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Gorakhpur News: म्यूल खातों से फर्जी QR बॉक्स बनाकर साइबर फ्रॉड, तीन गिरफ्तार, 1308 बॉक्स बरामद

Thu, 11 Jun 2026 02:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Thu, 11 Jun 2026 02:22 AM IST
सार

पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह का संचालन बिहार से हो रहा है। गोरखपुर में मौजूद गुर्गे स्थानीय स्तर पर बैंक खाते, क्यूआर कोड और नकदी निकासी की व्यवस्था संभालते थे। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज, एटीएम कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल की टीम भी डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है।

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The accused were creating fake QR boxes by converting them into merchant accounts.
एसपी सिटी निमिष पटेल ने खुलासा करते हुए जानकारी साझा की - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

कोतवाली पुलिस ने साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल हो रहे म्यूल खातों को मर्चेंट अकाउंट में बदलकर फर्जी क्यूआर बॉक्स तैयार करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के तीन गुर्गों को गिरफ्तार कर उनके पास से भारी मात्रा में क्यूआर बॉक्स, स्कैनर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।

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आरोपियों को बुधवार दोपहर बाद कोर्ट में पेश किया गया। वहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों में कुशीनगर के तमकुहीराज बसडिला गुनाकर निवासी संकेत राय, गोरखनाथ इलाके के शहीद अब्दुल्ला नगर निवासी तौहीद आलम और शाहपुर के आवास विकास कॉलोनी निवासी राज सिंह शामिल हैं।

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एसपी सिटी निमिष पाटील और सीओ कोतवाली ओंकार दत्त तिवारी ने संयुक्त प्रेसवार्ता में बताया कि यह गिरोह साइबर ठगी के पैसों को खपाने के लिए मर्चेंट क्यूआर कोड तैयार करता था। इन क्यूआर कोड के जरिये फर्जी लेन-देन को वैध दिखाने की कोशिश की जाती थी।

पुलिस जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी संकेत राय पहले एक पेमेंट कंपनी में काम करता था। वहां उसे क्यूआर कोड बॉक्स बिक्री पर कमीशन मिलता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात रेलवे स्टेशन पर एक युवक से हुई, जिसने उसे क्यूआर बॉक्स बनाने का तरीका सुझाया।

इसके बाद आरोपी ने अपने साथी की मदद से एपीके फाइल हासिल की, जिसकी सहायता से फर्जी तरीके से आधार और पैन कार्ड डाटा तैयार किया जाने लगा। इसी डेटा के आधार पर म्यूल खातों को मर्चेंट अकाउंट में बदलकर क्यूआर कोड तैयार किए जाते थे।

पुलिस के अनुसार, ये क्यूआर कोड साइबर ठगों को बेचे जाते थे जो इनके माध्यम से ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर देते थे। बदले में गिरोह को प्रति क्यूआर बॉक्स 2500 रुपये तक कमीशन मिलता था। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने 40 गत्तों में रखे 1308 क्यूआर बॉक्स, 866 स्कैनर, 13 मोबाइल फोन और पांच सिम कार्ड बरामद किए हैं।
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एसपी सिटी ने बताया कि गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और साइबर नेटवर्क के जरिये कई राज्यों में ठगी के पैसों को चैनलाइज किया जा रहा था। फिलहाल पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।

The accused were creating fake QR boxes by converting them into merchant accounts.
कोतवाली में तीनों आरोपी गिरफ्तार किए गए - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बिहार से हो रहा है गिरोह का संचालन
पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह का संचालन बिहार से हो रहा है। गोरखपुर में मौजूद गुर्गे स्थानीय स्तर पर बैंक खाते, क्यूआर कोड और नकदी निकासी की व्यवस्था संभालते थे। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज, एटीएम कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल की टीम भी डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है।

डिजिटल अरेस्ट से जुड़ीं वारदातों के भी मिले संकेत
पुलिस को शुरुआती जांच में डिजिटल अरेस्ट से जुड़ीं वारदातों के संकेत भी मिले हैं। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि बिहार में बैठे गिरोह के सरगना तक पहुंचने के बाद पूरे नेटवर्क और उसकी कार्यप्रणाली का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
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