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गोरखपुर: सिगरेट के डिब्बों पर भी लिखी जाए सीओपीडी रोग की चेतावनी, हर साल जा रही 10 लाख लोगों की जान
Tue, 16 Nov 2021 02:20 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 16 Nov 2021 02:20 PM IST
सार
आईएमए सचिव डॉ. वीएन अग्रवाल ने भेजा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र, सीओपीडी से हर साल जा रही 10 लाख लोगों की जान, चेस्ट फिजिशियन डॉ. अरशद नदीम ने प्रेस कांफ्रेंस में दी जानकारी।
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धूम्रपान
- फोटो : Social Media
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विस्तार
सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) बेहद खतरनाक और गंभीर बीमारी है। यह धूम्रपान से होती है। 70 से 80 प्रतिशत मरीज धूम्रपान के कारण सीओपीडी का शिकार हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में सिगरेट के डिब्बों पर कैंसर की तरह सीओपीडी के प्रति भी वैधानिक चेतावनी अंकित की जानी चाहिए।
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ये बातें आईएमए के सचिव व चेस्ट फिजीशियन डॉ. वीएन अग्रवाल ने सोमवार को नारायणी हॉस्पिटल पर संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहीं। कहा कि इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र भी भेजा गया है। साथ ही ट्वीट भी किया गया है।
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उनसे अपील की गई है कि सिगरेट और बीड़ी के डिब्बों पर कैंसर के साथ सीओपीडी की चेतावनी भी लिखी जाए। जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग सीओपीडी के प्रति जागरूक हों। बताया कि सीओपीडी में फेफड़ों के फूलने और पिचकने की क्षमता घट जाती है। साथ ही सांस की नली में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से मरीज को सांस लेने में ज्यादा परेशानी होती है। इस मौसम में ऐसे मरीजों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।
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इसी क्रम में चेस्ट फिजिशियन डॉ. अरशद नदीम ने भी मोहद्दीपुर स्थित एक होटल में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान बताया कि पूरे विश्व में मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण सीओपीडी है। पूरे विश्व में सीओपीडी से करीब 30 करोड़ मरीज पीड़ित हैं। यह धुआं, प्रदूषण एवं धूम्रपान के कारण होती है। शोध में यह बात भी सामने आई है कि बचपन से कम विकसित फेफड़ों वाले व्यक्तियों में भविष्य में सीओपीडी होने का खतरा ज्यादा होता है। बताया कि अब तक सीओपीडी का स्थायी इलाज नहीं है। ऐसे में बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है। समय-समय पर फेफड़ों की जांच कराते रहना चाहिए।