{"_id":"65ff64994b6af100b90b4324","slug":"the-whole-world-needs-the-thoughts-of-adi-shankaracharya-prof-rajinikanth-gorakhpur-news-c-7-gkp1006-506530-2024-03-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"पूरे संसार को आदि शंकराचार्य के विचारों की जरूरत : प्रो. रजनीकांत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पूरे संसार को आदि शंकराचार्य के विचारों की जरूरत : प्रो. रजनीकांत
Sun, 24 Mar 2024 04:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sun, 24 Mar 2024 04:54 AM IST
विज्ञापन
- गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित हुई आदि गुरु शंकराचार्य व्याख्यानमाला
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डीडीयू के राजनीति विज्ञान विभाग के आचार्य प्रो. रजनीकांत पांडेय ने कहा कि व्यक्ति शासन नहीं करता, बल्कि विचार शासन करता है। पूरे संसार को आदि शंकराचार्य के विचारों की जरूरत है। आदि शंकराचार्य ने सबसे ज्यादा अंतरात्मा की पवित्रता पर जोर दिया। संघर्ष के बाद हमारा जो संविधान आया वह आदि शंकराचार्य के मूल्यों का परिणाम है।
प्रो. रजनीकांत शनिवार को गोरखपुर विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र विभाग एवं भारतीय भाषा समिति, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘आदि गुरु शंकराचार्य व्याख्यानमाला’ को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
अध्यक्षता करते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रो. राजेश्वर मिश्र ने आदि शंकराचार्य की सूक्तियों का जिक्र करते हुए कहा कि वेद हमारा पहला लिखित दस्तावेज है, जिसे पढ़ कर हर व्यक्ति ज्ञान सागर में एक डुबकी लगाकर कई विषयों पर ज्ञान प्राप्त कर सकता है। राजनीति शास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. रूसीराम महानंदा ने अतिथियों का स्वागत एवं विषय प्रवर्तन किया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. अमित उपाध्याय ने रूपरेखा प्रस्तुत की। संचालन डॉ. अभिषेक शुक्ल एवं आभार ज्ञापन डॉ. अमित कुमार उपाध्याय ने किया। कार्यक्रम में प्रो. अनुभूति दूबे, प्रो. शरद मिश्र, प्रो. गोपाल प्रसाद, डाॅ. महेंद्र कुमार सिंह, डॉ. विस्मिता पालीवाल, डॉ. मनीष पांडेय, प्रो. धनंजय कुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डीडीयू के राजनीति विज्ञान विभाग के आचार्य प्रो. रजनीकांत पांडेय ने कहा कि व्यक्ति शासन नहीं करता, बल्कि विचार शासन करता है। पूरे संसार को आदि शंकराचार्य के विचारों की जरूरत है। आदि शंकराचार्य ने सबसे ज्यादा अंतरात्मा की पवित्रता पर जोर दिया। संघर्ष के बाद हमारा जो संविधान आया वह आदि शंकराचार्य के मूल्यों का परिणाम है।
प्रो. रजनीकांत शनिवार को गोरखपुर विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र विभाग एवं भारतीय भाषा समिति, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘आदि गुरु शंकराचार्य व्याख्यानमाला’ को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
विज्ञापन
अध्यक्षता करते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रो. राजेश्वर मिश्र ने आदि शंकराचार्य की सूक्तियों का जिक्र करते हुए कहा कि वेद हमारा पहला लिखित दस्तावेज है, जिसे पढ़ कर हर व्यक्ति ज्ञान सागर में एक डुबकी लगाकर कई विषयों पर ज्ञान प्राप्त कर सकता है। राजनीति शास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. रूसीराम महानंदा ने अतिथियों का स्वागत एवं विषय प्रवर्तन किया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. अमित उपाध्याय ने रूपरेखा प्रस्तुत की। संचालन डॉ. अभिषेक शुक्ल एवं आभार ज्ञापन डॉ. अमित कुमार उपाध्याय ने किया। कार्यक्रम में प्रो. अनुभूति दूबे, प्रो. शरद मिश्र, प्रो. गोपाल प्रसाद, डाॅ. महेंद्र कुमार सिंह, डॉ. विस्मिता पालीवाल, डॉ. मनीष पांडेय, प्रो. धनंजय कुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन