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गोरखपुर: शौक पूरा करने के लिए एटीएम कार्ड बदलकर करते हैं जालसाजी, तीन बदमाशों की तलाश में पुलिस

Thu, 05 Oct 2023 02:40 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 05 Oct 2023 02:40 PM IST
सार

एसओ मदन मोहन मिश्रा ने बताया कि आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसके गिरोह में तीन अन्य लोग भी शामिल है। ये सभी हरियाणा से कार से आकर वारदात को अंजाम देते थे और फिर चले जाते थे। हरियाणा से आने के बाद दो-दो की संख्या में अलग-अलग हो जाते थे। इनके पास अलग-अलग बैंक के एटीएम कार्ड होते है और फिर बुजुर्गों को टारगेट करते है।
 

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To fulfill their hobby they commit fraud by changing ATM cards
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : पीटीआई

विस्तार

गोरखपुर में एटीएम कार्ड बदलकर जालसाजी करने वाले गिरोह के फरार तीन सदस्यों की पुलिस तलाश में है। वहीं, जेल भेजे गए आरोपी ने बताया कि सभी दोस्त हैं। इन्हें घूमने का शौक है और खुद के खर्च को निकालने के लिए एटीएम कार्ड बदलकर जालसाजी करने लगे। आरोपियों को रास्ते में जहां पर भी एटीएम सुनसान में नजर आते थे, वहीं पर वारदात को अंजाम देते थे और बड़े शहरों में वारदात करने के लिए दो-दो की टोली में भी बंट जाते थे। अब पुलिस का मानना है कि फरार आरोपियों के पकड़े जाने के बाद पूरा मामला खुलकर सामने आएगा।

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जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने हरियाणा के हांसी इलाके के हल्का नंबर तीन निवासी रवि को जेल भेजा है। एम्स पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की तो तीन अन्य साथियों का नाम बताया है, जिसकी तलाश में पुलिस टीमें लगी हैं।
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आरोपी रवि ने बताया कि वह हरियाणा से कार से निकलते हैं और रास्ते में वारदात करते है और फिर शहर बदल देते हैं। दो-दो की संख्या में आरोपी टोली बनाकर वारदात को करते हैं। एक बाहर निगरानी करता है और साथी अंदर शातिराना तरीके से एटीएम कार्ड को बदल देता था। फिर वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाते थे।
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सबसे बड़ी बात है कि यह कोई बड़ी रकम की जालसाजी नहीं करते हैं, यही वजह है कि वारदात के बाद भी पकड़े नहीं जाते थे। इसके पीछे की सोच रवि ने बताया कि ज्यादा रुपये की खरीदारी या जालसाजी करने पर पीड़ित दौड़ भाग करते है तो पुलिस जांच तेज करती है। इसका कहना है कि पुलिस से बचने के लिए छोटी रकम ही निकालते थे। कभी भी 50 हजार से ज्यादा की जालसाजी नहीं की। रकम को घूमने में खर्च किया जाता था। बचने पर बराबर-बराबर बांट लिया जाता है।

ऐसे करते थे जालसाजी
एसओ मदन मोहन मिश्रा ने बताया कि आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसके गिरोह में तीन अन्य लोग भी शामिल है। ये सभी हरियाणा से कार से आकर वारदात को अंजाम देते थे और फिर चले जाते थे। हरियाणा से आने के बाद दो-दो की संख्या में अलग-अलग हो जाते थे। इनके पास अलग-अलग बैंक के एटीएम कार्ड होते है और फिर बुजुर्गों को टारगेट करते है।

खासतौर पर सुनसान वाले जगह के एटीएम बूथ पर जाते हैं। वहां पर मदद के बहाने एटीएम कार्ड को बदल देते है और फिर खाते से रकम खाली कर देते हैं। आरोपी ने बताया कि पहले एटीएम में छेड़छाड़ कर देते हैं, जिससे एटीएम से तुरंत पैसा नहीं निकलता है। फिर से पिन कोड को जान लेते हैं और मदद के बहाने एटीएम कार्ड को बदल देते है। फिर किसी अन्य एटीएम पर जाकर रुपये निकाल लेते हैं।

 

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