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Gorakhpur News: करोड़ाें की ठगी के आरोपियों ने पीड़ित को दिखाए थे प्रधानमंत्री कार्यालय के फर्जी पत्र
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गोरखपुर। नासा में निवेश के जरिये ठगी के आरोपी सुकांता बनर्जी और उसके सहयोगी अमित कुमार नंदी पीड़ितों को जाल में फंसाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय के स्वीकृति पत्र भी दिखाते थे। इसके जरिये बताते थे कि नासा से उनका व्यापारिक संबंध है। इसी झांसे में आए व्यापारी सतीश चंद्र धर दुबे ने भी 60 लाख रुपये दे दिए थे।
व्यापारी सतीश दुबे ने बताया कि उनकी पहचान अमित नंदी से काफी पुरानी थी। वर्ष 2000 में उन्होंने नंदी परिवार की झारखंडी स्थित जमीन पर नमकीन का कारखाना किराए पर शुरू किया था। भूमि विवाद और धमकियों के चलते वर्ष 2005 में उन्हें काम बंद करना पड़ा। इसके बाद अमित नंदी ने कोर्ट केस की पैरवी का खर्च उठाने का वादा किया। धीरे-धीरे नंदी ने उन्हें यह कहकर झांसा दिया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश हटते ही जमीन बेचकर मुनाफा देंगे। इसके बाद निवेश का झांसा देकर सतीश दुबे से करीब 60 लाख रुपये एडवांस जमा करा लिए। बाद में नंदी मुकर गया और उल्टे 2017 में सतीश पर ही केस दर्ज करा दिया।
लखनऊ से चला ठगी का नेटवर्क
वर्ष 2007 में नंदी ने सतीश दुबे की मुलाकात कोलकाता निवासी सुकांता बनर्जी से कराई, जिसने खुद को एजिस फिनकैप कंसल्टेंट्स लिमिटेड का प्रबंध निदेशक बताया। दोनों ने नासा में रेडियोधर्मी धातु व्यापार और निवेश का झांसा दिया। उनका कैंप ऑफिस लखनऊ के चारबाग स्थित होटल विश्वनाथ में चलता था। सतीश दुबे को 75 करोड़, 300 करोड़ और 250 करोड़ रुपये के एक्सिस बैंक से जारी भुगतान के फर्जी पत्र दिखाए गए। यही नहीं, प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय और गृह मंत्रालय के नाम से फर्जी पत्र सतीश दुबे के नाम पर भेजे गए, जिनमें भुगतान स्वीकृति का दावा किया गया था। जब सतीश दुबे ने रकम वापसी की मांग की तो आरोपियों ने बहाना बनाया कि विश्व बैंक की रोक और अंतरराष्ट्रीय भुगतान जटिलताएं हैं। 2016 में सुकांता ने गृह सचिव राजीव महर्षि के नाम से सुरक्षा पत्र तक दिखाया। बाद में यह सभी दस्तावेज फर्जी साबित हुए।
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व्हाट्सएप चैट और धमकी के सबूत
सतीश दुबे के पास सुकांता और अमित नंदी के साथ 300 से अधिक व्हाट्सएप संदेश और सैकड़ों ऑडियो क्लिप हैं, जिनमें आरोपी रकम लौटाने का भरोसा दे रहे हैं। बीते दो वर्षों में जब सतीश दुबे ने रकम की मांग बढ़ाई तो सुकांता ने जान से मारने की धमकी देना शुरू कर दिया।
शालिनी के खाते में यूपीआई से रकम लेता था सुकांता
पीड़ित ने बताया कि सुकांता अपनी कथित पत्नी शालिनी नासकर के यूपीआई खाते के माध्यम से रुपये लेता था। शालिनी की पहचान कोलकाता निवासी महिला के रूप में हुई है। आरोप है कि इसी खाते में गोरखपुर और नेपाल के कई निवेशकों ने लाखों रुपये ट्रांसफर किए हैं। सतीश दुबे ने पुलिस से सुकांता की देशविरोधी तत्वों से संभावित संलिप्तता की जांच की मांग की है। रामगढ़ताल पुलिस ने केस दर्ज जांच कर रही है।
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व्यापारी सतीश दुबे ने बताया कि उनकी पहचान अमित नंदी से काफी पुरानी थी। वर्ष 2000 में उन्होंने नंदी परिवार की झारखंडी स्थित जमीन पर नमकीन का कारखाना किराए पर शुरू किया था। भूमि विवाद और धमकियों के चलते वर्ष 2005 में उन्हें काम बंद करना पड़ा। इसके बाद अमित नंदी ने कोर्ट केस की पैरवी का खर्च उठाने का वादा किया। धीरे-धीरे नंदी ने उन्हें यह कहकर झांसा दिया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश हटते ही जमीन बेचकर मुनाफा देंगे। इसके बाद निवेश का झांसा देकर सतीश दुबे से करीब 60 लाख रुपये एडवांस जमा करा लिए। बाद में नंदी मुकर गया और उल्टे 2017 में सतीश पर ही केस दर्ज करा दिया।
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लखनऊ से चला ठगी का नेटवर्क
वर्ष 2007 में नंदी ने सतीश दुबे की मुलाकात कोलकाता निवासी सुकांता बनर्जी से कराई, जिसने खुद को एजिस फिनकैप कंसल्टेंट्स लिमिटेड का प्रबंध निदेशक बताया। दोनों ने नासा में रेडियोधर्मी धातु व्यापार और निवेश का झांसा दिया। उनका कैंप ऑफिस लखनऊ के चारबाग स्थित होटल विश्वनाथ में चलता था। सतीश दुबे को 75 करोड़, 300 करोड़ और 250 करोड़ रुपये के एक्सिस बैंक से जारी भुगतान के फर्जी पत्र दिखाए गए। यही नहीं, प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय और गृह मंत्रालय के नाम से फर्जी पत्र सतीश दुबे के नाम पर भेजे गए, जिनमें भुगतान स्वीकृति का दावा किया गया था। जब सतीश दुबे ने रकम वापसी की मांग की तो आरोपियों ने बहाना बनाया कि विश्व बैंक की रोक और अंतरराष्ट्रीय भुगतान जटिलताएं हैं। 2016 में सुकांता ने गृह सचिव राजीव महर्षि के नाम से सुरक्षा पत्र तक दिखाया। बाद में यह सभी दस्तावेज फर्जी साबित हुए।
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व्हाट्सएप चैट और धमकी के सबूत
सतीश दुबे के पास सुकांता और अमित नंदी के साथ 300 से अधिक व्हाट्सएप संदेश और सैकड़ों ऑडियो क्लिप हैं, जिनमें आरोपी रकम लौटाने का भरोसा दे रहे हैं। बीते दो वर्षों में जब सतीश दुबे ने रकम की मांग बढ़ाई तो सुकांता ने जान से मारने की धमकी देना शुरू कर दिया।
शालिनी के खाते में यूपीआई से रकम लेता था सुकांता
पीड़ित ने बताया कि सुकांता अपनी कथित पत्नी शालिनी नासकर के यूपीआई खाते के माध्यम से रुपये लेता था। शालिनी की पहचान कोलकाता निवासी महिला के रूप में हुई है। आरोप है कि इसी खाते में गोरखपुर और नेपाल के कई निवेशकों ने लाखों रुपये ट्रांसफर किए हैं। सतीश दुबे ने पुलिस से सुकांता की देशविरोधी तत्वों से संभावित संलिप्तता की जांच की मांग की है। रामगढ़ताल पुलिस ने केस दर्ज जांच कर रही है।