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बदल रहा है गोरखपुर: गीडा में हाईवे की रफ्तार बढ़ने से बिहार-बंगाल की राह भी हुई आसान, विकसित होगा नया सेक्टर

Tue, 28 Nov 2023 11:22 AM IST
vivek shukla अमर उजाल ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाल ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 28 Nov 2023 11:22 AM IST
सार

गीडा, लिंक एक्सप्रेसवे के किनारे है। इसकी उपयोगिता को देखते हुए ही गीडा ने जो नए सेक्टर बनाए हैं, वे इस लिंक एक्सप्रेसवे के किनारे हैं। इसके अलावा जल्दी ही लखनऊ-कुशीनगर हाईवे के किनारे कालेसर जीराे प्वाइंट के सामने भी एक कामर्शियल व आवासीय योजना शुरू होने जा रही है।

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With increase in speed of highway in Gida road to Bihar-Bengal also became easier
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

औद्योगिक पहचान बना रहे गीडा को हाईवे पर तेजी और सड़कों के चौड़ीकरण का विशेष फायदा मिल रहा है। अब यहां से वाराणसी, पटना और लखनऊ आने-जाने में पूरा दिन नहीं, बल्कि चार से पांच घंटे ही लगते हैं। झारखंड व छत्तीसगढ़ से आने वाला कच्चा माल पांच दिन के बजाय तीन दिन में ही यहां पहुंच रहा है। यहां तैयार माल बिहार के अलावा पश्चिमी बंगाल और असम तक आसानी से पहुंच रहा है। परिवहन सुविधाएं मिलने से गीडा के उद्योगों को विस्तार मिलने में आसानी हुई है।

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गोरखपुर से लखनऊ की दूरी करीब 280 किलोमीटर है। वर्ष 2008 से पहले यह नेशनल हाईवे टूलेन का था, जिस पर ट्रकों व अन्य वाहनों की भीड़ के चलते हमेशा जाम की नौबत रहती थी। लखनऊ आने-जाने में लोगों का दो दिन का वक्त लग जाता था। वहीं वाराणसी, पटना और अन्य बड़े शहरों तक आना-जाना तो और भी कठिन काम था, लेकिन अब वक्त बदल चुका है। गोरखपुर से लखनऊ, वाराणसी और सोनौली तक फोरलेन बन चुका है।
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इसके अलावा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को गोरखपुर से लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए जोड़ा जा रहा है। पूर्वोत्तर भारत को सीधे जोड़ने के लिए गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे का निर्माण भी प्रस्तावित है। इससे माल ढुलाई में आसानी हुई है।
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रैक प्वाइंट बनने से रेलवे का भी बढ़ा फायदा
गीडा में उद्योग बढ़ने के साथ ही रेलवे ने भी सहजनवां और नकहा जंगल में अपना रैक प्वाइंट बना दिया है। नकहा जंगल रैक प्वाइंट से खाद कारखाने से माल ढुलाई हो रही है, वहीं सहजनवां से गीडा क्षेत्र के उद्योगों का तैयार माल बाहर भेजा जाता है। पिछले दिनों लोहे के कारोबार से जुड़ी एक फैक्टरी ने खुद का वैगन खरीदा, जिससे वह अपने अलावा रेलवे के भी सामान ढुलाई में मदद होगी। इससे पूर्वोत्तर रेलवे का भी राजस्व बढ़ा है।

हाईवे के किनारे विकसित हो रहे गीडा के नए सेक्टर
गीडा, लिंक एक्सप्रेसवे के किनारे है। इसकी उपयोगिता को देखते हुए ही गीडा ने जो नए सेक्टर बनाए हैं, वे इस लिंक एक्सप्रेसवे के किनारे हैं। इसके अलावा जल्दी ही लखनऊ-कुशीनगर हाईवे के किनारे कालेसर जीराे प्वाइंट के सामने भी एक कामर्शियल व आवासीय योजना शुरू होने जा रही है। हाईवे के किनारे उद्योग होने से माल ढुलाई सुविधा जनक होगी।

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बोले उद्यमी
हमारी फैक्टरी में लोहे के नट-बोल्ट समेत कई अन्य सामान बनते हैं। पहले कच्चा माल मंगाने में चार से पांच दिन का समय लगता था, लेकिन अब यह तीन दिन में आ जाता है। तैयार माल को भी वाराणसी, लखनऊ आदि जगहों पर भेजने में आसानी होती है। समय बचने पर अधिक माल की आपूर्ति दी जा सकती है।- आरएन सिंह, अध्यक्ष चैंबर्स ऑफ इंडस्ट्रीज।

हमारी फैक्टरी में तैयार माल बिहार के अलावा राजस्थान समेत अन्य जगहों पर भी जाता है। पहले रास्ता खराब होने पर ट्रांसपोर्टर जाने को तैयार नहीं होते थे। कई अन्य दिक्कतें आ रही थीं। लेकिन, अब इस तरह की कोई दिक्कत नहीं होती। यहां से तैयार माल लेकर गाड़ियां राजस्थान जाती हैं और वहां से दूसरा सामान लेकर लौटती हैं।- आकाश जालान, उद्यमी।

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सड़कों की हालत सुधरने से लोगों को गोरखपुर आने में कोई हिचक नहीं है। लिंक एक्सप्रेस वे बन जाने पर यहां से लखनऊ के लिए एक और वैकल्पिक मार्ग मौजूद होगा। इससे गीडा का उत्पाद अन्य जगहों पर भेजने में सुविधा होगी। बिहार और पश्चिम बंगाल के अलावा नेपाल तक पहुंच अब सुगम हो गया है।- दीपक कारीवाल, मंडल अध्यक्ष लघु उद्योग भारती।

गोरखपुर का रेडिमेड गारमेंट अब अपनी खास पहचान बना रहा है तो इसकी एक बड़ी वजह सड़कों की बेहतर सुविधा भी है। यहां तैयार माल पूरे यूपी में जा रहा है। छोटे-छोटे उद्यमियों के यहां तैयार स्कूल ड्रेस दूसरे जिलों के व्यापारी अपनी गाड़ी से आकर ले जाते हैं। इसके अलावा बाहर से कपड़ा मंगाना भी पहले की अपेक्षा अधिक आसान हो गया है।- रमाशंकर शुक्ला, अध्यक्ष चैंबर ऑफ रेडिमेड गारमेंट्स।

 
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