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Gorakhpur News: गोरखपुर में फर्जी निकला वार्ड ब्वॉय का नियुक्ति पत्र, सीएमओ ने दर्ज कराया केस
Tue, 30 May 2023 12:50 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 30 May 2023 12:50 PM IST
सार
देवरिया के शाहपुर शुक्ला, गोल्ड आनंद नगर निवासी राजन मिश्रा पुत्र विरेंद्र मिश्रा ने निदेशक के हस्ताक्षर से संविदा पर नियुक्ति का पत्र सीएमओ को भेजा था। निदेशक के हस्ताक्षर का पत्र देखकर सीएमओ के कान खड़े हो गए। क्योंकि, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति का अधिकार सीएमओ का है और पत्र पर निदेशक के हस्ताक्षर थे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
विस्तार
गोरखपुर में फर्जी नियुक्ति पत्र पर वार्ड ब्वाॅय की नौकरी हासिल करने की कोशिश करने वाले युवक पर पुलिस ने जालसाजी का केस दर्ज कर लिया। जांच के दौरान पता चला कि संविदा पर वार्ड ब्वाॅय की नियुक्ति संबंधी चिकित्सा स्वास्थ एवं परिवार कल्याण के निदेशक के हस्ताक्षर व मुहर लगा पत्र व्हाट्सएप के माध्यम से सीएमओ को मिला। सीएमओ की तहरीर पर कोतवाली पुलिस देवरिया के राजन मिश्रा के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।
जानकारी के मुताबिक, देवरिया के शाहपुर शुक्ला, गोल्ड आनंद नगर निवासी राजन मिश्रा पुत्र विरेंद्र मिश्रा ने निदेशक के हस्ताक्षर से संविदा पर नियुक्ति का पत्र सीएमओ को भेजा था। निदेशक के हस्ताक्षर का पत्र देखकर सीएमओ के कान खड़े हो गए। क्योंकि, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति का अधिकार सीएमओ का है और पत्र पर निदेशक के हस्ताक्षर थे।
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संदेह के आधार पर सीएमओ ने संदेश को सुरक्षित कर लिया, लेकिन आरोपी ने भेजे गए पत्र को व्हाट्सएप मैसेज डिलीट कर दिया। उन्होंने मामले में सूचना निदेशक को दे दी। उनके निर्देश पर पत्र में दर्ज नाम के खिलाफ जालसाजी का मुकदमा दर्ज करा दिया।
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने बताया कि इस मामले में पत्र मिलने के बाद सात दिन तक संबंधित युवक के ज्वाइन करने के लिए कार्यालय में आने का इंतजार किया गया। पत्र बीते 19 मई को व्हाट्सएप से भेजा गया था। योजना थी कि युवक को जब चार्ज लेने आएगा तो उसको पुलिस के हवाले किया जाएगा। वह चार्ज लेने नहीं आया। ऐसे में प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है।
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जानकारी के मुताबिक, देवरिया के शाहपुर शुक्ला, गोल्ड आनंद नगर निवासी राजन मिश्रा पुत्र विरेंद्र मिश्रा ने निदेशक के हस्ताक्षर से संविदा पर नियुक्ति का पत्र सीएमओ को भेजा था। निदेशक के हस्ताक्षर का पत्र देखकर सीएमओ के कान खड़े हो गए। क्योंकि, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति का अधिकार सीएमओ का है और पत्र पर निदेशक के हस्ताक्षर थे।
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संदेह के आधार पर सीएमओ ने संदेश को सुरक्षित कर लिया, लेकिन आरोपी ने भेजे गए पत्र को व्हाट्सएप मैसेज डिलीट कर दिया। उन्होंने मामले में सूचना निदेशक को दे दी। उनके निर्देश पर पत्र में दर्ज नाम के खिलाफ जालसाजी का मुकदमा दर्ज करा दिया।
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने बताया कि इस मामले में पत्र मिलने के बाद सात दिन तक संबंधित युवक के ज्वाइन करने के लिए कार्यालय में आने का इंतजार किया गया। पत्र बीते 19 मई को व्हाट्सएप से भेजा गया था। योजना थी कि युवक को जब चार्ज लेने आएगा तो उसको पुलिस के हवाले किया जाएगा। वह चार्ज लेने नहीं आया। ऐसे में प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है।