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Gorakhpur News: वनकर्मी पर पिकअप चढ़ाने वाले दो तस्कर मुठभेड़ में गिरफ्तार
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वनकर्मी पर पिकअप चढ़ाने वाले दो तस्कर मुठभेड़ में गिरफ्तार
वाहन जांच के दौरान हुई मुठभेड़ में पुलिस की फायरिंग से एक आरोपी घायल, पुलिस के चंगुल से बचने के लिए आरोपियों ने दो बार की फायरिंग
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। वनकर्मी पर पिकअप चढ़ाकर जानलेवा हमला करने वाले दो आरोपियों को पुलिस और वन विभाग की टीम ने शुक्रवार को वाहन जांच के दौरान हुई मुठभेड़ में गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने पुलिस की चंगुल से बच कर भागने के प्रयास में पुलिस पर दो बार फायरिंग भी की। टीम की सतर्कता से आरोपी अपने मंसूबे में असफल रहे। टीम ने दोनों आरोपियों को काफी दूर दौड़ाने के बाद गिरफ्तार कर लिया। मुठभेड़ में एक आरोपी पुलिस की गोली से घायल हो गया है।
मामले का खुलासा करते हुए क्षेत्राधिकारी फरेंदा अनुज कुमार सिंह ने बताया कि बीते 27 सितंबर को लकड़ी तस्करों ने फरेंदा वन रेंज क्षेत्र में वनकर्मी पर पिकअप वाहन चढ़ाकर जानलेवा हमला किया था। जिस मामले में थाना फरेंदा पर पुलिस ने आरोपी लकड़ी तस्करों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर उनकी तलाश में जुटी थी। इसी बीच शुक्रवार सुबह करीब 3:15 बजे थाना बृजमनगंज के प्रभारी निरीक्षक अजीत प्रताप सिंह की सूचना पर थाना प्रभारी निरीक्षक फरेंदा व वन विभाग की टीम समय माता मंदिर विशुनपुर अदरौना के पास पहुंची।
उसके बाद मुखबिर की सूचना पर आने वाले बाइक सवारों की जांच करने में जुट गई। कुछ ही देर बाद एक बाइक पर दो संदिग्ध व्यक्ति आते दिखाई दिए। जिन्हें टाॅर्च की रोशनी से इशारा कर रोकने का प्रयास किया गया। तो बाइक सवारों ने टीम पर फायरिंग कर बृजमनगंज की तरफ भागने लगे। उसके बाद टीम ने बाइक सवारों को दौड़ाते हुए आत्मसमर्पण करने के लिए कई बार चेतावनी दी, लेकिन बाइक सवार लेहड़ा माता मंदिर गेट से लगभग एक किलोमीटर आगे भागने के बाद बाइक छोड़ कर जंगल में घुस कर पैदल भागने लगे।
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जंगल में भागने के दौरान भी बाइक सवारों ने टीम पर फायरिंग की। फरेंदा थाना प्रभारी निरीक्षक अजीत प्रताप सिंह ने अपने सरकारी पिस्टल से फायर की, जिस दौरान एक व्यक्ति पैर में गोली लगने से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा। जिसे टीम ने गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से एक तमंचा 315 बोर बरामद हुआ। खोलकर देखा गया तो उसके नाल में एक कारतूस भी बरामद हुआ। वहीं जेब से भी एक खोखा कारतूस बरामद हुआ। गिरफ्तार व्यक्ति ने अपना नाम राजू निवासी सौनोरा बुजुर्ग थाना कैम्पियरगंज जनपद गोरखपुर बताया है।
जबकि कुछ दूर से गिरफ्तार हुए दूसरे आरोपी ने अपना नाम श्रीलाल निवासी जमुहरा थाना मेहदावल जनपद संतकबीरनगर बताया है। गिरफ्तार दोनों व्यक्तियों ने बताया कि 27 सितंबर सुबह 4:30 बजे फरेंदा वन रेंज क्षेत्र में साखू की लकड़ी चोरी से कटवाकर पिकअप की मदद से ले जाने की फिराक में थे। इसी बीच वनकर्मी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। जिसमें वह सफल भी हो गए। जिसके बाद वह लोग वाहन छोड़कर भाग निकले थे। पुलिस ने दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया।
