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Gorakhpur News: सितार की झंकार संग निकली रघुपति राघव राजा राम की धुन ने बांधा समांन
Sat, 03 Oct 2026 02:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 03 Oct 2026 02:49 AM IST
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गोरखपुर। गांधी-शास्त्री जयंती पर शुक्रवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का महायोगी गुरु गोरखनाथ शोध पीठ गांधी के प्रिय भजनों और भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुर-लहरियों से गूंज उठा।
सांस्कृतिक प्रकोष्ठ ‘तरंग’ और ललित कला व संगीत विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने ‘रघुपति राघव राजा राम’ और ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ समेत अन्य भजनों की प्रस्तुति देकर गांधी के सत्य, अहिंसा और सामाजिक समरसता के संदेश को सुरों में पिरोया।
कार्यक्रम में सितार शिक्षक डॉ. राम किशोर के सितार वादन ने विशेष छाप छोड़ी। भजन प्रस्तुतियों का निर्देशन डॉ. पंचम कुमार मलिक ने किया, जबकि डॉ. इंद्रेश कुमार सहाय ने बांसुरी पर संगत दी। गायन, सितार और बांसुरी के समन्वय ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग दिया। कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. राजवंश राव ने कहा कि गांधी के सत्य, अहिंसा, स्वच्छता और आत्मानुशासन तथा लाल बहादुर शास्त्री की सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा आज भी प्रासंगिक हैं।
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कार्यक्रम की संयोजक सांस्कृतिक प्रकोष्ठ ‘तरंग’ की निदेशक एवं ललित कला व संगीत विभाग की अध्यक्ष प्रो. अनुभूति दुबे ने आयोजन में सहयोग देने वाले शिक्षकों, विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय परिवार के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम में शिक्षकों, कुलसचिव समेत विश्वविद्यालय के सदस्य मौजूद रहे।े
सांस्कृतिक प्रकोष्ठ ‘तरंग’ और ललित कला व संगीत विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने ‘रघुपति राघव राजा राम’ और ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ समेत अन्य भजनों की प्रस्तुति देकर गांधी के सत्य, अहिंसा और सामाजिक समरसता के संदेश को सुरों में पिरोया।
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कार्यक्रम में सितार शिक्षक डॉ. राम किशोर के सितार वादन ने विशेष छाप छोड़ी। भजन प्रस्तुतियों का निर्देशन डॉ. पंचम कुमार मलिक ने किया, जबकि डॉ. इंद्रेश कुमार सहाय ने बांसुरी पर संगत दी। गायन, सितार और बांसुरी के समन्वय ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग दिया। कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. राजवंश राव ने कहा कि गांधी के सत्य, अहिंसा, स्वच्छता और आत्मानुशासन तथा लाल बहादुर शास्त्री की सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा आज भी प्रासंगिक हैं।
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कार्यक्रम की संयोजक सांस्कृतिक प्रकोष्ठ ‘तरंग’ की निदेशक एवं ललित कला व संगीत विभाग की अध्यक्ष प्रो. अनुभूति दुबे ने आयोजन में सहयोग देने वाले शिक्षकों, विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय परिवार के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम में शिक्षकों, कुलसचिव समेत विश्वविद्यालय के सदस्य मौजूद रहे।े