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पब्लिक लाइब्रेरी की तरह काम करेगा गोरक्षनाथ शोधपीठ का ग्रंथालय : प्रो. पूनम
Sun, 17 Mar 2024 02:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sun, 17 Mar 2024 02:43 AM IST
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के सेंट्रल लाइब्रेरी और राजा राममोहन राय लाइब्रेरी फाउंडेशन, कोलकाता की ओर से गोरखपुर विश्वविद्यालय के संवाद भवन में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि अगर विश्वविद्यालय को जानना है तो विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में जाना चाहिए। किसी शहर में पब्लिक लाइब्रेरी का होना उस शहर की सभ्यता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि गोरखपुर नगर की सभ्यता एवं धरोहर को प्रतिबिंबित कर रही गोरखपुर विश्वविद्यालय के महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ की लाइब्रेरी नगरवासियों के लिए एकेडमिक लाइब्रेरी के साथ-साथ एक पब्लिक लाइब्रेरी के रूप में भी कार्य करेगी।
मुख्य अतिथि गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाशंकर दूबे ने कहा कि पुस्तकों का उद्भव भारत की भूमि पर हुआ है। वेद और उपनिषद ज्ञान-विज्ञान एवं साहित्य के स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि पांडुलिपियां हमारे देश की धरोहर हैं। हमारे संग्रहालयों एवं विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे इसे सुरक्षित रखें। पब्लिक लाइब्रेरी का दायित्व है कि वह समाज के प्रत्येक घटक के साथ बच्चे, बुजुर्ग एवं युवा वर्ग की जरूरतों के अनुसार पुस्तकें रखें। सार्वजनिक पुस्तकालयों का गठन तकनीक के सामंजस्य के साथ इस प्रकार करना होगा कि कौशलयुक्त उद्यमी के निर्माण में यह सहायक हो सके।
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बीएचयू के प्रो. आदित्य त्रिपाठी ने कहा कि पब्लिक लाइब्रेरी का उद्देष्य शिक्षा, संस्कृति, साहित्य, कला को संरक्षित करना है। लाइब्रेरी समुदाय के विकास में, कौशल विकास में एवं सतत् शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
अतिथियों का स्वागत संगोष्ठी के संयोजक डाॅ. विभाष कुमार मिश्र ने किया। संचालन डाॅ. आमोद कुमार राय और आभार ज्ञापन कुलसचिव प्रो. शांतनु रस्तोगी ने किया। कार्यक्रम में डाॅ. जेएल उपाध्याय, प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा, प्रो. विनय कुमार सिंह, प्रो. अजय सिंह, प्रो. अनुभूति दूबे आदि मौजूद रहीं।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि अगर विश्वविद्यालय को जानना है तो विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में जाना चाहिए। किसी शहर में पब्लिक लाइब्रेरी का होना उस शहर की सभ्यता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि गोरखपुर नगर की सभ्यता एवं धरोहर को प्रतिबिंबित कर रही गोरखपुर विश्वविद्यालय के महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ की लाइब्रेरी नगरवासियों के लिए एकेडमिक लाइब्रेरी के साथ-साथ एक पब्लिक लाइब्रेरी के रूप में भी कार्य करेगी।
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मुख्य अतिथि गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाशंकर दूबे ने कहा कि पुस्तकों का उद्भव भारत की भूमि पर हुआ है। वेद और उपनिषद ज्ञान-विज्ञान एवं साहित्य के स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि पांडुलिपियां हमारे देश की धरोहर हैं। हमारे संग्रहालयों एवं विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे इसे सुरक्षित रखें। पब्लिक लाइब्रेरी का दायित्व है कि वह समाज के प्रत्येक घटक के साथ बच्चे, बुजुर्ग एवं युवा वर्ग की जरूरतों के अनुसार पुस्तकें रखें। सार्वजनिक पुस्तकालयों का गठन तकनीक के सामंजस्य के साथ इस प्रकार करना होगा कि कौशलयुक्त उद्यमी के निर्माण में यह सहायक हो सके।
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बीएचयू के प्रो. आदित्य त्रिपाठी ने कहा कि पब्लिक लाइब्रेरी का उद्देष्य शिक्षा, संस्कृति, साहित्य, कला को संरक्षित करना है। लाइब्रेरी समुदाय के विकास में, कौशल विकास में एवं सतत् शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
अतिथियों का स्वागत संगोष्ठी के संयोजक डाॅ. विभाष कुमार मिश्र ने किया। संचालन डाॅ. आमोद कुमार राय और आभार ज्ञापन कुलसचिव प्रो. शांतनु रस्तोगी ने किया। कार्यक्रम में डाॅ. जेएल उपाध्याय, प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा, प्रो. विनय कुमार सिंह, प्रो. अजय सिंह, प्रो. अनुभूति दूबे आदि मौजूद रहीं।