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आरोपियों की गिरफ्तारी में लगी थी तीन टीम
वनकर्मी पर पिकअप वाहन चढ़ा कर जानलेवा हमला करने के बाद लकड़ी तस्करी वाहन छोड़ मौके से भाग निकले थे। पुलिस मामले में फरार लकड़ी तस्करों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर ली थी। उनकी गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें गठित की गईं थी। यही कारण है कि पुलिस फरार दोनों आरोपियों को घटना के दो दिन बाद ही गिरफ्तार हो गए।
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नेपाल भागने के फिराक में थे आरोपी
पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस के पूछताछ में बताया कि घटना के बाद वह लोग वाहन छोड़ भाग निकले थे, लेकिन उनके खिलाफ केस दर्ज होने की जानकारी मिली तो वह लोग बाइक से नेपाल भागने के फिराक में निकले थे। वाहन जांच के दौरान पुलिस ने दौड़ाकर उन्हें पकड़ लिया।
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आरोपियों पर दर्ज हैं सात केस
गिरफ्तार आरोपियों पर पुलिस के मुताबिक गोरखपुर जिले के कैंपियरगंज थाने में लूट, तस्करी, मारपीट, जानलेवा हमला सहित अन्य धाराओं में पांच केस दर्ज हैं। जबकि वन विभाग में वन्य जीव अधिनियम के तहत दो केस दर्ज हैं।
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एक सप्ताह पहले गिरफ्तार हुआ था लकड़ी माफिया
निचलौल रेंज के वन कर्मियों की टीम ने एक सप्ताह पहले शनिवार को बलहीखोर गांव के रहने वाले अनिल राय लकड़ी माफिया को गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ कई केस दर्ज है। निचलौल वन क्षेत्राधिकारी सुनील राव ने बताया कि डोमा बीट के जंगलों में कोठीभार थाना क्षेत्र के बलहीखोर गांव के रहने वाला अनिल राय लकड़ी माफिया सागौन का पेड़ काट रहा था। सूचना के बाद टीम के साथ डोमा बीट के जंगलों में पहुंची। चारों ओर से घिरता देख जंगल में पेड़ काट रहा लकड़ी माफिया अनिल भागने लगा। जिसे घेराबंदी कर गिरफ्तार किया गया था। पिछले करीब ढाई वर्ष जंगल से लकड़ी की कटान कर तस्करी करने और वन्य जीवों की शिकार के मामले में 11 केस दर्ज किए जा चुके हैं।
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लकड़ी माफिया अनिल पर दर्ज केस का विवरण:-
-- 14 जुलाई 2020 को डोमा बीट में एक पेड़ साखू को काटकर साइकिल से ले जाते समय बरामद।
-- 16 अक्तूबर 2020 को भी डोमा बीट में एक पेड़ साखू को काटकर ले जाते समय गिरफ्तार।
-- 11 दिसंबर 2020 को डोमा बीट के जंगल में 3.5 मीटर ऊंचाई की सागौन का पेड़ काटकर छिपाया गया था।
-- 13 जनवरी 2021 को डोमा बीट के जंगल से एक पेड़ साखू को काटकर ले जाने का प्रयास किया गया था।
-- 7 अप्रैल 2021 को डोमा बीट की जंगल से साखू का पेड़ काटकर बलहिखोर खलिहान पर छिपाया गया था।
-- 16 मई 2021 को डोमा बीट के जंगल में साखू का पेड़ काटकर छिपाते समय बरामदगी की गई थी।
-- 21 मार्च 2022 को डोमा बीट के जंगल में साखू लड़की कटान कर बलहिखोर गांव के पश्चिम टोले में सड़क किनारे छिपाते समय बरामदगी।
-- 20 जनवरी 2023 को डोमा बीट के जंगल में सागौन और साखू की लकड़ी काटकर झाड़ियों में छिपाते बरामद की गई।
