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Gorakhpur News: विपुल हर साल बदलता था लग्जरी कार, तीन साल में बदली लाइफस्टाइल

Thu, 29 Jan 2026 01:00 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 29 Jan 2026 01:00 AM IST
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Vipul used to change his luxury car every year, his lifestyle changed in three years.
 फरार तस्कर सैम तिवारी की फोटो। स्रोत संवाद
एकला बांध के पास मादक पदार्थ पकड़े जाने का मामला
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- भागे आरोपी सैम उर्फ विपुल तिवारी के बैंकाॅक कनेक्शन की परतें खोल रही पुलिस, संदिग्ध लेन-देन से खुल सकते हैं राज

- कॉल डिटेल, चैट हिस्ट्री और लोकेशन डेटा के जरिये खपत नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी पुलिस
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़हलगंज (गोरखपुर)। एकला बांध के पास से पौने दो किलो मादक पदार्थ पकड़े जाने के मामले में भागे बड़हलगंज के टीचर कॉलोनी सिदुहापार निवासी सैम तिवारी उर्फ विपुल तिवारी का महज तीन साल में लाइफस्टाइल बदल गया था। वह हर साल लग्जरी कार बदलता था। वह अक्सर बैंकॉक जाता रहता था। पुलिस अब तस्करी के मामले में जेल भेजे गए आरोपियों के मोबाइल की कॉल डिटेल, व्हाट्सएप चैट हिस्ट्री और लोकेशन डाटा के जरिये उसके नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हुई है।
पुलिस जांच का फोकस इस बात पर केंद्रित है कि बरामद मादक पदार्थ किन इलाकों में खपाया जाता था और इसके पीछे काम कर रहा नेटवर्क कितना बड़ा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एकला बांध क्षेत्र मादक पदार्थ की सप्लाई और डिलीवरी का अहम केंद्र बन चुका था। यहां से आसपास के कस्बों और ग्रामीण इलाकों में नशे की खेप भेजी जाती थी। बरामद मादक पदार्थ की मात्रा को देखते हुए पुलिस का मानना है कि यह केवल स्थानीय खपत के लिए नहीं था, बल्कि इसे संगठित तरीके से नेपाल से लेकर बिहार तक सप्लाई किया जाना था। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कुछ संदिग्ध ठिकानों और संपर्कों की जानकारी सामने आई है, जिनकी पुष्टि की जा रही है।
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एएनटीएफ लखनऊ और गीडा पुलिस की संयुक्त टीम ने सोमवार को एकला बांध के पास छह तस्करों को दबोच लिया था। तस्करों की पहचान खजनी थानाक्षेत्र के शमशाद अहमद उर्फ साहिल, गोला बाजार के मिश्रौली निवासी श्याम मोहन यादव, देवरिया के एकौना निवासी संतोष पांडेय, गगहा के गजपुर निवासी जितेंद्र गुप्ता, तिवारीपुर के सूरजकुंड निवासी राहुल दुबे और बेलीपार के मलाव निवासी मनोज उर्फ संटू चौरसिया के रूप में हुई थी। जबकि बड़हलगंज के टीचर कॉलोनी सिदुहापार निवासी सैम तिवारी उर्फ विपुल तिवारी भाग गया था। पुलिस ने आरोपियों के पास से 770 ग्राम आर्गेनिक/ हाइड्रोपोनिक बीड्स और 1.025 किग्रा स्मैक/हेरोइन बरामद किए गए थे। गिरफ्तार सभी आरोपियों को पुलिस ने जेल भिजवा दिया था।
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सैम उर्फ विपुल तिवारी पर टिकी जांच की धुरी
जांच आगे बढ़ने पर सिधुआपार स्थित टीचर कॉलोनी निवासी सैम उर्फ विपुल तिवारी का नाम प्रमुख रूप से सामने आया। पुलिस का मानना है कि उसकी भूमिका केवल एक कड़ी तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे नेटवर्क के संचालन से जुड़ी हो सकती है। इसी वजह से उसे इस मामले का मुख्य साजिशकर्ता माना जा रहा है।

तीन साल में बदली लाइफस्टाइल
पुलिस जांच में सैम तिवारी की पिछले तीन वर्षों की जीवनशैली बड़ा आधार बनी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, वह हर साल नई लग्जरी कार में नजर आता था। उसकी आर्थिक स्थिति में अचानक आई तेजी पहले भी चर्चा का विषय रही थी। अब पुलिस यह जानने में जुटी है कि उसकी आय का वास्तविक स्रोत क्या था। क्या मादक पदार्थ तस्करी से अर्जित धन को वैध दिखाने की कोशिश की गई।

बैंकाक कनेक्शन की परतें खोल रही पुलिस
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि सैम तिवारी के पिता जीवनसेन तिवारी लंबे समय तक थाईलैंड की राजधानी बैंकाक में काम कर चुके हैं। सैम खुद भी कुछ वर्षों तक बैंकाक में रहकर रोजगार से जुड़ा बताया जाता है। पुलिस को आशंका है कि इसी दौरान उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्क बने, जिनका इस्तेमाल बाद में तस्करी नेटवर्क खड़ा करने में किया गया। बैंकाक से जुड़े यात्रा रिकॉर्ड और संपर्कों की गहन जांच की जा रही है।


संदिग्ध लेन-देन से खुल सकते हैं राज
ग्रामीणों ने बताया कि करीब दो माह पहले बाछेपार निवासी पेट्रोल पंप संचालक लड्डू यादव के खाते में बाहर से 17 लाख 99 हजार रुपये आने का मामला भी जांच के दायरे में है। पुलिस को शक है कि मादक पदार्थ की बिक्री से प्राप्त रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर घुमाया जा रहा था। इस लेन-देन की कड़ी को मौजूदा प्रकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।


कॉल डिटेल और लोकेशन से खपत नेटवर्क की तलाश
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि मादक पदार्थ किन इलाकों में खपाया जाता था। इसके लिए गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। साथ ही मोबाइल कॉल डिटेल, चैट हिस्ट्री और लोकेशन डेटा के जरिये खपत नेटवर्क की परतें खोलने की कोशिश की जा रही है।



कोट
भागे आरोपी की गिरफ्तारी के लिए स्थानीय पुलिस के साथ एएनटीएफ गोरखपुर की टीम भी संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। प्राथमिकी जांच में सैम तिवारी के खिलाफ कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है, लेकिन मादक पदार्थ तस्करी मामले में उसकी भूमिका की गहन जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क और खपत के रास्तों का पर्दाफाश होने की संभावना है।
- आनंद प्रकाश तिवारी, जॉइंट डायरेक्टर नाॅरकोटिक्स
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