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यूपी बोर्ड: 74356 विद्यार्थी अब भी राहत के इंतजार में, परीक्षाओं को निरस्त किए जाने के पक्ष में हैं अभिभावक

Sat, 15 May 2021 12:40 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 15 May 2021 12:40 PM IST
सार

सीबीएसई और सीआईएससीई दसवीं की परीक्षाएं कर चुका है निरस्त।

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UP board 74356 students still waiting for relief after CBSE AND CISCE 10th class board exam cancel
यूपी बोर्ड : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और सीआईएससीई की ओर से कोरोना महामारी के दृष्टिगत दसवीं की परीक्षाएं निरस्त किए जाने के बाद से यूपी बोर्ड में अध्ययनरत छात्र भी राहत के इंतजार में हैं। अभिभावक परीक्षाओं को निरस्त किए जाने के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि जब गोरखपुर जिले में यूपी बोर्ड के सापेक्ष इन दोनों बोर्ड से दसवीं में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या महज 25 फीसदी है। इसके बावजूद इनकी परीक्षाएं निरस्त की जा रही हैं। जबकि यूपी बोर्ड में अध्ययनरत 74356 विद्यार्थियों के हित में बोर्ड कोई फैसला क्यों नहीं ले रहा है।
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जिले में सीबीएसई बोर्ड से संचालित 117 स्कूलों की दसवीं कक्षा में 15 हजार विद्यार्थी पंजीकृत हैं। वहीं सीआईएससीई से तीन हजार विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर को देखते हुए सीबीएसई और सीआईएससीई ने दसवीं की परीक्षाएं निरस्त कर दी है। वहीं इनके परिणाम प्री बोर्ड, यूनिट टेस्ट, अर्द्धवार्षिक परीक्षा के साथ नौंवी कक्षा के नंबरों के माध्यम से देने के निर्देश दिए हैं। जबकि यूपी बोर्ड में पंजीकृत विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के बाद भी परीक्षाओं को निरस्त किए जाने पर कोई फैसला नहीं लिया जा रहा है। 
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जुबली इंटर कॉलेज की दसवीं कक्षा में बच्चे को पढ़ाने वाले पिता रमेश सिंह ने कहा कि सरकार को इस पर तत्काल फैसला लेना चाहिए। महामारी के खौफ में बच्चों की मनोदशा परीक्षा में शामिल होने जैसी नहीं हैं। एमजी इंटर कॉलेज के अभिभावक सुभाष पांडेय ने कहा कि बच्चों के वैक्सीनेशन भी अभी शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में दसवीं की परीक्षाएं निरस्त होनी ही चाहिए। 
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तीन साल के परिणाम को आधार बना सकता है बोर्ड

एक अन्य विद्यालय में पढ़ने वाले रमेश निषाद और राहुल गौड़ ने कहा कि कोरोना की वजह से कोचिंग भी बंद है। ऐसे में तैयारी सुव्यवस्थित तरीके से नहीं हो पा रही है। जब सीबीएसई और सीआईएससीई छात्र हित में फैसला ले सकते हैं। जहां विद्यार्थियों की संख्या अधिक है, वहां भी ये फैसला लिया जाना चाहिए। छात्रा चंचल ने कहा कि परीक्षा के लिए आने जाने के दौरान अगर छात्र संक्रमित हुआ तो उसका जिम्मेदार कौन होगा।

सीबीएसई ने हाल ही में परिणाम जारी किए जाने को लेकर जो गाइडलाइंस जारी की है। उनके मुताबिक पिछले तीन साल के परिणाम में से सबसे उत्कृष्ट परिणाम को आधार बनाने की स्कूल प्रबंधकों को छूट दी है। यूपी बोर्ड भी इसे परिणाम जारी करने का आधार बना सकता है।

प्रभारी डीआईओएस आरएन भारती ने बताया कि बोर्ड परीक्षाओं के आयोजन पर 20 मई को शासन स्तर पर फैसला लिया जाना है। जैसा निर्देश होगा उसी अनुरूप परीक्षाएं कराई जाएंगी। बच्चों की सुरक्षा का ख्याल सभी के जेहन में है। अभिभावक और बच्चे परेशान न हों।
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