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Gorakhpur News: पिता ने बेटे-बहू को दी मुखाग्नि, एक साथ जलीं दो चिताएं तो फफक पड़े छन्नू लाल

Tue, 29 Sep 2026 02:57 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2026 02:57 AM IST
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The father performed the last rites for his son and daughter-in-law; Chhannu Lal broke down in sobs as the two funeral pyres burned side by side.
गोरखपुर। पीपीगंज बाईपास स्थित वन विभाग चौकी के सामने डंपर की चपेट में आने से मखनहा टोला रबेलिया निवासी राजकुमार यादव उर्फ राजू (40) और उनकी पत्नी रंभा देवी की सोमवार शाम मछरिहा घाट पर दाह संस्कार किया गया। घाट पर दो चिताएं सजी थीं। राजकुमार के पिता छन्नू लाल यादव के आंखों में आंसू थे। उनके सामने एक चिता बेटे राजू की थी तो दूसरी बहू रंभा की। सामने खड़े बुजुर्ग पिता के दिल में ऐसा दर्द जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल था। जिस बेटे को जीवन भर मेहनत करते और परिवार की जिम्मेदारी उठाते देखा, उसी बेटे और बहू को एक साथ मुखाग्नि देने की घड़ी आ गई। कांपते हाथों से जब उन्होंने दोनों को मुखाग्नि दी तो घाट पर मौजूद लोगों की आंखें छलक उठीं। एक साथ जलती दो चिताओं को देखकर परिजन फफक पड़े। इस दुख की सबसे बड़ी टीस परिवार के तीन मासूम बच्चों के भविष्य को लेकर है। राजू और रंभा के जाने के बाद आदर्श (10), आस्था (8) और रिया (5) के सिर से मां-बाप का साया उठ गया। आदर्श कक्षा चार में पढ़ता है, जबकि आस्था कक्षा तीन की छात्रा है। पांच साल की रिया अभी इतनी छोटी है कि शायद वह हमेशा के लिए बदल गए अपने घर के मायने भी पूरी तरह नहीं समझ पा रही होगी। लेकिन जिन हाथों ने उसे संभाला, जिन चेहरों को देखकर वह बड़ी हो रही थी, वे अब कभी लौटकर नहीं आएंगे।
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परिवार का सहारा थे राजू
राजू परिवार में अकेले कमाने वाले थे। मेहनत कर वह पत्नी और बच्चों की जरूरतें पूरी करते थे। उनकी मौत के बाद परिवार की आर्थिक मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। पिता छन्नू लाल किसान हैं। घर में राजू के छोटे भाई राजेश (25) और बृजेश (22) हैं। राजेश खेती करते हैं, जबकि बृजेश अभी पढ़ाई कर रहे हैं। सीमित साधनों वाले परिवार के सामने अब तीन बच्चों की परवरिश और उनकी पढ़ाई जारी रखने की जिम्मेदारी है।
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जिस घर में बच्चों की आवाज गूंजती थी, वहां पसरा सन्नाटा
सोमवार शाम शव गांव पहुंचने के बाद माहौल गमगीन हो गया। जिस घर में बच्चों की आवाज और परिवार की चहल-पहल रहती थी, वहां अचानक सन्नाटा पसर गया। रिश्तेदारों और ग्रामीणों की भीड़ जुटी रही लेकिन किसी के पास बच्चों के सवालों और परिवार के दर्द का जवाब नहीं था। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था। ग्रामीणों का कहना है कि राजू परिवार की रीढ़ था। उसके जाने से परिवार को भावनात्मक नुकसान के साथ आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और बच्चों की पढ़ाई व भविष्य के लिए मदद की मांग की है।
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डंपर चालक की तलाश में जुटी पुलिस
उधर, दंपती को रौंदकर फरार हुए डंपर चालक का 24 घंटे बाद भी सुराग नहीं लग सका है। पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर तलाश कर रही हैं। हाईवे और आसपास लगे सीसी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस उन रास्तों की भी जानकारी जुटा रही है जिनसे हादसे के बाद डंपर के भागने की आशंका है। आसपास के थाना क्षेत्रों से भी संदिग्ध डंपरों की जानकारी ली जा रही है। पुलिस का कहना है कि वाहन की पहचान के बाद चालक तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।
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