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डीडीयू : वित्त समिति की बैठक 25 को, पास होगा बजट
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में वित्त समिति की बैठक 25 मार्च को होगी। उसी दिन वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बजट भी प्रस्तुत किया जाएगा। उससे पहले 24 मार्च को विकास परिषद की बैठक होगी। दोनों समितियों की बैठक को लेकर एजेंडा तैयार किया जा रहा है।
डीडीयू में सत्र 2025-26 के लिए 237 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी मिली थी। उस समय कई कार्य प्रस्तावित किए गए थे। आय के स्रोत बढ़ाने की दिशा में भी कार्य हुआ था। पिछले वर्ष डीडीयू प्रशासन की ओर से लगभग 75 करोड़ रुपये के घाटे का बजट प्रस्तुत किया गया था। माना जा रहा है कि इस बार के बजट में यह घाटा और बढ़ सकता है। बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय के आय और खर्च के बीच बड़ा अंतर है।
विश्वविद्यालय के आय का प्रमुख स्रोत छात्रों का शुल्क है। पिछले कुछ वर्षों में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों से विश्वविद्यालय की आय बढ़ी है लेकिन फिर भी व्यय की तुलना में यह बेहद कम है। सिर्फ शिक्षकों और कर्मचारियों के सैलरी के मद में ही लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च हो रहा है। पहले वेतन का आधा भार विश्वविद्यालय प्रशासन उठाता था, जबकि आधा हिस्सा प्रदेश सरकार देती थी। कोरोना महामारी के समय से ही शासन का अंशदान 50 के बजाय लगभग 10-15 प्रतिशत ही रह गया है। शासन से अपेक्षित अंशदान न मिलने को ही इस घाटे का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
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रिसर्च, इनोवेशन और स्टार्टअप का बढ़ेगा बजट
डीडीयू प्रशासन के मुताबिक, इस बार रिसर्च, इनोवेशन, स्टार्टअप और सांस्कृतिक गतिविधियों के मद में बजट बढ़ाया जाएगा। बजट में छात्र हित से जुड़े और भी कई निर्णय लिए जाएंगे।
बोलीं कुलपति
इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि 25 को वित्त समिति की बैठक में बजट प्रस्तुत किया जाएगा। बजट में छात्र हित में कई योजनाएं शुरू किए जाने की योजना है। वित्त समिति की बैठक के लिए एजेंडा तैयार कराया जा रहा है।
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डीडीयू में सत्र 2025-26 के लिए 237 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी मिली थी। उस समय कई कार्य प्रस्तावित किए गए थे। आय के स्रोत बढ़ाने की दिशा में भी कार्य हुआ था। पिछले वर्ष डीडीयू प्रशासन की ओर से लगभग 75 करोड़ रुपये के घाटे का बजट प्रस्तुत किया गया था। माना जा रहा है कि इस बार के बजट में यह घाटा और बढ़ सकता है। बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय के आय और खर्च के बीच बड़ा अंतर है।
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विश्वविद्यालय के आय का प्रमुख स्रोत छात्रों का शुल्क है। पिछले कुछ वर्षों में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों से विश्वविद्यालय की आय बढ़ी है लेकिन फिर भी व्यय की तुलना में यह बेहद कम है। सिर्फ शिक्षकों और कर्मचारियों के सैलरी के मद में ही लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च हो रहा है। पहले वेतन का आधा भार विश्वविद्यालय प्रशासन उठाता था, जबकि आधा हिस्सा प्रदेश सरकार देती थी। कोरोना महामारी के समय से ही शासन का अंशदान 50 के बजाय लगभग 10-15 प्रतिशत ही रह गया है। शासन से अपेक्षित अंशदान न मिलने को ही इस घाटे का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
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रिसर्च, इनोवेशन और स्टार्टअप का बढ़ेगा बजट
डीडीयू प्रशासन के मुताबिक, इस बार रिसर्च, इनोवेशन, स्टार्टअप और सांस्कृतिक गतिविधियों के मद में बजट बढ़ाया जाएगा। बजट में छात्र हित से जुड़े और भी कई निर्णय लिए जाएंगे।
बोलीं कुलपति
इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि 25 को वित्त समिति की बैठक में बजट प्रस्तुत किया जाएगा। बजट में छात्र हित में कई योजनाएं शुरू किए जाने की योजना है। वित्त समिति की बैठक के लिए एजेंडा तैयार कराया जा रहा है।