फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Two arrested including railway employee for forgery in name of job in railway

UP News: रेलवे में नौकरी के नाम पर जालसाजी में रेल कर्मचारी समेत दो गिरफ्तार, फर्जी नियुक्ति पत्र देकर करते थे जालसाजी

Fri, 24 Jun 2022 04:38 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 24 Jun 2022 04:38 PM IST
सार

 फर्जी नियुक्ति पत्र देकर करते थे जालसाजी, पकड़ा गया दूसरा आरोपी रिटायर्ड रेल कर्मचारी, कैंट पुलिस ने फर्जी नियुक्तिपत्र और कई दस्तावेज बरामद किए।

विज्ञापन
Two arrested including railway employee for forgery in name of job in railway
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : amar ujala

विस्तार

रेलवे में नौकरी के नाम पर फर्जी नियुक्तिपत्र देकर जालसाजी करने के मामले में बृहस्पतिवार को पुलिस ने एक रेल कर्मचारी और एक रिटायर्ड रेल कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को पुलिस ने रेलवे के कार्मिक कार्यालय से गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से पुलिस ने फर्जी कूटरचित नियुक्तिपत्र, अनुमोदपत्र मेडिकल हेतु प्रोफार्मा बरामद कर लिया है।

विज्ञापन


आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने कूट रचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी की धारा में केस दर्ज कर जेल भिजवा दिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान बलिया जिले के उभाव थाना क्षेत्र के हल्दीरामपुर निवासी और रेलवे लिपिक अनिल कुमार सिंह व चिलुआताल इलाके के बलुआ निवासी रिटायर्ड रेलकर्मी जितेंद्र कुमार त्रिपाठी के रूप में हुई है।
विज्ञापन


जानकारी के मुताबिक, हरदोई जिले के तडियावां थाना क्षेत्र के अलीशाबाद निवासी रियासत अली, उनके दो मित्र सीतापुर के खैराबाद निवासी दिनेश कुमार यादव और सीतापुर के पिसावां फर्दापुर निवासी अनुज कुमार निवासी के साथ जितेंद्र और अनिल ने नौकरी के नाम पर जालसाजी की है। पीड़ितों ने बताया कि ट्रेन में एसी कोच में वह अटेंडेंट का काम करते थे। 2019 के नवंबर महीने में रियासत अली और अनुज कुमार गोरखपुर रेलवे स्टेशन से गोमती एक्सप्रेस लेकर लखीमपुर जा रहे थे इसी दौरान एसी कोच में जितेन्द्र कुमार त्रिपाठी से उनकी मुलाकात हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन



 

जितेंद्र ने बताया कि वह रेलवे में नौकरी करता। बातचीत में जितेन्द्र ने उन दोनों से पूछा कि तुम लोग इस नौकरी मे कितना कमा लेते हो। दोनों ने बताया कि उन्हें हाथ में 7-8 हजार रुपये मिल जाते हैं। जितेंद्र ने कहा कि रेलवे में उसके परिचित साहब हैं जो तुम्हारी नौकरी संविदा पर लगवा देंगे बाद में परमानेंट नौकरी होने पर दो से ढाई लाख रुपये देने होंगे। झांसे में आए रियासत और अनुज को जितेंद्र ने अपना मोबाइल नंबर दिया और यहीं से जालसाजी की शुरुआत हो गई।

जनवरी 2021 में उनका एक मित्र दिनेश यादव भी जाल में फंस गया और तीनों की बातचीत जितेंद्र कुमार त्रिपाठी से रेलवे में संविदा पर भर्ती के संबंध में होने लगी। आरोप है कि जितेंद्र कुमार उनसे कभी एक हजार, कभी दो हजार, कभी तीन हजार रुपये वसूलता रहता था।

