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Gorakhpur News: बूंदाबांदी के बाद चली हवा तो सुधर गई शहर की वायु गुणवत्ता
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- शनिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 90 पहुंचा, दिवाली के बाद से खराब हो गई थी शहर की हवा
- दिवाली के बाद पहली बार एक्यूआई 100 के नीचे हुआ दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। बूंदाबांदी के बाद चली हवा ने शहर की हवा की गुणवत्ता में सुधार ला दिया है। दिवाली के बाद शनिवार को शहर की हवा में सुधार देखने को मिला। दिवाली के बाद पहली बार वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 100 के नीचे दर्ज किया गया। शनिवार को एक्यूआई 90 दर्ज किया गया, जो ‘संतोषजनक’ श्रेणी में आता है।
दिवाली के दिन 12 नवंबर को वायु गुणवत्ता सूचकांक दिन में 62 दर्ज किया गया। हालांकि रात में जमकर पटाखा फोड़ने से बारूद के धुएं ने शहर की हवा को खराब कर दिया था। दिवाली के दूसरे दिन एक्यूआई 300 दर्ज किया गया था। इसके बाद धीरे-धीरे हवा की गुणवत्ता में सुधार होने लगा, लेकिन वायु गुणवत्ता का स्तर 150 से ऊपर बना रहा। इस दौरान एक-दो दिन ही वायु गुणवत्ता सूचकांक 150 से नीचे दर्ज किया गया।
30 नवंबर को वायु गुणवत्ता का स्तर 161 दर्ज किया गया। 30 को सुबह से ही कोहरा व धुंध छाने के साथ बूंदाबांदी होती रही। इसके बाद दो दिन में हवा की गति बढ़ने के चलते वायु गुणवत्ता के स्तर में सुधार आने लगा। एक दिसंबर यानि शुक्रवार को आसमान साफ होने से सूरज की किरणें तीखी रहीं। हालांकि शुक्रवार को वायु गुणवत्ता का स्तर 151 दर्ज किया गया। शनिवार को जब हवा की गति थोड़ी और बढ़ी तो वायु गुणवत्ता के स्तर में और सुधार देखने को मिला। शनिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 90 दर्ज किया गया।
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कम उड़ी धूल तो बेहतर हुई हवा
शहर में हो रहे निर्माण कार्य को ढक कर कराने और बूंदाबांदी से धूल कम उड़ने से शहर की हवा के सुधार में कारण बना है। ट्रांसपोर्टनगर से पैडलेगंज तक हो रहे सिक्सलेन के निर्माण कार्य के दौरान लिंक रोड पर पिचिंग और पानी के छिड़काव से धूल नहीं उड़ रही है। इसके अलावा अन्य निर्माण स्थल पर आवश्यक कदम उठाने धूल के कण कम उड़ रहे है। उधर, दो दिन से सहालग कम होने से गाड़ियों के कम इस्तेमाल को भी हवा की गुणवत्ता में सुधार को कारण माना जा रहा है।
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बूंदाबांदी ने वातावरण में जमी परत नीचे आने से आया सुधार : प्रो. अनिल द्विवेदी
फोटो
आमतौर पर सर्दियों में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। दिवाली में पटाखा जलाने से बारूद का धुआं एवं अन्य प्रदूषक तत्वों की वजह से वायुमंडल में एक परत बन गई थी। बूंदाबांदी के चलते वायुमंडल में जमे ये कण नीचे आ गए। इससे वायुमंडल में जमी परत हटने से आसमान भी साफ हुआ है। इन सभी कारणों से वायु गुणवत्ता में इधर सुधार आया है।
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- दिवाली के बाद पहली बार एक्यूआई 100 के नीचे हुआ दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। बूंदाबांदी के बाद चली हवा ने शहर की हवा की गुणवत्ता में सुधार ला दिया है। दिवाली के बाद शनिवार को शहर की हवा में सुधार देखने को मिला। दिवाली के बाद पहली बार वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 100 के नीचे दर्ज किया गया। शनिवार को एक्यूआई 90 दर्ज किया गया, जो ‘संतोषजनक’ श्रेणी में आता है।
दिवाली के दिन 12 नवंबर को वायु गुणवत्ता सूचकांक दिन में 62 दर्ज किया गया। हालांकि रात में जमकर पटाखा फोड़ने से बारूद के धुएं ने शहर की हवा को खराब कर दिया था। दिवाली के दूसरे दिन एक्यूआई 300 दर्ज किया गया था। इसके बाद धीरे-धीरे हवा की गुणवत्ता में सुधार होने लगा, लेकिन वायु गुणवत्ता का स्तर 150 से ऊपर बना रहा। इस दौरान एक-दो दिन ही वायु गुणवत्ता सूचकांक 150 से नीचे दर्ज किया गया।
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30 नवंबर को वायु गुणवत्ता का स्तर 161 दर्ज किया गया। 30 को सुबह से ही कोहरा व धुंध छाने के साथ बूंदाबांदी होती रही। इसके बाद दो दिन में हवा की गति बढ़ने के चलते वायु गुणवत्ता के स्तर में सुधार आने लगा। एक दिसंबर यानि शुक्रवार को आसमान साफ होने से सूरज की किरणें तीखी रहीं। हालांकि शुक्रवार को वायु गुणवत्ता का स्तर 151 दर्ज किया गया। शनिवार को जब हवा की गति थोड़ी और बढ़ी तो वायु गुणवत्ता के स्तर में और सुधार देखने को मिला। शनिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 90 दर्ज किया गया।
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कम उड़ी धूल तो बेहतर हुई हवा
शहर में हो रहे निर्माण कार्य को ढक कर कराने और बूंदाबांदी से धूल कम उड़ने से शहर की हवा के सुधार में कारण बना है। ट्रांसपोर्टनगर से पैडलेगंज तक हो रहे सिक्सलेन के निर्माण कार्य के दौरान लिंक रोड पर पिचिंग और पानी के छिड़काव से धूल नहीं उड़ रही है। इसके अलावा अन्य निर्माण स्थल पर आवश्यक कदम उठाने धूल के कण कम उड़ रहे है। उधर, दो दिन से सहालग कम होने से गाड़ियों के कम इस्तेमाल को भी हवा की गुणवत्ता में सुधार को कारण माना जा रहा है।
बूंदाबांदी ने वातावरण में जमी परत नीचे आने से आया सुधार : प्रो. अनिल द्विवेदी
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आमतौर पर सर्दियों में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। दिवाली में पटाखा जलाने से बारूद का धुआं एवं अन्य प्रदूषक तत्वों की वजह से वायुमंडल में एक परत बन गई थी। बूंदाबांदी के चलते वायुमंडल में जमे ये कण नीचे आ गए। इससे वायुमंडल में जमी परत हटने से आसमान भी साफ हुआ है। इन सभी कारणों से वायु गुणवत्ता में इधर सुधार आया है।