अनलॉक-5 आते-आते टेराकोटा उत्पाद कोरोना संकट से बाहर निकल चुका है। लॉकडाउन से लेकर अनलॉक के चौथे चरण तक तैयार टेराकोटा उत्पादों की बिक्री के लिए सशंकित शिल्पकारों के चेहरे पर इस समय खुशियां तैर रही हैं। पिछले पांच-छह महीनों में तैयार किया गया सारा उत्पाद बिक चुका है, जबकि लोकल बाजार के अलावा कई अन्य स्थानों से मांग बनी हुई है। बाजार धीरे-धीरे कोरोना संक्रमण के दौर की मंदी से बाहर निकलने लगा है। ऐसे में टेराकोटा उत्पादों की बिक्री ने भी शिल्पकारों के चेहरे पर रौनक ला दी है। शिल्पकारों का तैयार माल दक्षिण भारत, मुंबई, पूना, दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद समेत देश के विभिन्न स्थानों पर भेजा जा चुका है।
कोरोना संकट से बाहर निकल 'मुस्कुरा' रहा है टेराकोटा, शिल्पकारों के चेहरे पर तैर रही हैं खुशियां
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टेराकोटा के शिल्पकार गुलाब प्रजापति का कहना है कि औरंगाबाद (गोरखपुर) के करीब सभी शिल्पकारों का स्टॉक खाली हो चुका है। गुलाब प्रजापति के पुत्र धर्मेंद्र प्रजापति ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान उत्पादों की बिक्री को लेकर काफी अनिश्चय की स्थिति बन गई थी। इस कारण इस बार पिछले साल की तुलना में कम सामान तैयार किया गया, लेकिन उम्मीद से ज्यादा बिक्री हो गई।
पिछली बार सिर्फ गोरखपुर के बाजार में 15 से 20 ट्रक माल की खपत हो गई थी। इतना ही स्टॉक देश के अन्य प्रदेशों में भेजा जाता है। सिर्फ औरंगाबाद गांव से हर साल टेराकोटा उत्पादों का ढाई से तीन करोड़ का सालाना कारोबार होता है। गुलाब प्रजापति ने बताया कि एक बड़े ट्रक में पांच से सात लाख रुपये का माल लोड होता है।
गेस्ट हाउस बनने से व्यापारियों को हुई सुविधा
गुलाब प्रजापति ने बताया कि सरकार की ओर से औरंगाबाद गांव में गेस्ट हाउस बनाने से काफी सुविधा हुई है। अब टेराकोटा उत्पाद खरीदने के लिए बाहर से आने वाले व्यापारी गेस्ट हाउस में ठहरते हैं। शिल्पकारों की ओर से व्यापारियों के लिए खाने-पीने का इंतजाम किया जाता है। इस सुविधा के कारण बाहर से अधिक व्यापारी आने लगे हैं।
अब सारे शिल्पकार दीपावली के लिए उत्पादों की तैयारी में जुट गए हैं। धर्मेंद्र प्रजापति ने बताया कि दीपावली में तकरीबन एक महीने का समय बचा है। इतने समय में जितना मॉल तैयार हो सकता है, उतने के लिए शिल्पकार काम कर रहे हैं।