-- 17 मार्च 2023 को डोमा बीट के जंगल में अवैध रूप से प्रवेश कर जाल बिछाकर वन्य जीवों का शिकार करने का प्रयास किया गया।
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ड्रोन से निगरानी के दावे फेल, जंगल से कट जाती है लकड़ी
महराजगंज। फरेंदा रेंज के जंगलों में रात में वनों की कटान धड़ल्ले से हाेती है। जबकि जंगल के चारों तरफ जेसीबी से गड्ढे की खुदाई की गई हैं। ड्रोन कैमरे से वनों की निगरानी का दावा है। उसके बावजूद भी तस्कर लकड़ी काटने से नहीं चूकते हैं। लग्जरी वाहनों से लकड़ी काट कर ले जाने का मामला सामने आता है।
जंगल के मुख्य मार्ग पर वन विभाग द्वारा बैरिकेडिंग की गई है। फिर भी वनों की कटान पर अंकुश नहीं लग पा रहे हैं। लोगाें में चर्चा है कि वनों की कटान में वनकर्मी के सह पर की जाती हैं। फरेंदा रेंज से बेशकीमती लकड़ी काटने का मामला हमेशा सामने आता है। तस्कर जंगल के मुख्य मार्ग से ही लकड़ी ले जाते हैं। वह लग्जरी वाहनों से पड़ोसी जिला सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, गोरखपुर, कुशीनगर आदि जगहों पर आसानी से पहुंचा देते हैं।
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आहट मिलते ही मौके से फरार हो जाते
तस्करों का कटान को लेकर मजबूत नेटवर्क होता हैं जिसके सहारे जंगल की कीमती लकड़ी को आसानी से काट कर उठा ले जाते हैं। जंगल में घुसने से लेकर कटान तक उनके आदमी खड़े रहते हैं। किसी भी प्रकार की आहट मिलते ही मौके से फरार हो जाते हैं। कीमती लकड़ी काटने के दौरान तस्करों की संख्या छह से लेकर दस-बारह तक होती है। चार पहिया गाड़ी पर लाद कर लकड़ी ले जाते समय बाइक से आगे चलते हैं और रूट की निगरानी करते रहते हैं। पक्की सड़क मिलते ही तेजी से फरार हो जाते हैं।
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अवैध कटान पर किसी की जवाबदेही नहीं तय की जाती
- वनों की रखवाली के लिए बीट निर्धारित है। वन कर्मी अपने अपने बीट की रखवाली करते हैं। अवैध कटान पर किसी की जवाबदेही तय नहीं की जाती है। लकड़ी बरामदगी के बाद अज्ञात के खिलाफ फाॅरेस्ट एक्ट में चालान कर खानापूर्ति की जाती है।
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तस्करी के लिए पुराने वाहनों का होता है इस्तेमाल
- वन माफिया लकड़ी के तस्करी के लिए पुरानी व सेकेंड हैंड वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। जिसमें छोटी कार, वैन, पिकअप व बाइक का प्रयोग करते रहते हैं, लेकिन कुछ दिनों से तस्करी का ट्रेंड भी बदल गया है। अब लकड़ी का चिरान करके उसे लग्जरी वाहन में रखकर भेजा जाता है। इस पर किसी भी व्यक्ति को शक नहीं होता है।
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वनों की कटान रोकने के लिए वनकर्मी गश्त करते रहते हैं जिनके लिए बीट निर्धारित हैं। जंगल के चारों तरफ सुरक्षा खाई खोदी गई है। अब उसमें कांटेदार पौधे लगाए जाएंगें, जिससे जानवरों के साथ कटान पर भी अंकुश लगेगा। वनकर्मियों को सुरक्षा के लिए रायफल मिला है।
-- हरिकेश यादव, एसडीओ वन रेंज फरेंदा
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। वनकर्मी पर पिकअप चढ़ाकर जानलेवा हमला करने वाले दो आरोपियों को पुलिस और वन विभाग की टीम ने शुक्रवार को वाहन जांच के दौरान हुई मुठभेड़ में गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने पुलिस की चंगुल से बच कर भागने के प्रयास में पुलिस पर दो बार फायरिंग भी की। टीम की सतर्कता से आरोपी अपने मंसूबे में असफल रहे। टीम ने दोनों आरोपियों को काफी दूर दौड़ाने के बाद गिरफ्तार कर लिया। मुठभेड़ में एक आरोपी पुलिस की गोली से घायल हो गया है।
