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एआई की बढ़ती भूमिका में नए सिरे से जिम्मेदारी परिभाषित करने की जरूरत : प्रो. टंडन

Mon, 24 Nov 2025 11:23 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Nov 2025 11:23 PM IST
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The growing role of AI calls for a fresh definition of responsibility: Prof. Tandon
- शॉर्ट टर्म कोर्स के समापन सत्र में विशेषज्ञों ने तकनीक के संतुलित उपयोग पर की चर्चा
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि, एआई ने समूचे मानव जीवन को प्रभावित किया है। इसका बढ़ता प्रभाव शिक्षा जगत पर भी दिखने लगा है। ऐसे में इस बदलाव को गंभीरता से लेने की जरूरत है। इसके साथ ही एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच शिक्षक की भूमिका और जिम्मेदारी को नए सिरे से परिभाषित करने की जरूरत है।
प्रो. टंडन सोमवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मदन मोहन मालवीय टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर और मनोविज्ञान विभाग की ओर से आयोजित सात दिवसीय शॉर्ट टर्म प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित कर रहीं थीं। ''''उच्च शिक्षा में एआई का उपयोग : मुद्दे, चुनौतियां और संभावनाएं'''' विषय पर आयोजित सत्र में उन्होंने शिक्षकों को चेताया कि हमें किसी भी तकनीक का दास नहीं बनना चाहिए, क्योंकि यह स्थिति स्वतंत्र चिंतन को प्रभावित करती है। उन्होंने नैतिक, संयमित और उद्देश्यपूर्ण तकनीकी उपयोग पर विशेष बल दिया। कुमाऊं विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. आराधना शुक्ला ने कहा कि आज के दौर में शोध और उच्च शिक्षा एआई के बिना अकल्पनीय है लेकिन इसका अनियंत्रित उपयोग शिक्षक–छात्र संबंधों को यांत्रिक और संवेदनहीन बना सकता है। उन्होंने डेटा प्राइवेसी, एआई आधारित व्यक्तिगत शिक्षण और नैतिक नीतियों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय कुमार ने उच्च शिक्षा में एआई के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डाला।
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कार्यक्रम संयोजक प्रो. अनुभूति दुबे ने बताया कि इस प्रशिक्षण में 10 से अधिक राज्यों के 120 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और 18 विशेषज्ञों द्वारा 22 व्याख्यान आयोजित किए गए। प्रो. चंद्रशेखर ने एआई को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का प्रभावी सहायक उपकरण बताया। कार्यक्रम का संचालन गरिमा यादव और आभार ज्ञापन डा. नीतू अग्रवाल व डॉ. मनोज द्विवेदी ने किया।
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