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Gorakhpur News: गोरखपुर में पेड़-पौधे के जाल से रोकेंगे गंदगी, निर्मल होगी गोरखपुर की गंगा

Sun, 04 Feb 2024 10:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Updated Sun, 04 Feb 2024 10:56 AM IST
सार

नगर निगम मुख्य अभियंता संजय चौहान ने कहा कि गंदे पानी को नाले के अंदर ही साफ करने के मकसद से तकिया घाट नाले में प्राकृतिक एसटीपी का निर्माण कराया जा रहा है। इसके तहत नाले में पत्थर की चिनाई वाली दीवार के साथ ही कुछ पौधे भी लगाए जाएंगे जिससे पानी रास्ते में ही साफ हो जाएगा।

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The net of trees and plants will stop pollution Gorakhpur Ganga will become clean.
NGT - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की गाइडलाइन के अनुसार नाले का पानी नदियों में सीधे नहीं गिराया जा सकता। इसके लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से पानी को साफ करना जरूरी है। एसटीपी को लगाने में करोड़ों रुपये का खर्च आता है।

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नगर निगम गोरखपुर ने कम खर्च में पानी को साफ करने की एक बढि़या तरीका निकाला है। अब राप्ती नदी में गिरने वाला पानी नाले के अंदर ही प्राकृतिक एसटीपी में साफ हो जाएगा। इसके लिए किसी बड़ी मशीन की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। पेड़-पौधों से ही सारा पानी साफ हो जाएगा।
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प्राकृतिक एसटीपी लगाने की शुरूआत तकिया घाट नाले में लगाई जाएगी। तीन किलोमीटर लंबे इस नाले के अंदर ही पानी साफ होने के बाद ही राप्ती नदी में जाएगा। इसके लिए 2.90 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत हो चुका है। इसके साथ ही एसटीपी को लगाने के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो गई है। टेंडर पूरा होने के बाद तीन महीने के अंदर इस काम काे पूरा कर लिया जाएगा।
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मुख्यमंत्री ने भी दी थी सलाह
सीएम योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों राप्ती रिवर फ्रंट को लेकर जीडीए, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इसमें उन्होंने नगर निगम को एसटीपी लगाकर राप्ती नदी में गिरने वाले पानी को साफ करने की जिम्मेदारी दी थी। सीएम ने कहा था कि निगम प्राकृतिक तरीके से पानी को साफ करने की योजना बनाएं। प्राकृतिक एसटीपी के लिए एक महीने पहले प्रो. सीआर बाबू की टीम ने शहर के नालों और पोखरों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट दी थी। उसी रिपोर्ट के आधार पर निगम इसका निर्माण कराने जा रहा है।

नाले में लगेंगे पत्थर
नाले के अंदर पानी को साफ करने के लिए सबसे पहले इन नालों की सफाई होगी। इसके बाद नाले के अंदर एक पत्थर की चिनाई वाली दीवार बनाई जाएगी। प्रत्येक नाले में 50-100 मीटर की दूरी पर समान पत्थर की चिनाई वाली दीवार का निर्माण किया जाएगा। इसका निर्माण उन स्थानों पर ही होगा जहां नाली की चौड़ाई संकरी है। इसके साथ ही जगह-जगह पत्थर बिछाए जाएंगे। जहां पर कच्चा नाला है वहां पर निर्मित आर्द्र भूमि प्रणाली को विकसित किया जाएगा। इसमें तरह-तरह के पौधे लगाए जाएंगे। इन पत्थर और पौधों से गुजरते हुए पानी अपने आप साफ हो जाएगा और उसके बाद नदी में प्रवेश करेगा।
 

लगाए जाएंगे ये पौधे
राप्ती नदी से पहले नाले के किनारों का कटाव ऊंचे बाढ़ क्षेत्र तक कम से कम 200 मीटर या उससे अधिक तक फैला हुआ है। इन नष्ट हुए किनारों को इपोमिया फिस्टुलाटा, सैकरम स्पान्टेनियम, सैलिक्स टेट्रास्पर्मा और वेटिवेरिया जिजानियोइड्स पौधे लगाकर स्थिर किया जाएगा।

नगर निगम मुख्य अभियंता संजय चौहान ने कहा कि गंदे पानी को नाले के अंदर ही साफ करने के मकसद से तकिया घाट नाले में प्राकृतिक एसटीपी का निर्माण कराया जा रहा है। इसके तहत नाले में पत्थर की चिनाई वाली दीवार के साथ ही कुछ पौधे भी लगाए जाएंगे जिससे पानी रास्ते में ही साफ हो जाएगा। इसके लिए 2.90 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत हो गया है। जल्द ही टेंडर फाइनल कर काम शुरू कर दिया जाएगा।
 
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