मामले का खुलासा करते हुए क्षेत्राधिकारी फरेंदा अनुज कुमार सिंह ने बताया कि बीते 27 सितंबर को लकड़ी तस्करों ने फरेंदा वन रेंज क्षेत्र में वनकर्मी पर पिकअप वाहन चढ़ाकर जानलेवा हमला किया था। जिस मामले में थाना फरेंदा पर पुलिस ने आरोपी लकड़ी तस्करों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर उनकी तलाश में जुटी थी। इसी बीच शुक्रवार सुबह करीब 3:15 बजे थाना बृजमनगंज के प्रभारी निरीक्षक अजीत प्रताप सिंह की सूचना पर थाना प्रभारी निरीक्षक फरेंदा व वन विभाग की टीम समय माता मंदिर विशुनपुर अदरौना के पास पहुंची।
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जंगल में भागने के दौरान भी बाइक सवारों ने टीम पर फायरिंग की। फरेंदा थाना प्रभारी निरीक्षक अजीत प्रताप सिंह ने अपने सरकारी पिस्टल से फायर की, जिस दौरान एक व्यक्ति पैर में गोली लगने से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा। जिसे टीम ने गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से एक तमंचा 315 बोर बरामद हुआ। खोलकर देखा गया तो उसके नाल में एक कारतूस भी बरामद हुआ। वहीं जेब से भी एक खोखा कारतूस बरामद हुआ। गिरफ्तार व्यक्ति ने अपना नाम राजू निवासी सौनोरा बुजुर्ग थाना कैम्पियरगंज जनपद गोरखपुर बताया है।
जबकि कुछ दूर से गिरफ्तार हुए दूसरे आरोपी ने अपना नाम श्रीलाल निवासी जमुहरा थाना मेहदावल जनपद संतकबीरनगर बताया है। गिरफ्तार दोनों व्यक्तियों ने बताया कि 27 सितंबर सुबह 4:30 बजे फरेंदा वन रेंज क्षेत्र में साखू की लकड़ी चोरी से कटवाकर पिकअप की मदद से ले जाने की फिराक में थे। इसी बीच वनकर्मी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। जिसमें वह सफल भी हो गए। जिसके बाद वह लोग वाहन छोड़कर भाग निकले थे। पुलिस ने दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया।
आरोपियों की गिरफ्तारी में लगी थी तीन टीम
वनकर्मी पर पिकअप वाहन चढ़ा कर जानलेवा हमला करने के बाद लकड़ी तस्करी वाहन छोड़ मौके से भाग निकले थे। पुलिस मामले में फरार लकड़ी तस्करों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर ली थी। उनकी गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें गठित की गईं थी। यही कारण है कि पुलिस फरार दोनों आरोपियों को घटना के दो दिन बाद ही गिरफ्तार हो गए।
नेपाल भागने के फिराक में थे आरोपी
पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस के पूछताछ में बताया कि घटना के बाद वह लोग वाहन छोड़ भाग निकले थे, लेकिन उनके खिलाफ केस दर्ज होने की जानकारी मिली तो वह लोग बाइक से नेपाल भागने के फिराक में निकले थे। वाहन जांच के दौरान पुलिस ने दौड़ाकर उन्हें पकड़ लिया।
आरोपियों पर दर्ज हैं सात केस
गिरफ्तार आरोपियों पर पुलिस के मुताबिक गोरखपुर जिले के कैंपियरगंज थाने में लूट, तस्करी, मारपीट, जानलेवा हमला सहित अन्य धाराओं में पांच केस दर्ज हैं। जबकि वन विभाग में वन्य जीव अधिनियम के तहत दो केस दर्ज हैं।
एक सप्ताह पहले गिरफ्तार हुआ था लकड़ी माफिया
