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जीडीए के मानचित्र स्वीकृति में फर्जीवाड़े का मामला: गोरखपुर के आर्किटेक्ट भी हुए सतर्क, खुद शुरू की पड़ताल
Wed, 21 Jul 2021 12:03 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 21 Jul 2021 12:03 PM IST
सार
लखनऊ के आर्किटेक्ट की आईडी पर मानचित्र में फर्जीवाड़े पर बढ़ी सतर्कता। गोरखपुर आर्किटेक्ट एसोसिएशन ने फर्जीवाड़े से बचाव के लिए किया मंथन।
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गोरखपुर विकास प्राधिकरण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जीडीए के मानचित्र स्वीकृति में फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद गोरखपुर के आर्किटेक्ट सतर्क हो गए हैं और वे खुद भी विभिन्न मामले की पड़ताल कर रहे हैं। उन्हें भय है कि लखनऊ के आर्किटेक्ट जितेंद्र त्रिपाठी की तरह कहीं उनकी आईडी का भी गलत तरीके से इस्तेमाल ने किया गया हो और मानचित्र न स्वीकृत करा लिए गए हों। यही वजह है कि यहां के कई प्रमुख आर्किटेक्ट ने खुद ही ऑनलाइन इसकी पड़ताल शुरू कर दी है। वहीं गोरखपुर आर्किटेक्ट एसोसिएशन ने बैठक बुलाकर इस फर्जीवाड़े से बचाव के उपायों पर चर्चा की।
बता दें कि लखनऊ के आर्किटेक्ट ने कमिश्नर और जीडीए उपाध्यक्ष को ईमेल कर यह आरोप लगाया है कि उनकी आईडी और दस्तखत का फर्जी तरीके से इस्तेमाल कर जीडीए से 50 से अधिक मानचित्र स्वीकृत करा लिए गए हैं। मामला प्रकाश में आने के बाद से आर्किटेक्ट और जीडीए अफसरों, कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
प्राधिकरण मामले की जांच भी कर रहा है। वहीं मंगलवार की रात इसे लेकर गोरखपुर आर्किटेक्ट एसोसिएशन ने शहर के एक होटल में बैठक की। इसमें 40 से अधिक आर्किटेक्ट शामिल हुए। बैठक में इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया गया कि इस फर्जीवाड़े से कैसे बचा जाए।
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दरअसल, 300 वर्गफुट तक के मानचित्रों की मंजूरी की ज्यादातर जिम्मेदारी आर्किटेक्ट की ही होती है। ऐसे में इन मानचित्र में जीडीए की तरफ से ज्यादा पड़ताल नहीं की जाती, बल्कि आर्किटेक्ट के अनुमोदन के बाद ही स्वीकृत कर दिया जाता है। एसोसिएशन के मनीष मिश्रा ने भी विचार रखे।
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बता दें कि लखनऊ के आर्किटेक्ट ने कमिश्नर और जीडीए उपाध्यक्ष को ईमेल कर यह आरोप लगाया है कि उनकी आईडी और दस्तखत का फर्जी तरीके से इस्तेमाल कर जीडीए से 50 से अधिक मानचित्र स्वीकृत करा लिए गए हैं। मामला प्रकाश में आने के बाद से आर्किटेक्ट और जीडीए अफसरों, कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
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प्राधिकरण मामले की जांच भी कर रहा है। वहीं मंगलवार की रात इसे लेकर गोरखपुर आर्किटेक्ट एसोसिएशन ने शहर के एक होटल में बैठक की। इसमें 40 से अधिक आर्किटेक्ट शामिल हुए। बैठक में इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया गया कि इस फर्जीवाड़े से कैसे बचा जाए।
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दरअसल, 300 वर्गफुट तक के मानचित्रों की मंजूरी की ज्यादातर जिम्मेदारी आर्किटेक्ट की ही होती है। ऐसे में इन मानचित्र में जीडीए की तरफ से ज्यादा पड़ताल नहीं की जाती, बल्कि आर्किटेक्ट के अनुमोदन के बाद ही स्वीकृत कर दिया जाता है। एसोसिएशन के मनीष मिश्रा ने भी विचार रखे।