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Gorakhpur News: दम तोड़ चुकी मशीन से कर रहे हैं जांच, हर 15 दिन में होती है खराब

Fri, 20 Sep 2024 11:28 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 20 Sep 2024 11:28 PM IST
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Testing is being done with a dead machine, it breaks down every 15 days.
मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी में खराब मशीन की मरम्मत करते इंजीनियर। संवाद
- पांच साल चलने की समय सीमा, जबकि उपयोग से हर माह में दो मशीन होती है खराब
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-मेडिकल कॉलेज में खराब हुई खून जांच करने वाली मशीन, पूरे दिन भटके मरीज
- ओपीडी सैंपल का समय खत्म होने के बाद सही हो पाई मशीन, जांच के लिए मरीजों ने बाहर खाली की जेब
-50 सैंपल की एक बार में जांच की है क्षमता, 100 सैंपल की मशीन आए तो बढ़ेगी सुविधा, पैथालाजी में प्रतिदिन होती है लगभग चार सौ जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा है। यहां निशुल्क इलाज और जांच का दावा बेदम साबित हो रहा है। इलाज के लिए दूर-दराज से आने वाले मरीज कभी डॉक्टर को दिखाने पर जांच नहीं हो पाती। तो कभी एक्स-रे सिटी स्कैन मशीन खराब हो जाती है। इसलिए मरीजों को निजी जांच केंद्रों पर जेब ढीली करना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज में ब्लड जांच के लिए लगी मशीन बृहस्पतिवार शाम को खराब हो गई। शुक्रवार को जांच सेवा की हकीकत जानने पहुंचे तो मरीज परेशान दिखे। लैब के पास लंबी कतार लगी हुई थी। एक ही मशीन के चालू होने के कारण अधिकांश लोगों को दूसरे दिन आने के लिए कहा जा रहा था। कई मरीजों ने तो किराया खर्च करके दोबारा न आना पड़े, इसलिए निजी केंद्र की ओर रुख कर लिया, जहां उन्हें एक हजार से 500 रुपये तक ब्लड जांच के लिए देने पड़े।
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स्वास्थ्य विभाग के जानकारों से बात की गई तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। बताया गया कि मशीन के कार्य करने की क्षमता पांच साल है। यह मशीन वर्ष 2018 में आई थी। तभी से चल रही है। एक साल में 20-25 बार खराब हो चुकी है। एक बार खराब होने पर कम से कम दो दिन इसे ठीक होने में लग जाते हैं। ऐसे में जांच आधी हो जाती है। इसके बाद भी इसी को खींचकर चलाया जा रहा है।
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मरीजों की तादाद अधिक है और मशीन एक होने से दिक्कत होती है। वहीं, इलाज के लिए आए मरीजों ने जिम्मेदारों पर सवाल उठाया कि सरकार बेहतर जांच और इलाज की बात कर रही है। स्थानीय स्तर पर होने वाली लापरवाही से मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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इंजीनियर को बुलाया गया था। मशीन सही करा दी गई है। कल से सुचारु रूप से जांच होने लगी है। नई मशीन के लिए पत्राचार किया जाएगा।
-डॉ. एके झा, सीएमएस
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पड़ताल में यह बात आई सामने
मेडिकल कॉलेज के लैब के पास लंबी कतार लगी थी। जगह कम होने के कारण इस गर्मी में भी मरीज अपनी बारी के लिए जद्दोजहद कर रहे थे। इसी बीच जब नंबर आ रहा था तो मरीज से कहा जा रहा था कि एक मशीन खराब हो गई है। उसके सही होने में समय लगेगा। रिपोर्ट देर शाम या दूसरे दिन मिलेगी। इतना सुनने के बाद कुछ लोग लाइन में डटे रहे। जबकि, कुछ लोग तत्काल लाइन से बाहर होकर निजी केंद्र की ओर रुख करते हुए देखे गए। उसका बर्डपुर नंबर-11 निवासी सतीश को कई दिनों से बुखार था। उन्होंने बताया कि डॉक्टर ने टायफायड का लक्षण बताते हुए कई जांच लिखी है। अब दूसरे दिन रिपोर्ट मिलने की बात कही जा रही है। निजी केंद्र में जांच करवाएंगे, क्योंकि दिखाना बहुत जरूरी है। वहीं, मेडिकल विभाग में दोपहर तकरीबन एक बजे दिखाने पहुंचे ओमप्रकाश के हाथ में निजी लैब की रिपोर्ट थी। उनसे अस्पताल में जांच क्यों नहीं कराए यह सवाल किया, तो वे बोले कि जांच के लिए कल मिलने के लिए कहा गया। अब मजदूरी करने वाले व्यक्ति हैं, अगर दो दिन आए तो नुकसान होगा। इसलिए बाहर किए 400 रुपये में जांच हो गई।
यह दो मरीजों की बात नहीं थी, कई लोग ऐसे थे जो दूर से आए थे, दूसरे दिन आ पाना उनके लिए मुश्किल था। इसलिए उन्हें विवश होकर बाहर जांच करानी पड़ी। अगर मशीन सही रहती तो शायद उन्हें रुपये नहीं खर्च करने पड़ते।
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दो दिन में 200 मरीजों की नहीं हो पाई जांच
जांच लैब की बात करें तो सोमवार को लगभग 500 मरीजों का सैंपल होता है। जबकि मंगलवार से शुक्रवार तक 350-380 मरीज आते हैं। वहीं, शनिवार को 300 के लगभग मरीज जांच के लिए आते हैं, लेकिन शुक्रवार दोपहर तक 230 सैंपल लिया गया था। इसमें अधिकांश लोगों को यह बता दिया गया था कि रिपोर्ट देर शाम या दूसरे दिन ही मिलेगी। क्योंकि मशीन बनाने का काम चल रहा था। जो दो बजे तक चला। जबकि, ओपीडी दोपहर दो बजे तक बंद हो जाती है। मशीन सही की गई, लेकिन कब तक चलेगी, इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है।
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बोले मरीज
बुखार कई दिन से आ रहा है। दिखाने के लिए सुबह आठ बजे ही पहुंच गई थी। डॉक्टरों के देखते हुए 11 बज गया। डॉक्टर ने जांच लिखी थी। जब लैब में पहुंचे तो बताया गया कि दूसरे दिन रिपोर्ट मिलेगी। रुपये भी नहीं थे कि बाहर जांच करा लें। दूसरे दिन भी आना पड़ेगा।
-अकालमती, निवासी अगया
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कई दिन से बुखार सहित अन्य समस्या से परेशान थे। डॉक्टर को दिखाने आए थे। यहां डॉक्टर ने तो देख लिया। खून जांच लिखी, लैब में सैंपल दे दिए। बताया गया कि शाम को रिपोर्ट मिलेगी। ऐसे में अब शनिवार को भी आना पड़ेगा। खेसरहा से आए हैं, फिर आने में परेशानी होगी।

-मुस्तफा अहमद, खेसरहा
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एक बार में लिया जाता 50 मरीजों का सैंपल
स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार जांच में मशीन से एलएफटी, केएफटी, आरबीसी, सीआरबीसी सहित कई प्रकार की जांच होती है। एक बार में इस मशीन में 50 सैंपल लिए जाते हैं और लगभग दो घंटे में रिपोर्ट मिलती है। जो मशीन बार- बार खराब हो रही है। इसे 2018 में खरीदा गया था, जबकि दूसरी मशीन एक साल पहले आई है, जो सही से काम करती है, लेकिन मरीजों की तादाद बढ़ने के साथ ही मशीन की क्षमता बढ़ाने और बड़ी मशीन लगाने की जरूरत है।
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