निचलौल रेंज के वन कर्मियों की टीम ने एक सप्ताह पहले शनिवार को बलहीखोर गांव के रहने वाले अनिल राय लकड़ी माफिया को गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ कई केस दर्ज है। निचलौल वन क्षेत्राधिकारी सुनील राव ने बताया कि डोमा बीट के जंगलों में कोठीभार थाना क्षेत्र के बलहीखोर गांव के रहने वाला अनिल राय लकड़ी माफिया सागौन का पेड़ काट रहा था। सूचना के बाद टीम के साथ डोमा बीट के जंगलों में पहुंची। चारों ओर से घिरता देख जंगल में पेड़ काट रहा लकड़ी माफिया अनिल भागने लगा। जिसे घेराबंदी कर गिरफ्तार किया गया था। पिछले करीब ढाई वर्ष जंगल से लकड़ी की कटान कर तस्करी करने और वन्य जीवों की शिकार के मामले में 11 केस दर्ज किए जा चुके हैं।
लकड़ी माफिया अनिल पर दर्ज केस का विवरण:-
ड्रोन से निगरानी के दावे फेल, जंगल से कट जाती है लकड़ी
महराजगंज। फरेंदा रेंज के जंगलों में रात में वनों की कटान धड़ल्ले से हाेती है। जबकि जंगल के चारों तरफ जेसीबी से गड्ढे की खुदाई की गई हैं। ड्रोन कैमरे से वनों की निगरानी का दावा है। उसके बावजूद भी तस्कर लकड़ी काटने से नहीं चूकते हैं। लग्जरी वाहनों से लकड़ी काट कर ले जाने का मामला सामने आता है।
जंगल के मुख्य मार्ग पर वन विभाग द्वारा बैरिकेडिंग की गई है। फिर भी वनों की कटान पर अंकुश नहीं लग पा रहे हैं। लोगाें में चर्चा है कि वनों की कटान में वनकर्मी के सह पर की जाती हैं। फरेंदा रेंज से बेशकीमती लकड़ी काटने का मामला हमेशा सामने आता है। तस्कर जंगल के मुख्य मार्ग से ही लकड़ी ले जाते हैं। वह लग्जरी वाहनों से पड़ोसी जिला सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, गोरखपुर, कुशीनगर आदि जगहों पर आसानी से पहुंचा देते हैं।
आहट मिलते ही मौके से फरार हो जाते
तस्करों का कटान को लेकर मजबूत नेटवर्क होता हैं जिसके सहारे जंगल की कीमती लकड़ी को आसानी से काट कर उठा ले जाते हैं। जंगल में घुसने से लेकर कटान तक उनके आदमी खड़े रहते हैं। किसी भी प्रकार की आहट मिलते ही मौके से फरार हो जाते हैं। कीमती लकड़ी काटने के दौरान तस्करों की संख्या छह से लेकर दस-बारह तक होती है। चार पहिया गाड़ी पर लाद कर लकड़ी ले जाते समय बाइक से आगे चलते हैं और रूट की निगरानी करते रहते हैं। पक्की सड़क मिलते ही तेजी से फरार हो जाते हैं।
अवैध कटान पर किसी की जवाबदेही नहीं तय की जाती
- वनों की रखवाली के लिए बीट निर्धारित है। वन कर्मी अपने अपने बीट की रखवाली करते हैं। अवैध कटान पर किसी की जवाबदेही तय नहीं की जाती है। लकड़ी बरामदगी के बाद अज्ञात के खिलाफ फाॅरेस्ट एक्ट में चालान कर खानापूर्ति की जाती है।
तस्करी के लिए पुराने वाहनों का होता है इस्तेमाल
- वन माफिया लकड़ी के तस्करी के लिए पुरानी व सेकेंड हैंड वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। जिसमें छोटी कार, वैन, पिकअप व बाइक का प्रयोग करते रहते हैं, लेकिन कुछ दिनों से तस्करी का ट्रेंड भी बदल गया है। अब लकड़ी का चिरान करके उसे लग्जरी वाहन में रखकर भेजा जाता है। इस पर किसी भी व्यक्ति को शक नहीं होता है।
वनों की कटान रोकने के लिए वनकर्मी गश्त करते रहते हैं जिनके लिए बीट निर्धारित हैं। जंगल के चारों तरफ सुरक्षा खाई खोदी गई है। अब उसमें कांटेदार पौधे लगाए जाएंगें, जिससे जानवरों के साथ कटान पर भी अंकुश लगेगा। वनकर्मियों को सुरक्षा के लिए रायफल मिला है।