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UP: बाढ़ और सुनामी की आहट बताएगा 'त्रिशूल', आईटीएम गीडा के 4 स्टूडेंट्स ने तैयार किया वायरलेस तकनीक पर डिवाइस
Sun, 23 Jul 2023 10:50 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 23 Jul 2023 10:50 AM IST
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आईटीएम गीडा के विद्यार्थियों ने तैयार की डिवाइस
- फोटो : अमर उजाला
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इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, गीडा के चार विद्यार्थियों ने मिलकर एक ऐसा डिवाइस तैयार किया है, जो बाढ़ एवं सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदा आने की सटीक सूचना पहले ही दे देगा। इसकी मदद से लोगों को समय से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सकता है।
इसका नाम त्रिशूल रखा गया है। यह डिवाइस वायरलेस तकनीक पर आधारित है। एमएमएमयूटी के बीबीए की जान्हवी श्रीवास्तव, दर्शन सराफ तथा बीसीए की खुशी त्रिपाठी व अक्षिता मिश्रा ने इस डिवाइस को महज सात दिनों में तैयार किया है।
इसे बनाने में करीब चार हजार रुपये खर्च आए हैं। विद्यार्थियों का दावा है कि इस तकनीक की मदद से नदियों के बढ़ते जलस्तर की सूचना समय से पहले स्थानीय प्रशासन को मिल सकता है। आपदा राहत में यह बहुत ही उपयोगी साबित होगा। उन्होंने बताया कि इस डिवाइस को तैयार करने मे हाई फ्रीक्वेंशी ट्रांसमीटर, रिसिवर, 9 वोल्ट की बैटरी, रिले रिसीवर, एलईडी बल्ब, अलार्म एंडीकेटर इत्यादि उपकरणों का प्रयोग किया गया है।
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संस्थान के निदेशक डॉ. एनके सिंह ने बताया कि इस नवाचार को कॉलेज के प्रयोगशाला में विद्यार्थियों ने तैयार कर सफल परीक्षण किया है। आधुनिक तकनीक पर आधारित यह डिवाइस आम लोगों की मददगार साबित होगी।
इस उपलब्धि पर संस्थान के अध्यक्ष नीरज मातनहेलिया, सचिव श्याम बिहारी अग्रवाल, कोषाध्यक्ष निकुंज मातनहेलिया, संयुक्त सचिव अनुज अग्रवाल आदि ने प्रसन्नता व्यक्त की है।
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इसका नाम त्रिशूल रखा गया है। यह डिवाइस वायरलेस तकनीक पर आधारित है। एमएमएमयूटी के बीबीए की जान्हवी श्रीवास्तव, दर्शन सराफ तथा बीसीए की खुशी त्रिपाठी व अक्षिता मिश्रा ने इस डिवाइस को महज सात दिनों में तैयार किया है।
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इसे बनाने में करीब चार हजार रुपये खर्च आए हैं। विद्यार्थियों का दावा है कि इस तकनीक की मदद से नदियों के बढ़ते जलस्तर की सूचना समय से पहले स्थानीय प्रशासन को मिल सकता है। आपदा राहत में यह बहुत ही उपयोगी साबित होगा। उन्होंने बताया कि इस डिवाइस को तैयार करने मे हाई फ्रीक्वेंशी ट्रांसमीटर, रिसिवर, 9 वोल्ट की बैटरी, रिले रिसीवर, एलईडी बल्ब, अलार्म एंडीकेटर इत्यादि उपकरणों का प्रयोग किया गया है।
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संस्थान के निदेशक डॉ. एनके सिंह ने बताया कि इस नवाचार को कॉलेज के प्रयोगशाला में विद्यार्थियों ने तैयार कर सफल परीक्षण किया है। आधुनिक तकनीक पर आधारित यह डिवाइस आम लोगों की मददगार साबित होगी।
इस उपलब्धि पर संस्थान के अध्यक्ष नीरज मातनहेलिया, सचिव श्याम बिहारी अग्रवाल, कोषाध्यक्ष निकुंज मातनहेलिया, संयुक्त सचिव अनुज अग्रवाल आदि ने प्रसन्नता व्यक्त की है।