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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   There will be four Mondays, and the month of Sawan will conclude with Raksha Bandhan on August 28.

शुभ संयोग वाला श्रावण: सावन में 4 सोमवार, इस बार सावन होगा विशेष-शिव आराधना होगी फलदायी; जानिए कबसे लगेगा

Tue, 07 Jul 2026 02:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Tue, 07 Jul 2026 02:38 AM IST
सार

इस बार मलमास के कारण सावन की शुरुआत देर से हो रही है। इस बार सावन में चार सोमवार पड़ेंगे। पहला सोमवार तीन अगस्त, दूसरा 10 अगस्त, तीसरा 17 अगस्त तथा चौथा सोमवार 24 अगस्त को होगा। सोमवार व्रत विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु तथा अविवाहित कन्याएं मनचाहा वर प्राप्त करने की कामना से इन व्रतों का पालन करती हैं।

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There will be four Mondays, and the month of Sawan will conclude with Raksha Bandhan on August 28.
सावन 2026 कब से शुरू होगा? - फोटो : AI

विस्तार

श्रावण मास का आरंभ 30 जुलाई बृहस्पतिवार से होगा और समापन शुक्रवार 28 अगस्त को रक्षाबंधन व पूर्णिमा के दिन होगा। आरंभ और समापन दोनों ही शुभ वारों पर होने के कारण इस बार का सावन विशेष पुण्यदायी और शिव आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है।

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सावन की शुरुआत श्रवण नक्षत्र में होगी जिसके स्वामी चंद्रमा हैं। चंद्रमा का भगवान शिव से विशेष संबंध होने के कारण यह संयोग भी धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

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पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, इस बार मलमास के कारण सावन की शुरुआत देर से हो रही है। इस बार सावन में चार सोमवार पड़ेंगे। पहला सोमवार तीन अगस्त, दूसरा 10 अगस्त, तीसरा 17 अगस्त तथा चौथा सोमवार 24 अगस्त को होगा। सोमवार व्रत विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु तथा अविवाहित कन्याएं मनचाहा वर प्राप्त करने की कामना से इन व्रतों का पालन करती हैं।

गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ के वेद विभागाध्यक्ष डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी के अनुसार, श्रावण मास में 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि, 15 अगस्त को हरियाली तीज और 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने इसी माह कठोर तप कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था।

समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव ने विष का पान कर सृष्टि की रक्षा की, जिसके कारण उन्हें नीलकंठ की उपाधि मिली।

सावन में जलाभिषेक का है विशेष महत्व
धार्मिक मान्यता है कि सावन में गंगाजल, दूध एवं स्वच्छ जल से शिवलिंग का अभिषेक, बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, अक्षत, शहद तथा 108 बिल्वपत्र अर्पित करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। रुद्राभिषेक को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्टों की निवृत्ति के लिए विशेष फलदायी माना गया है।
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सावन में कांवड़ यात्रा का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान परशुराम ने सर्वप्रथम शिवलिंग पर जल अर्पित करने की परंपरा प्रारंभ की थी, जबकि एक अन्य मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के बाद भगवान शिव के विषपान के बाद जलाभिषेक की परंपरा शुरू हुई।

बाबा बैजनाथ धाम व पिपराइच मोटेश्वर नाथ मंदिर जाते हैं कांवड़िया
सावन माह में चारों ओर हरियाली छा जाती है और पूरा वातावरण बोल बम-बम के जयघोष से शिवमय हो उठता है। इस दौरान श्रद्धालु गेरुआ वस्त्र धारण कर बाबा बैजनाथ धाम व पिपराइच स्थित मोटेश्वर नाथ मंदिर ढोल नगाड़े व डीजे के साथ जाते हैं। इस दौरान विभिन्न संगठनों व स्थानीय लोगों की ओर से इनका स्वागत कर जलपान कराया जाता है।

नाग पंचमी व देवशयनी एकादशी भी सावन में ही पड़ेगा
पंडित विकास मालवीय के अनुसार, सावन में नाग पंचमी 17 अगस्त (सोमवार) को मनाई जाएगी। इस दौरान भगवान शिव की पूजा अर्चना के साथ नाग-नागिन की पूजा-अर्चना कर इन्हें दूध व लावा अर्पण किया जाता है। वहीं देवशयनी एकादशी 25 जुलाई (शनिवार) को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन से चार माह तक भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं, शादी-विवाह आदि चार माह तक वर्जित हो जाते हैं।
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