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आपात काल दिवस: इमरजेंसी में साधु बन गए थे बिहार के पूर्व सीएम, महंत अवेद्यनाथ ने बचाई थी कर्पूरी ठाकुर की जान

Thu, 25 Jun 2026 02:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Thu, 25 Jun 2026 02:16 AM IST
सार

सहजनवां के पूर्व विधायक शीतल पांडेय इमरजेंसी के दौरान 18 महीना जेल में रहे। वह बताते हैं कि वह उस समय लॉ के विद्यार्थी थे। इमरजेंसी के विरोध में वह पर्चा बांट रहे थे। कचहरी में पर्चा बांटते समय उनको गिरफ्तार कर लिया गया था। उन पर रेल लाइन उखाड़ने का आरोप लगा था। जिस समय उनकी गिरफ्तारी हुई, उनके साथ पूर्व विधायक स्व. रविंद्र सिंह, विश्वकर्मा द्विवेदी समेत कई लोग थे।

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former Chief Minister of Bihar Karpoori Thakur had arrived to meet Mahant Avaidyanath
पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी के 1971 के चुनाव को अवैध घोषित कर दिया तो विपक्ष ने उनको सत्ता से हटाने के लिए आंदोलन खड़ा कर दिया। नाराज इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को देश में इमरजेंसी लगा दी। विपक्ष के नेताओं की धड़ाधड़ गिरफ्तारी होने लगी।

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गिरफ्तारी से बचने के लिए बिहार के पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर गोरखपुर आए और गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ से मिले। इसके बाद उन्होंने साधु का वेश धारण कर लिया। सरदार देवेंद्र सिंह ने उन्हें नेपाल भिजवा दिया।शहर के प्रमुख व्यवसायी व राष्ट्रीय लोक दल के नेता सरदार देवेंद्र सिंह ने बताया कि बिहार के पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर बिहार से गोरखपुर आए थे।

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उस समय वह गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर करूणेश शुक्ला के यहां रुके थे। करूणेश के भाई जार्ज फर्नाडिस के साथ रहते थे, वह भी समाजवादी टीम का हिस्सा थे, इस नाते सभी उन्हें भी जानते थे। उनके आने की सूचना उन्हें दी गई। वह कर्पूरी ठाकुर से मिले और उनको अपने साथ लाए।

वहीं गोरखपुर विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष राधेश्याम सिंह ने बताया कि उस समय वे लोग इमरजेंसी के खिलाफ अभियान चलाए थे। उस दौरान उन लोगों का गोरक्षनाथ मंदिर आना-जाना होता था। कर्पूरी ठाकुर जब महंत अवेद्यनाथ से मिले, तो वह भगवा धारण किए साधु लग रहे थे।

गोरक्षपीठाधीश्वर ने उनकी आर्थिक मदद की और नेपाल में किसी के पास पत्र लिखा। कहा कि यहां भी सीआईडी लगी है, इस नाते यहां रुकना ठीक नही है। कहा जाता है कि उस समय जेपी नेपाल की राजधानी काठमांडू में रुके थे। कर्पूरी ठाकुर उनसे मिलने जा रहे थे। सरदार देवेंद्र सिंह ने अपनी गाड़ी से कुछ दूर ले जाकर छोड़ा। फिर अपने रिश्तेदार की ट्रक जो नेपाल जाती थी, उससे उन्हें नेपाल भेज दिया।

रेलवे लाइन उखाड़ने के आरोप में गए थे जेल
सहजनवां के पूर्व विधायक शीतल पांडेय इमरजेंसी के दौरान 18 महीना जेल में रहे। वह बताते हैं कि वह उस समय लॉ के विद्यार्थी थे। इमरजेंसी के विरोध में वह पर्चा बांट रहे थे। कचहरी में पर्चा बांटते समय उनको गिरफ्तार कर लिया गया था। उन पर रेल लाइन उखाड़ने का आरोप लगा था। जिस समय उनकी गिरफ्तारी हुई, उनके साथ पूर्व विधायक स्व. रविंद्र सिंह, विश्वकर्मा द्विवेदी समेत कई लोग थे।
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कांग्रेस दफ्तर को बम से उड़ाने का आरोप लगा जेल में डाला
गोरखपुर विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष राम सिंह भी इमरजेंसी में जेल गए थे। वह बताते हैं कि उनकी गिरफ्तारी 16 जुलाई 1975 को हुई थी। वह 13 महीने जेल में रहे। उनको आंबेडकर चौक से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोप लगा कि वह कांग्रेस का दफ्तर बम से उड़ाने जा रहे थे।

सरकार के खिलाफ बोलने पर तत्कालीन विधायक हुए थे गिरफ्तार
इमरजेंसी के खिलाफ आवाज उठाने पर तत्कालीन विधायक अवधेश प्रसाद श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। अवधेश प्रसाद श्रीवास्तव विधायक के साथ पेशे से अधिवक्ता थे। उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने सरकार के खिलाफ अभियान चलाया है। सात महीने की जेल के बाद वह रिहा हो गए थे।
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