Exclusive: भोजन में ढूंढेंगे अल्जाइमर, पार्किंसन का उपचार, एम्स और आयुष विश्वविद्यालय के बीच हो चुका है करार
डॉ. अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि करी पत्ता, अश्वगंधा, हल्दी, कसूरी मेथी में औषधीय गुण होते हैं, जो शरीर में एंटीऑक्सीडेंट का काम करते हैं। अगर इनका सही इस्तेमाल किया जाए और तो कई न्यूरो की बीमारियों को रोका जा सकता है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय भोजन में अल्जाइमर, डिमेंशिया और पार्किंसन की दवाएं ढूंढेंगे। क्योंकि, इन बीमारियों की दवाएं हमारे भोजन में ही मौजूद हैं। केवल इनके सही औषधीय मिश्रण और पौष्टिक खाद्य पदार्थों से बनाया जा सकता है।
पौष्टिक-औषधीय खाद्य पदार्थों के सही मिश्रण से दवाएं बनाने पर भी काम होगा। इसके लिए दोनों संस्थानों के बीच करार भी हो चुका है। जानकारी के मुताबिक, आयुर्वेद पर आधारित होने से इन दवाओं का शरीर पर कोई भी दुष्प्रभाव नहीं होगा। साथ ही समय रहते इलाज भी होगा।
महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि अल्जाइमर, डिमेंशिया, पार्किंसन जैसी बीमारियों की मुख्य वजह शरीर से न्यूरॉन्स का नष्ट होना है। विज्ञान की भाषा में इसे न्यूरोडिजनेरशन कहते हैं। न्यूरो की बीमारियां इसी वजह से होती है।
पूर्वांचल की बात करें तो 60 फीसदी आबादी न्यरोडिजनेरशन से पीड़ित है। इन्हें पौष्टिक और औषधीय पदार्थों का मिश्रण दिया जाए तो शरीर में एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा मिलेगा, इससे इनके न्यूरोडिजनेशन कम होंगे। अगर एक बार न्यूरोडिजेनशन कम होने शुरू हुए तो मस्तिष्क सही तरीके से काम करेंगे और डिमेंशिया, पार्किंसन अल्जाइमर जैसी बीमारियां रुक सकेंगी।
बताया कि इस पर एम्स और आयुष विश्वविद्यालय मिलकर काम करेंगे। इसके लिए समझौते पर दोनों संस्थानों के बीच हस्ताक्षर भी हो चुका है।
इनमें मिलते हैं औषधीय गुण, सही मिश्रण जरूरी
डॉ. अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि करी पत्ता, अश्वगंधा, हल्दी, कसूरी मेथी में औषधीय गुण होते हैं, जो शरीर में एंटीऑक्सीडेंट का काम करते हैं। अगर इनका सही इस्तेमाल किया जाए और तो कई न्यूरो की बीमारियों को रोका जा सकता है। इनके साथ अन्य खाद्य पदार्थों का मिश्रण किया जाए तो अल्जाइमर, पार्किंसन जैसी बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है। इस पर शोध खत्म होने के बाद दवाएं बनाने पर काम होगा।