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Gorakhpur News: रील पर लाइक और व्यूज की चाह ने ले ली चार जिंदगियां

Sat, 04 Apr 2026 02:34 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 04 Apr 2026 02:34 AM IST
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The four teenagers had gone to Mirzapur in the Khorabar area to make reels.
गोरखपुर। रील पर लाइक और व्यूज की चाहत ने खोराबार इलाके में चार किशोरों की जिंदगी छीन ली। चारों किशोर मिर्जापुर में राप्ती नदी में नहाने गए थे। पीपा पुल से कूदने के बाद वह नदी के तेज बहाव में बह गए।
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दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यूज, लाइक और कमेंट के लिए आजकल युवा और किशोर सारी हदें पार कर दे रहे हैं। वायरल होने के लिए कोई नदी में छलांग लगा दे रहा तो कोई सड़क पर ही डांस करते हुए हादसे का जोखिम उठा रहा है। रील के लिए लड़कियां भी सुनसान स्थानों का रुख करके अपनी सुरक्षा खतरे में डाल रही हैं। इस तरह के दुस्साहस से पूरा परिवार तबाह हो रहा है।
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केस एक
जून 2025 में गीडा थाना क्षेत्र के पिपरौली बाजार निवासी राज वर्मा (17) का शव राप्ती नदी में घटनास्थल से चार किलोमीटर दूर मिला था। वह कालेसर जीरो पॉइंट के पास राप्ती नदी के घाट पर नहाने का रील बनाते समय डूब गया था। एसडीआरएफ ने रेस्क्यू अभियान चलाकर बरहुआ गांव के किनारे से शव बरामद किया था।
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केस दो
मार्च 2025 में बेलीपार थाना क्षेत्र के क्योनरा गांव के रहने वाले चार दोस्त शिवम, गोलू, सनी और अंकुश बलुई गाड़ा राप्ती तट के किनारे घूमने गए थे। इस दौरान गोलू यादव (17) और अंकुश विश्वकर्मा (19) नदी किनारे पहुंचे और पानी में उतरकर नहाने लगे। वहीं, सनी और शिवम पास ही स्थित पीपा पुल पर जाकर रील बनाने में मशगूल हो गए। इसी बीच नहाने गए दोनों दोस्त पानी में डूबने लगे थे। शोर सुनकर जब तक शिवम और शनि उन्हें बचाने पहुंचते तब तक दोनों गहरे पानी में जा चुके थे और धीरे-धीरे आंखों से ओझल हो गए।


सोशल आइसोलेशन को मिल रहा बढ़ावा
समाजशास्त्री डॉ. मनीष पांडेय कहते हैं कि रील्स बनाने व देखने की लत अब एक बड़ी सामाजिक समस्या के रूप में सामने आ रही है। हालांकि, रील्स और शॉर्ट्स आज की प्रमुख तकनीकी सांस्कृतिक धाराएं हैं, जिनका बहिष्कार नहीं किया जा सकता। इसका अत्यधिक उपयोग हमारे मानसिक, सामाजिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। लोग दूसरों की ट्रेंड हुई रील से अपनी वास्तविकता की तुलना करते हैं, जिससे असंतोष, हीनभावना और अवास्तविक अपेक्षाएं उत्पन्न होती हैं। यह सामाजिक सहनशीलता को कम करके सोशल आइसोलेशन को बढ़ा रही है। यह समस्या वर्चुअल दुनिया की एक सामाजिक संरचनात्मक चुनौती है, जिसका समाधान बहुस्तरीय सहभागिता से ही संभव है।



बेरोजगारी की वजह से बढ़ रहा रील का चलन
मनोवैज्ञानिक डॉ. आकृति पांडेय ने बताया कि आजकल के युवा कम समय में ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में सोशल मीडिया के माध्यम से आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि पढ़ाई में लंबा समय लग जाता है और मनचाही नौकरी नहीं मिलती। कुछ लोगों को सफल देख उनके अंदर भी यह भावना आती है कि रील से दौलत और शोहरत दोनों आसानी से मिल जाती है। उन्हें लगता है कि रील में अलग-अलग तरीके के वीडियो बनाकर वो जल्दी आगे बढ़ सकते हैं। इस वजह से वह कई ऐसी घटनाओं का अंजाम देते हैं।
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