अक्तूबर में दे दिया था नियुक्तिपत्र

अक्तूबर 2021 में जितेन्द्र ने तीनों को एक नियुक्तिपत्र भी दे दिया था। नौ नवंबर 2021 को लेटर में लिखे रेलवे स्टेशन पर कुल आठ लोगों की नियुक्ति हुई थी, जिसमें रियासत अली ,अनुज तथा दिनेश का भी नाम था। बाद में जितेंद्र ने फोन करके बताया कि वह लेटर निरस्त हो गया है। नवंबर 2021 में उसने एक दूसरा लेटर दिया जिसमें तीनों की पोस्टिंग सीतापुर रेलवे स्टेशन पर होनी बताया गया था। दूसरा लेटर मिलने के बाद भी जब उनकी नौकरी नहीं लगी तो उन्होंने फिर जितेंद्र संपर्क किया तो उसने कहा कि जैसे ही तुम लोगों की पोस्टिंग होगी मैं फोन करके बताऊंगा।

 

रेलवे स्टेशन पर बुलाए गए थे पीड़ित

दस जून 2022 को जितेंद्र ने फोन करके बताया कि तुम लोगों का लेटर मिल गया है। 20 जून 2022 को रिपोर्ट करना है। उसने 16 जून को रियासत अली और अनुज गोरखपुर रेलवे स्टेशन बुलाया। रियासत अली और अनुज  रेलवे स्टेशन के सामने मालकिन होटल के पास मिले जहां जितेंद्र के साथ एक और व्यक्ति था।

जितेंद्र ने उस व्यक्ति का परिचय कराते हुए बताया कि यही रेलवे के साहब हैं उसका नाम अनिल सिंह बताया। उस व्यक्ति ने एक लेटर दिया जिस पर रियासत अली और अनुज का नाम था। दोनों को 20 जून को यान्त्रिक कारखाना गोरखपुर में उपस्थित होना था। दोनों लेटर लेकर घर चले गए इस दौरान जितेंद्र ने दिनेश यादव को भी फोन करके बताया कि तुम भी 20 जून को गोरखपुर आ जाना एक ही दिन तीनों का मेडिकल करा दिया जाएगा।

20 जून को रियासत अली, अनुज तथा दिनेश गोरखपुर पहुंचे। जितेंद्र रेलवे स्टेशन पर मिला और बताया कि आज भारत बंद है इसलिए 21 जून मेडिकल होगा। उसी दौरान उसने अनिल कुमार सिंह का नंबर भी दिया और बताया कि यदि मेरा मोबाइल न मिले तो इस नंबर पर साहब से बात कर लेना। 21 जून को दिनेश ने जितेंद्र को फोन मिलाया तो उसका नंबर बंद मिला। इसके बाद उसने अनिल के नंबर पर फोन किया।

अनिल ने बताया कि त्रिपाठी जी ही तुम्हारा मेडिकल रेलवे अस्पताल में कराएंगे उसके बाद तुम्हें लेटर मिल जाएगा। उसी दिन 10 बजे जितेंद्र त्रिपाठी का फोन उठा और उसने मालकिन होटल पर बुलाया। तीनों मालकिन होटल पहुंचे वहां जितेंद्र त्रिपाठी ने उन्हें संविदा पर नियुक्ति के लिए मेडिकल कराने के बदले 16 सौ रुपये जमा कराने को कहा। लेटर देकर जितेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि तुम लोग सीपीओ ऑफिस पहुंचो, मैं वहीं मिलता हूं।

तीनों बताएं जगह पर पहुंचे तो जितेंद्र त्रिपाठी उन्हें बिल्डिंग के अंदर ऑफिस में ले गया। बताया कि यहीं पर 16-16 सौ रुपये जमा होंगे इसके बाद रसीद मिलेगी और मेडिकल के लिए भेज देंगे। तीनों ने ऑफिस के सामने एक पेड़ के नीचे बैठे थे, उसी दौरान एक व्यक्ति से उन्होंने अपना नियुक्तिपत्र दिखाया तो उस व्यक्ति ने पत्र देखते ही इसे फर्जी बता दिया।

उसने कहा कि रेलवे में इस तरह का कोई भी नियुक्तिपत्र जारी नहीं होता है। उसके बाद बाद पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत की और पुलिस ने जितेंद्र तथा अनिल को बृहस्पतिवार की रात आठ बजे गिरफ्तार कर लिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed