कंपनी ने शांति से अनुबंध किया है। कंपनी एक कुंतल हल्दी के पैकेट को खरीद लेती है। बाकी पैकेट को शांति और उनसे जुड़ीं महिलाएं आसपास के गांवों में बेच देती हैं। घर का कामकाज करने के बाद प्रत्येक महिला को करीब तीन से चार हजार महीने की कमाई हो जा रही है।