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Gorakhpur News: अतीत हो या वर्तमान, भारत में रहा स्त्री का सदैव विशिष्ट स्थान

Sat, 14 Mar 2026 03:03 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 14 Mar 2026 03:03 AM IST
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Two-day national seminar inaugurated at the Department of Philosophy, DDU
- डीडीयू के दर्शनशास्त्र विभाग में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग में भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि अतीत हो या वर्तमान भारत में स्त्री का सदैव विशिष्ट स्थान रहा है। परिवेश और परिस्थितियों का फर्क प्रत्येक समय में देखा गया है। बेहतर की गुंजाइश अभी भी बनी हुई है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व प्रति कुलपति एवं दर्शनशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सभाजीत मिश्र ने कहा कि सनातन संस्कृति में स्त्रियों की समस्या दार्शनिक स्तर पर न होकर राजनीतिक व सामाजिक विषय से जुड़ी हुई है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय, अमरकंटक के पूर्व कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा कि संपूर्ण विश्व में भारत एक मात्र ऐसा देश है जहां अर्द्धनारीश्वर की संकल्पना मिलती है। यह दुनिया जिस पर अवस्थित अर्थात धरती और जिससे उपस्थित है उसके पीछे मातृ शक्ति ही है। वेद की ऋचाओं में जितना योगदान ऋषियों का है उतना ही स्त्रियों का भी।
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लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. राकेश चंद्रा ने कहा कि सनातन परंपरा वास्तव में खुले मस्तिष्क का प्रस्ताव करने वाली संस्कृति है जहां वाद-विवाद और संवाद-शास्त्रार्थ की परंपरा रही है। खंडन मंडन को सहज स्वीकृति प्राप्त रही है। हमें अपने इन मूल्यों को पुनः अर्जित करने की आवश्यकता है जिससे हम और अधिक मानववादी, समतावादी तथा नारीवादी समाज का निर्माण कर सकें।
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दूसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करते हुए डीएसडब्ल्यू प्रो. अनुभूति दुबे ने कहा कि बहुत कुछ परिवर्तित हो चुका है लेकिन परिवर्तन की अभी भी जरूरत है। इस बदलाव की जरूरत स्त्री और पुरुष दोनों को है। महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. दिव्या रानी सिंह और लखनऊ विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रशांत शुक्ल ने भी संबोधित किया। उद्घाटन सत्र का स्वागत वक्तव्य अधिष्ठाता, कला संकाय एवं अध्यक्ष दर्शनशास्त्र विभाग प्रोफेसर कीर्ति पांडेय ने दिया। सत्र का संचालन डॉक्टर संजय कुमार तिवारी एवं आभार ज्ञापन डॉ संजय कुमार राम ने किया। प्रस्तावना डॉ. दीपक कुमार गुप्ता ने रखी।
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