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छापा: नेपाल में 6.5 करोड़ के टायर बेचे मगर रिकॉर्ड में फूटी कौड़ी का लेनदेन नहीं, CGST ने की कार्रवाई

Thu, 13 Jul 2023 11:22 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 13 Jul 2023 11:22 AM IST
सार

जीएसटी विभाग का दावा है कि मोदी केयर फर्म ने टायर को नेपाल में बेचकर जो आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) रिटर्न लिया था, वह नियमानुसार गलत है। संजय के साथ व्यापार करने वाली सहयोगी फर्माें का रिकॉर्ड नहीं मिला है। नेपाल में जिन फर्म को टायर की बिक्री की गई है, उनका भी रिकॉर्ड नहीं मिला है।

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Tires worth six and a half million sold in Nepal but there is no transaction in record
जीएसटी - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

जीएसटी की केंद्रीय टीम ने मंगलवार को हिंदी बाजार में छापा मारा। नेपाल में भी टायर का कारोबार करने वाले कारोबारी मोदी केयर फर्म के प्रोपराइटर संजय मोदी के आवास पर भी टीम पहुंची। टीम का दावा है कि जांच के दौरान 6.50 करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी गई। इतनी मोटी रकम का धंधा हुआ और रिकॉर्ड में फूटी कौड़ी भी दर्ज नहीं थी। यानि पूरा धंधा जोड़तोड़ से चल रहा था।

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करीब चार घंटे तक टीम ने घर पर ही जांच की और फिर कारोबारी संजय को अपने साथ लेकर कस्टम दफ्तर गई। वहां भी लंबी पूछताछ के बाद जीएसटी टीम ने बुधवार देर शाम करीब छह बजे ढाई करोड़ रुपये जमा करवाकर कारोबारी को वापस जाने दिया। पूछताछ में कई अहम सुराग भी हाथ लगे हैं, जो कुछ और मामले भी खुलवा सकते हैं। उधर, जीएसटी की टीम की कार्रवाई से हिंदी बाजार में हड़कंप मचा है।
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हिंदी बाजार में शीतला माता मंदिर के सामने कारोबारी संजय मोदी का आवास है। मंगलवार को बाजार बंद था, दोपहर में अचानक सेंट्रल जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) की टीम संजय मोदी के आवास पर पहुंची। टीम ने संजय मोदी से उनके टायर के व्यापार को लेकर पूछताछ शुरू की। दस्तावेजों की भी पड़ताल की, जिसके बाद करीब 6.50 करोड़ रुपये की कर चोरी की बात सामने आई। सूत्र बताते हैं कि अचानक से इतनी बड़ी रकम सुनकर संजय भी भौचक रह गए।
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जीएसटी विभाग का दावा है कि मोदी केयर फर्म ने टायर को नेपाल में बेचकर जो आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) रिटर्न लिया था, वह नियमानुसार गलत है। संजय के साथ व्यापार करने वाली सहयोगी फर्माें का रिकॉर्ड नहीं मिला है। नेपाल में जिन फर्म को टायर की बिक्री की गई है, उनका भी रिकॉर्ड नहीं मिला है। ऐसे में जीएसटी की टीम ने बिक्री के आधार उन फर्मों के कर का भी निर्धारण करते हुए कार्रवाई की।

सूत्रों की माने तो मोदी केयर की ओर से कुछ फर्मों से टायर मंगवा कर नेपाल भेजा जाता है। इसी संबंध में की गई जांच-पड़ताल में कर चोरी का मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, कस्टम कार्यालय में पूछताछ के दौरान पहले तो संजय आरोपों से इनकार करते रहे लेकिन, जब विभागीय दस्तावेजों को दिखाया गया तो उन्होंने गड़बड़ी की बात मा ली। इसके बाद उन्होंने परिजनों को फोन कर मौके पर ही ढाई करोड़ रुपये जमा करवाए।

कस्टम मोहर से खुला खेल

सेंट्रल जीएसटी की टीम को कर चोरी कर टायरों को नेपाल में निर्यात करने की जानकारी मिली थी। जांच में सामने आया कि गोरखपुर से नेपाल भेजे जाने वाले टायरों की पूरी सूची पर कस्टम विभाग की मोहर लगती है। इन्हीं मोहरों की जांच में पता चला कि टायर गोरखपुर के मोदी केयर फर्म से नेपाल भेजे गए थे। जब यह पता लगाने की कोशिश हुई कि नेपाल में किस फर्म को टायर बेचा गया है तो उसका रिकॉर्ड नहीं मिला। इसी से पूरा खेल खुल गया।

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विदेश में व्यापार के लिए एलयूटी पंजीकरण अनिवार्य
जांच में सामने आया कि मोदी केयर फर्म ने विदेश में व्यापार करने के लिए लेटर ऑफ अंडरटेकिंग का पंजीकरण किया है। कस्टम से स्वीकृत के बाद ही फर्म अपने सामान को नेपाल में बेचती है। लेकिन, इसी बीच विभिन्न फर्मों के खेल से करोड़ों रुपये के जीएसटी चोरी की बात सामने आ गई।

सराफा पदाधिकारी उलझ गए
हिंदी बाजार में सैकड़ों दुकानें सोने-चांदी की हैं। ऐसे में सेंट्रल जीएसटी की टीम जैसे ही बाजार के एक व्यापारी के घर पहुंची तो अफरातफरी मच गई। इसी बीच किसी ने सराफा पदाधिकारियों को भी सूचना दे दी। जीएसटी की टीम के कार्रवाई के बीच ही सराफा पदाधिकारियों ने अधिकारियों से बातचीत की। कुछ देर तक उनसे उलझते रहे। जब उन्हें ये पता चला कि सोने-चांदी के व्यापारी के यहां नहीं बल्कि टायर के एक कारोबारी के यहां छापा पड़ा है, तो सभी किनारे हट गए।



 
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