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लीवर दिवस: समय से कराएं लीवर का टेस्ट, बच सकते हैं सिरोसिस से
Mon, 19 Apr 2021 04:04 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 19 Apr 2021 04:04 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
बदल रही लाइफ स्टाइल से लोग मोटापा और डायबिटीज (मधुमेह) का शिकार हो रहे हैं। यही वजह फैटी लीवर के लिए जिम्मेदार हैं। खास बात यह है कि यदि समय पर इसका टेस्ट नहीं कराया तो सिरोसिस लीवर हो सकता है। उसके बाद लीवर को डैमेज होने से कोई नहीं बचा सकता। सिर्फ एक मात्र विकल्प ट्रांसप्लांट का बचता है। ट्रांसप्लांट में रुपयों का खर्च बेहद ज्यादा है। इस बीच सबसे बड़ी दिक्कत डोनर की भी होती है। इससे एक मात्र बचने का रास्ता यही है कि अपनी लाइफ स्टाइल सुधारें।
डॉ. सुनील केजरीवाल ने बताया कि मौजूदा समय में करीब हर 10 में से पांच लोग मोटोपे का शिकार हैं। इसकी वजह से लोग लीवर की समस्या से ग्रसित हैं। बताया कि शरीर में फैट स्टोरेज सेल होते हैं। इसमें शरीर का फैट जमा होता रहता है।
जब सेल में फैट ज्यादा हो जाता है तो वह शरीर के अन्य हिस्सों में जाकर जमने लगता है। इसका कुछ हिस्सा लीवर पर भी जमा होता है। उससे लीवर में सूजन आने लगती है और लीवर सिकुड़ने लगता है। यदि शुरुआती दौर में इसका पता चल जाए तो इसका इलाज संभव है। बाद में धीरे-धीरे लीवर सिरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। यदि एक बार सिरोसिस हो जाए तो उसके बाद यह बीमारी लाइलाज हो सकती है।
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डॉ. सुनील केजरीवाल ने बताया कि मौजूदा समय में करीब हर 10 में से पांच लोग मोटोपे का शिकार हैं। इसकी वजह से लोग लीवर की समस्या से ग्रसित हैं। बताया कि शरीर में फैट स्टोरेज सेल होते हैं। इसमें शरीर का फैट जमा होता रहता है।
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जब सेल में फैट ज्यादा हो जाता है तो वह शरीर के अन्य हिस्सों में जाकर जमने लगता है। इसका कुछ हिस्सा लीवर पर भी जमा होता है। उससे लीवर में सूजन आने लगती है और लीवर सिकुड़ने लगता है। यदि शुरुआती दौर में इसका पता चल जाए तो इसका इलाज संभव है। बाद में धीरे-धीरे लीवर सिरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। यदि एक बार सिरोसिस हो जाए तो उसके बाद यह बीमारी लाइलाज हो सकती है।
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इस तरह बचें फैटी लीवर से
फैटी लीवर का सबसे ज्यादा खतरा ओवरवेट, मोटापा और डायबिटीज से होता है। इसलिए डायबिटीज होने या वजन बढ़ने पर समय-समय पर मरीजों को लीवर फक्शन टेस्ट कराते रहना चाहिए। जैसे ही लीवर में चर्बी के लक्षण दिखें तो सतर्क हो जाना चाहिए।
होमियोपैथ में भी इलाज संभव
होमिपोपैथी चिकित्सक डॉ. रूप कुमार बनर्जी ने बताया कि लीवर संबंधित तमाम बीमारियों को ठीक करने में होम्योपैथी बेहद महत्वपूर्ण है। लक्षणों के अनुसार बहुत सारी दवाएं हैं जो लीवर के खासकर फैटी लीवर के मरीजों को दी जाती हैं। इसके परिणाम अच्छे हैं और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है। होम्योपैथिक दवाएं जैसे चाइना कार्डूअस, माईरिका, चेलिडोनियम, फास्फोरस, लाइकोपोडियम, पलसाटीला, नक्स वॉमिका, एलुमिना आदि हैं जो डॉक्टरों की सलाह पर ले सकते हैं।
होमियोपैथ में भी इलाज संभव
होमिपोपैथी चिकित्सक डॉ. रूप कुमार बनर्जी ने बताया कि लीवर संबंधित तमाम बीमारियों को ठीक करने में होम्योपैथी बेहद महत्वपूर्ण है। लक्षणों के अनुसार बहुत सारी दवाएं हैं जो लीवर के खासकर फैटी लीवर के मरीजों को दी जाती हैं। इसके परिणाम अच्छे हैं और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है। होम्योपैथिक दवाएं जैसे चाइना कार्डूअस, माईरिका, चेलिडोनियम, फास्फोरस, लाइकोपोडियम, पलसाटीला, नक्स वॉमिका, एलुमिना आदि हैं जो डॉक्टरों की सलाह पर ले सकते हैं।