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Gorakhpur News: दुनिया की तरक्की के लिए अकादमिक-उद्योग सहयोग जरूरी
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एमएमएमयूटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि प्रो. एसएन सिंह का अभिनंदन करते प
गोरखपुर। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, प्रयागराज के निदेशक प्रो. मुकुल एस. सुताओने ने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में उभरती प्रौद्योगिकियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। दुनिया की तरक्की के लिए अकादमिक-उद्योग सहयोग जरूरी है।
प्रो. मुकुल मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में ''''ग्रीन टेक्नोलॉजी एंड सस्टेनेबल सॉल्यूशंस'''' विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान, ग्वालियर के निदेशक प्रो. एसएन सिंह ने कहा कि उन्नत डिजिटल तकनीकों एवं ऑटोमेशन के माध्यम से ऊर्जा वितरण प्रणाली को अधिक कुशल, विश्वसनीय एवं पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है।
सम्मेलन में ऑनलाइन जुड़े कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि हरित प्रौद्योगिकी मात्र एक शोध विषय नहीं बल्कि मानवता के भविष्य की अनिवार्य आवश्यकता है। उन्होंने एआई और डेटा आधारित विश्लेषण को सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण बताते हुए इनके एकीकरण पर बल दिया। आईआईआईटी, प्रयागराज के प्रो. सतीश कुमार सिंह ने कहा कि हरित प्रौद्योगिकी आज वैश्विक आवश्यकता बन चुकी है।
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सम्मेलन के जनरल चेयर प्रो. राकेश कुमार ने स्वागत किया। प्रो. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि इसमें कुल 154 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। अलग-अलग सत्रों में प्रो. दिमित्रियोस ए. कर्रास (एथेंस, ग्रीस), आईआईटी, नई दिल्ली के प्रो. मानव आर. भटनागर, प्रो. घनश्याम सिंह (यूनिवर्सिटी ऑफ जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका) ने विचार रखे। सम्मेलन के संयोजक डॉ. सत्य प्रकाश यादव ने आभार ज्ञापित किया। आयोजन में डॉ. राजन मिश्र व डॉ. बिंदेश्वर सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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प्रो. मुकुल मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में ''''ग्रीन टेक्नोलॉजी एंड सस्टेनेबल सॉल्यूशंस'''' विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान, ग्वालियर के निदेशक प्रो. एसएन सिंह ने कहा कि उन्नत डिजिटल तकनीकों एवं ऑटोमेशन के माध्यम से ऊर्जा वितरण प्रणाली को अधिक कुशल, विश्वसनीय एवं पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है।
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सम्मेलन में ऑनलाइन जुड़े कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि हरित प्रौद्योगिकी मात्र एक शोध विषय नहीं बल्कि मानवता के भविष्य की अनिवार्य आवश्यकता है। उन्होंने एआई और डेटा आधारित विश्लेषण को सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण बताते हुए इनके एकीकरण पर बल दिया। आईआईआईटी, प्रयागराज के प्रो. सतीश कुमार सिंह ने कहा कि हरित प्रौद्योगिकी आज वैश्विक आवश्यकता बन चुकी है।
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सम्मेलन के जनरल चेयर प्रो. राकेश कुमार ने स्वागत किया। प्रो. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि इसमें कुल 154 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। अलग-अलग सत्रों में प्रो. दिमित्रियोस ए. कर्रास (एथेंस, ग्रीस), आईआईटी, नई दिल्ली के प्रो. मानव आर. भटनागर, प्रो. घनश्याम सिंह (यूनिवर्सिटी ऑफ जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका) ने विचार रखे। सम्मेलन के संयोजक डॉ. सत्य प्रकाश यादव ने आभार ज्ञापित किया। आयोजन में डॉ. राजन मिश्र व डॉ. बिंदेश्वर सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा।