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Gorakhpur News: बारिश में ट्रैक की निगरानी के थे सख्त निर्देश, जिम्मेदारों ने नहीं दिखाई गंभीरता
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गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे की जीएम ने नौ जुलाई को बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य की तैयारी के लिए बुलाई गई बैठक में स्पष्ट आदेश दिया था कि जहां भी बाढ़ या बारिश से क्षतिग्रस्त या प्रभावित पुल-पुलिया, पटरियां हैं, उनकी प्राथमिकता से मरम्मत करा ली जाए। पटरियाें की निगरानी और बचाव कार्य के लिए सभी जरूरी तैयारियों का निर्देश भी दिया गया था, लेकिन अफसरों ने कोई ध्यान नहीं दिया।
गोंडा-मनकापुर खंड में हुए रेल हादसे के बाद कारणों की छानबीन शुरू हुई तो इस बात की चर्चा तेज हो गई कि पटरी के किनारे कई दिन से पानी भरा था। वहां जलभराव के चलते पटरियों के धंसने की भी आशंका जताई जा रही है। हादसे के बाद हुए कार्य के दौरान पटरी के किनारे के गड्ढों को भरा गया।
जुलाई के पहले सप्ताह में मूसलधार बारिश के चलते पूर्वोत्तर रेलवे के अधीन आने वाले पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड में कई जगह पटरियां क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिसके चलते ट्रेनों का संचालन रोकना पड़ा था। इसके बाद नौ जुलाई को महाप्रबंधक सभा कक्ष में महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें रेलवे के सभी विभागों के वरिष्ठ अफसर मौजूद थे।
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जीएम ने बाढ़ और बारिश को देखते हुए नदियों के जलस्तर पर निगरानी रखने के साथ-साथ जलभराव वाले क्षेत्रों में रेल लाइनों की नियमित निगरानी के निर्देश दिए थे, लेकिन लखनऊ खंड में इस आदेश का अनुपालन करने वालों ने गंभीरता नहीं दिखाई। क्योंकि गोंडा-मनकापुर खंड में जिस जगह पर हादसा हुआ, वहां पटरी के नजदीक ही जलभराव था। अगर बैठक में दिए गए निर्देशों का पालन हुआ होता तो 10 दिन के अंदर जरूर किसी न किसी की नजर ट्रैक के किनारे भरे पानी पर पड़ी होती और उसे हटाने का प्रयास भी हुआ होता।
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हादसे के बाद भरे गए गड्ढे
बृहस्पतिवार दोपहर बाद ट्रेन के बेपटरी होने की जानकारी पर अफसर मौके पर पहुंचे तो वहीं ट्रैक के किनारे भरे पानी पर नजर पड़ी। चर्चा है कि क्षतिग्रस्त पटरी को हटाने और नई पटरी बिछाने के दौरान इस बात का प्रयास किया गया कि रेल लाइन के किनारे के गड्ढों को भर दिया जाए। काफी हद तक गड्ढों को भरा भी गया, लेकिन शनिवार को जब सीआरएस मौके पर पहुंचे तो उन्होंने भी जलभराव वाले स्थल और वहां कराए गए कार्यों को देखा।
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सीआरएस आज डीआरएम कार्यालय में लेंगे जानकारी
रेल संरक्षा आयुक्त प्रणजीव सक्सेना ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है। शुक्रवार को वह घटनास्थल पर गए थे, वहीं, रविवार को मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) कार्यालय लखनऊ में सुबह 11:00 बजे से जांच करेंगे। सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि इस हादसे से संबंधित कोई भी आम व्यक्ति यदि कोई जानकारी रखते हों तो वे रेल संरक्षा आयुक्त के समक्ष उपस्थित होकर अपनी बात रख सकते हैं। इसके अलावा उत्तर पूर्वी परिमंडल, विभूति खंड, गोमतीनगर/लखनऊ के पते पर भी अपना पक्ष रख सकते हैं।
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गोंडा-मनकापुर खंड में हुए रेल हादसे के बाद कारणों की छानबीन शुरू हुई तो इस बात की चर्चा तेज हो गई कि पटरी के किनारे कई दिन से पानी भरा था। वहां जलभराव के चलते पटरियों के धंसने की भी आशंका जताई जा रही है। हादसे के बाद हुए कार्य के दौरान पटरी के किनारे के गड्ढों को भरा गया।
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जुलाई के पहले सप्ताह में मूसलधार बारिश के चलते पूर्वोत्तर रेलवे के अधीन आने वाले पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड में कई जगह पटरियां क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिसके चलते ट्रेनों का संचालन रोकना पड़ा था। इसके बाद नौ जुलाई को महाप्रबंधक सभा कक्ष में महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें रेलवे के सभी विभागों के वरिष्ठ अफसर मौजूद थे।
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जीएम ने बाढ़ और बारिश को देखते हुए नदियों के जलस्तर पर निगरानी रखने के साथ-साथ जलभराव वाले क्षेत्रों में रेल लाइनों की नियमित निगरानी के निर्देश दिए थे, लेकिन लखनऊ खंड में इस आदेश का अनुपालन करने वालों ने गंभीरता नहीं दिखाई। क्योंकि गोंडा-मनकापुर खंड में जिस जगह पर हादसा हुआ, वहां पटरी के नजदीक ही जलभराव था। अगर बैठक में दिए गए निर्देशों का पालन हुआ होता तो 10 दिन के अंदर जरूर किसी न किसी की नजर ट्रैक के किनारे भरे पानी पर पड़ी होती और उसे हटाने का प्रयास भी हुआ होता।
हादसे के बाद भरे गए गड्ढे
बृहस्पतिवार दोपहर बाद ट्रेन के बेपटरी होने की जानकारी पर अफसर मौके पर पहुंचे तो वहीं ट्रैक के किनारे भरे पानी पर नजर पड़ी। चर्चा है कि क्षतिग्रस्त पटरी को हटाने और नई पटरी बिछाने के दौरान इस बात का प्रयास किया गया कि रेल लाइन के किनारे के गड्ढों को भर दिया जाए। काफी हद तक गड्ढों को भरा भी गया, लेकिन शनिवार को जब सीआरएस मौके पर पहुंचे तो उन्होंने भी जलभराव वाले स्थल और वहां कराए गए कार्यों को देखा।
सीआरएस आज डीआरएम कार्यालय में लेंगे जानकारी
रेल संरक्षा आयुक्त प्रणजीव सक्सेना ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है। शुक्रवार को वह घटनास्थल पर गए थे, वहीं, रविवार को मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) कार्यालय लखनऊ में सुबह 11:00 बजे से जांच करेंगे। सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि इस हादसे से संबंधित कोई भी आम व्यक्ति यदि कोई जानकारी रखते हों तो वे रेल संरक्षा आयुक्त के समक्ष उपस्थित होकर अपनी बात रख सकते हैं। इसके अलावा उत्तर पूर्वी परिमंडल, विभूति खंड, गोमतीनगर/लखनऊ के पते पर भी अपना पक्ष रख सकते हैं।