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Gorakhpur News : फेफड़ों पर जमी झिल्ली को ऑपरेशन कर हटाया, सामान्य हुई मरीज की सांस
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फेफड़े की टीबी के चलते 18 वर्षीय युवक की फूल रही थी सांस
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बिहार के रहने वाले 18 वर्षीय युवक को फेफड़ों की टीबी की वजह से सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। जांच में पता लगा कि फेफड़े पर झिल्ली बनने की वजह से वह सिकुड़ने लगा था। झिल्ली (फाइब्रोटिक लेयर) की परत मोटी हो रही थी। इसको हटाने के लिए सर्जन डॉ दुर्गेश त्रिपाठी ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कार्डियो थोरासिक वैस्कुलर सर्जरी की। अब मरीज की हालत में सुधार हो रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दूरबीन विधि से इस तरह की पहली सर्जरी है। झिल्ली निकलने से युवक के फेफड़े अपने आकार में लौट आए हैं। डॉ. दुर्गेश त्रिपाठी ने बताया कि मरीज का वीडियो असिस्टेंस थोरेसिक सर्जरी (वीएटीएस) करने का फैसला किया गया। यह जटिल सर्जरी है। पूर्वी यूपी में इसकी सुविधा नहीं है। इस ऑपरेशन की खास तकनीक है। इसमें मरीज के मुंह में दो नली डाली जाती है। बेहोशी के दौरान एक फेफड़ों में ही हवा भरी जाती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बिहार के रहने वाले 18 वर्षीय युवक को फेफड़ों की टीबी की वजह से सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। जांच में पता लगा कि फेफड़े पर झिल्ली बनने की वजह से वह सिकुड़ने लगा था। झिल्ली (फाइब्रोटिक लेयर) की परत मोटी हो रही थी। इसको हटाने के लिए सर्जन डॉ दुर्गेश त्रिपाठी ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कार्डियो थोरासिक वैस्कुलर सर्जरी की। अब मरीज की हालत में सुधार हो रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दूरबीन विधि से इस तरह की पहली सर्जरी है। झिल्ली निकलने से युवक के फेफड़े अपने आकार में लौट आए हैं। डॉ. दुर्गेश त्रिपाठी ने बताया कि मरीज का वीडियो असिस्टेंस थोरेसिक सर्जरी (वीएटीएस) करने का फैसला किया गया। यह जटिल सर्जरी है। पूर्वी यूपी में इसकी सुविधा नहीं है। इस ऑपरेशन की खास तकनीक है। इसमें मरीज के मुंह में दो नली डाली जाती है। बेहोशी के दौरान एक फेफड़ों में ही हवा भरी जाती है।