गोरखपुर: खाद कारखाने से दो महीने तक सिर्फ पूर्वांचल में ही यूरिया आपूर्ति, एचयूआरएल ने मंत्रालय को भेजा पत्र
प्लांट में फिलहाल 50 ट्रक यूरिया की रोज निकासी हो रही है। प्रबंधन की मानें तो यूरिया आवंटन के लिए निर्धारण मंत्रालय की ओर से किया जाता है। इसके साथ ही मालगाड़ी से यूरिया की आपूर्ति की तैयारियों को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) में तैयार हो रही नीम कोटेड यूरिया से फिलहाल कुछ समय तक पूर्वांचल के ही खेतों में हरियाली आएगी। मानक से कम उत्पादन और ट्रांसपोर्टेशन के खर्च को देखते हुए एचयूआरएल करीब दो महीने तक पूर्वांचल के जिलों में ही आपूर्ति देना चाहता है।
इसके लिए एचयूआरएल प्रबंधन ने मंत्रालय को पत्र भी भेजा है। पूरी क्षमता से यूरिया का उत्पादन होने पर बिहार और झारखंड को भी आपूर्ति की जाएगी।
दरअसल, एचयूआरएल के प्लांट की वर्तमान क्षमता रोजाना 3850 टन यूरिया उत्पादन की है। मगर, वर्तमान में करीब 2600 टन यूरिया का ही प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है। पूरी क्षमता से यूरिया उत्पादन में अभी दो महीने का समय लग सकता है।
ऐसे में प्रबंधन यूरिया की आपूर्ति, पूर्वांचल के जिलों में ही सीमित रखना चाहता है। साथ ही अभी ट्रेनों से आपूर्ति नहीं शुरू हो सकी है। प्लांट में फिलहाल 50 ट्रक यूरिया की रोज निकासी हो रही है। प्रबंधन की मानें तो यूरिया आवंटन के लिए निर्धारण मंत्रालय की ओर से किया जाता है। इसके साथ ही मालगाड़ी से यूरिया की आपूर्ति की तैयारियों को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है।
मालगाड़ी पर यूरिया को लादने के लिए 12 अत्याधुनिक मशीनें भी मंगाई गई हैं। मालगाड़ी से यूरिया की आपूर्ति में खर्च कम आएगा। यूरिया को बनाने में एचयूआरएल का प्रति किलोग्राम 28 रुपये खर्च आएगा। किसानों को इसे 266.5 रुपये प्रति बोरी (एक बोरी में 45 किलोग्राम) यूरिया मिलेगी।
खाद कारखाने में तकनीकी खराबी से प्रभावित हुआ उत्पादन
खाद कारखाने के यूरिया प्लांट की मशीन में रविवार की देर रात कुछ तकनीकी दिक्कत आने की वजह से यूरिया का उत्पादन प्रभावित हुआ है। हिन्दुस्तान उवर्रक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) के अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी टीम, दिक्कत को दूर करने में जुटी है। सोमवार की देर रात तक दिक्कत दूर कर ली जाएगी, जिसके बाद उत्पादन शुरू हो जाएगा।
बता दें कि 26 मार्च से एचयूआरएल के नए प्लांट में यूरिया का उत्पादन शुरू हो गया था। रोजाना करीब 2600 टन यूरिया का उत्पादन हो रहा है। लेकिन, रविवार की देर रात मशीन में तकनीकी दिक्कत आने से उत्पादन प्रभावित हो गया। यूरिया का उत्पादन भले ही ठप हुआ लेकिन अमोनिया का उत्पादन चालू है। सोमवार को दिक्कत दूर कर, दोबारा मशीन चालू हुई लेकिन फिर तकनीकी दिक्कत आ गई, जिसे दुरुस्त करने में तकनीकी टीम जुटी हुई है।
एचयूआरएल के वरिष्ठ प्रबंधक सुबोध दीक्षित ने बताया कि प्लांट में उत्पादन शुरुआती दौर में है। तकनीकी दिक्कत रूटीन की समस्या है। यूरिया का उत्पादन प्रभावित हुआ है लेकिन बंद नहीं हुआ है। अमोनिया सुचारु रूप से बन रहा है। देर रात तक प्लांट में पूरी तरह उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। ब्यूरो