फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   The Dhammapada and Jataka tales hold a significant place in Buddhist literature.

Gorakhpur News: बौद्ध साहित्य में धम्मपद और जातक कथाओं का महत्वपूर्ण स्थान

Mon, 22 Jun 2026 02:27 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jun 2026 02:27 AM IST
विज्ञापन
The Dhammapada and Jataka tales hold a significant place in Buddhist literature.
गोरखपुर। पाली साहित्य के विद्वान रामसुधार सिंह ने पाली में जातक कथाओं को सुनाते हुए कहा कि बौद्ध साहित्य में धम्मपद और जातक कथाओं का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। धम्मपद बुद्ध वचन हैं तो जातक बुद्ध द्वारा कही गईं कथाएं हैं।
विज्ञापन

वह राजकीय बौद्ध संग्रहालय में प्रेमचंद साहित्य संस्थान, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान और राजकीय बौद्ध संग्रहालय की ओर से आयोजित कविता पाठ और परिचर्चा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। परिचर्चा की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कथाकार प्रो. रामदेव शुक्ल ने कहा कि भारतीयता का निर्माण अद्भुत मिश्रण से होता है। बिना संवाद के कोई संस्कृति आगे नहीं बढ़ सकती। प्रेमचंद साहित्य संस्थान के निदेशक प्रो. सदानंद शाही ने कहा, जातक कथाओं का विश्व कथा साहित्य के विकास में भी बड़ा योगदान है। दलित और आदिवासी संगठनों के राष्ट्रीय परिसंघ के अध्यक्ष अशोक भारती ने कहा, जातक कथाएं समाज में ज्ञान की खोज की धाराएं हैं। गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार राय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में सिर्फ संस्कृत के ज्ञान ग्रंथों की ही बात की जा रही है जबकि संस्कृत के अलावा प्राकृत, पाली सहित तमाम भाषाओं की ज्ञान परंपरा को अनदेखा किया जा रहा है। वरिष्ठ आलोचक डॉ. रघुवंश मणि ने कहा कि जातक कथाएं नीति शिक्षा की ओर ले जाती हैं। विद्याश्री न्यास के सचिव दयानिधि मिश्र ने सहमति जताई कि भारतीय ज्ञान बहुलतावादी है। प्रो. रामदेव शुक्ल को विद्याश्री न्यास द्वारा भोजपुरी वैभव सम्मान से सम्मानित किया गया। जातक कथाओं के प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिए गए।
विज्ञापन

कविता पाठ सत्र में कवि अष्टभुजा शुक्ल, देवेंद्र आर्य, प्रकाश उदय, स्वप्निल श्रीवास्तव, डॉ. रंजना जायसवाल, अर्पण कुमार, विशाल श्रीवास्तव, ज्योति रीता, केतन यादव, शिवांगी गोयल ने कविता पाठ किया। सत्र का संचालन युवा कवि केतन यादव ने किया। राजकीय बौद्ध संग्रहालय के उपनिदेशक यशवंत सिंह राठौड़ ने स्वागत वक्तव्य दिया। संचालन भानु प्रताप सिंह ने किया। गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. चितरंजन मिश्र, प्रो. अरविंद त्रिपाठी, आलोचक कपिल देव, पूर्व सूचना आयुक्त हर्षवर्धन शाही आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed