UP Panchayat Election 2021: कई ग्राम पंचायतों में एक ही परिवार की सरकार, जानिए कैसे
- कहीं दादा से पौत्र तक तो कहीं बहू से पुत्रवधू ने संभाली कमान
- 50-50 सालों से कर रहे हैं प्रधानी
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में तमाम पंचायतें ऐसी हैं, जहां एक ही परिवार की सरकार लंबे समय से रही है। ऐसे कई परिवारों का चुनावी सफर दादा से शुरू होकर अब पौत्र तक पहुंच गया है। राजनीति में परिवारवाद की आलोचना करने वाली पार्टियां भी इन परिवारों के मोह से कभी नहीं निकल सकीं।
अभेद किला बना डोहरिया ग्राम पंचायत
जंगलकौड़िया विकास खंड के डोहरिया ग्राम पंचायत में प्रधान के पद पर गोरख सिंह के परिवार का वर्चस्व करीब 50 वर्षों से है। ज्यादातर समय ग्राम प्रधानी गोरख सिंह के परिवार में रही है। अगर आरक्षण बदला तो भी उनका कोई खास ही प्रधान बन गया। कुछ इसी तरह रामूघाट ग्राम पंचायत है। पिछले 30 वर्षों से सुरेंद्र सिंह के परिवार का व्यक्ति प्रधान चुना जाता है। आरक्षित होने पर सुरेंद्र सिंह के समर्थन वाला प्रत्याशी चुनाव जीत जाता है। भरोहिया विकास खंड के जसवल ग्राम पंचायत में पिछले 20 साल से आनंद निषाद के घर में प्रधानी है। इस बार अंगद की पत्नी प्रत्याशी हैं।
15 वर्षों से है सरकार
पाली विकास खंड के नेवास गांव में पिछले 15 साल से रामेंद्र त्रिपाठी उर्फ छोटकू बाबा के परिवार का दबदबा है। पिछली बार जीत हासिल करने वाली उनकी पत्नी राजेश्वरी त्रिपाठी इस बार भी चुनाव मैदान में हैं। राजेश्वरी त्रिपाठी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत 2010 में निर्विरोध निर्वाचन के साथ हुई। इसके पहले उनकी सास खजाना तिवारी गांव की प्रधान रह चुकी हैं।
चौथी बार चुनाव मैदान में
सहजनवां विकास खंड के बुदहट ग्राम पंचायत पर लगातार तीन बार से गिरिजेश शुक्ला परिवार काबिज है। गिरिजेश तीन बार जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीत चुके हैं। उनकी पत्नी नीलम शुक्ला ही ग्राम प्रधान हैं। इस बार भी नीलम चुनाव लड़ रही हैं।
टेलहनापार में नीरू का राज
चौरीचौरा तहसील क्षेत्र के सरदारनगर विकास खंड के ग्राम सभा टेलहनापार में राम नक्षत्र यादव के परिवार की सरकार है। उनकी पत्नी नीरू देवी 1995 से ग्राम प्रधान हैं। 26 वर्षों से प्रधान रहीं, नीरू इस बार भी चुनाव मैदान में हैं। यही नहीं जिला पंचायत वार्ड का चुनाव भी राम नक्षत्र यादव लगातार जीत रहे हैं। वह 1995 से ही जिला पंचायत सदस्य हैं।
आद्या जहां रहे वहीं प्रधानी
सरदारनगर विकासखंड के ग्राम सभा रउतैनिया सरदार में आद्या प्रसाद पासवान के परिवार में पिछले 34 वर्षों से प्रधानी है। प्रधान संघ के अध्यक्ष आद्या प्रसाद पासवान ने 1988 में ग्राम प्रधान का पहला चुनाव जीता था। तब से 2015 तक कभी आद्या तो कभी उनकी पत्नी चुनाव जीतते आई हैं। अगर सीट का आरक्षण बदला तो समर्थित उम्मीदवार बाजी मार लेता है। इस बार महिला सीट है। लिहाजा, आद्या अपने भतीजे की पत्नी विनीता देवी को चुनाव लड़ा रहे हैं।
निर्विरोध ही बनती रही गांव की सरकार
खजनी तहसील क्षेत्र की ग्रामसभा ढढौना के प्रधान पद स्वर्गीय जयनारायण सिंह उर्फ शीत सिंह के परिवार के नाम है। इस बार को छोड़ दिया जाए तो हमेशा निर्विरोध निर्वाचन हुआ है। गांव के मृत्युंजय सिंह कहते हैं कि वर्ष 2000 के बाद सीट पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित हो गई थी। तब भी इस परिवार की समर्थित उम्मीदवार राजपति देवी निर्विरोध ग्राम प्रधान चुनी गईं। इस बार महिला सुरक्षित सीट है। इसलिए स्वर्गीय शीत सिंह की पत्नी सुनीता सिंह चुनाव मैदान में हैं।
दो परिवारों में 25 वर्षों से प्रधानी
बड़हलगंज विकास खंड के बेइली में राजेश यादव व ग्राम पंचायत छपिया उमराव में रामबृक्ष यादव का परिवार प्रधान बनता रहा है। यह सिलसिला पिछले 25 वर्षों से चल रहा है। इस बार भी राजेश यादव मैदान में हैं। इसी तरह छपिया उमराव के रामबृक्ष यादव हैं। दो बार रामबृक्ष प्रधान रहे, फिर पत्नी ने कमान संभाल ली। अब पुत्र वधू ग्राम प्रधान है। निवर्तमान ग्राम प्रधान कौशिल्या यादव इस बार भी चुनाव मैदान में हैं।