बदल रहा है गोरखपुर: जीआरडी से बनी बात....कैंट स्टेशन पर एक और प्रवेश द्वार को मंजूरी
सीपीआरओ-एनईआर पंकज कुमार सिंह ने कहा कि गोरखपुर कैंट स्टेशन को सैटेलाइट स्टेशन के तौर विकसत किया गया है। शहर की ओर द्वितीय प्रवेश द्वार के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि हस्तान्तरण की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। प्रवेश द्वार बन जाने से शहरवासियों के साथ एम्स आने वाले यात्रियों को भी सुविधा होगी।
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रेलवे कैंट स्टेशन पर द्वितीय प्रवेश द्वार बनाने के लिए रास्ता साफ हो गया है। नौ साल बाद बात बन ही गई और रक्षा मंत्रालय ने रेलवे प्रशासन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके मुताबिक सेना (जीआरडी) करीब आठ हजार वर्ग मीटर जमीन रेलवे को देगी। बदले में उसे रेल प्रशासन उतनी ही जमीन जीआरडी के पास देगा। सहमति मिलने के बाद अब भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यानी, जल्द स्टेशन के दक्षिण तरफ प्रवेश द्वार बनेगा। इससे क्रॉसिंग पर फंसे बिना लोग सीधे एम्स के गेट तक पहुंच जाएंगे। घंटों का सफर मिनटों में पूरा होगा।
कैंट स्टेशन के दक्षिण की तरफ जीआरडी की जमीन है। रेलवे प्रशासन ने वर्ष 2014 में रेल मंत्रालय के माध्यम से सेना से दक्षिण की तरफ 20 मीटर चौड़ी और 40 मीटर लंबी कुल आठ हजार वर्गमीटर भूमि मांगी थी। कई बार रेल प्रशासन ने रक्षा मंत्रालय को इस संबंध में पत्र भी लिखा।
इसे लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सदर सांसद रवि किशन ने भी पहल की। अब जाकर रक्षा मंत्रालय ने स्वीकृति दी है। पिछले दिनों जीआरडी और रेलवे अधिकारियों के बीच बैठक भी हो चुकी है। इसमें सहमति बन चुकी है। अब उसे धरातल पर लाने की तैयारी है।
20 मीटर चौड़ाई में रेलवे क्राॅसिंग के पहले से ही रास्ता बनाया जाएगा। यात्री प्लेटफॉर्म चार व पांच के पास बने फुट ओवरब्रिज के पास सीधे पहुंच जाएंगे। वहां से स्टेशन पर आएंगे।
रामगढ़ताल के किनारे सड़क बनाने की भी योजना
रेलवे प्रशासन कैंट स्टेशन के पश्चिम की तरफ रामगढ़ताल के किनारे से भी रास्ते के लिए संभावनाएं तलाश रहा है। स्टेशन से पश्चिम की तरफ भी सेना की कुछ भूमि है। इसपर बना रास्ता रामगढ़ताल के किनारे होते हुए गोरखपुर-देवरिया मुख्यमार्ग पर पुलिया के पास तक पहुंचा देता है। यह भूमि भी मिल जाती है तो लोगों की राह आसान हो जाएगी। वे कैंट स्टेशन से निकलकर सीधे मोहद्दीपुर पहुंच जाएंगे। इसके लिए रेल प्रशासन राज्य सरकार से बात कर रहा है।
क्राॅसिंग पर पुल के लिए भी करना पड़ रहा इंतजार
प्रशासन ने स्टेशन के पूर्वी छोर पर स्थित रेलवे क्राॅसिंग पर ओवरब्रिज के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है। पुल क्राॅसिंग के ऊपर से स्टेशन की तरफ खुलेगा। यात्री ही नहीं क्राॅसिंग से होकर आने-जाने वाले हजारों लोगों इससे सहूलियत होगी।
अभी 100 मीटर की दूरी तय होती है एक घंटे में
कैंट रेलवे स्टेशन के पास क्राॅसिंग को पार करना लोगों के लिए बड़ी चुनौती है। इस रूट पर करीब 147 ट्रेनों और मालगाड़ी का आवागमन है। स्टेशन पर उतरने वाले यात्रियों को घंटों जाम में जूझना पड़ता है। स्टेशन से एम्स के सामने वाली मेन सड़क तक पहुंचने में कभी-कभी एक घंटे का समय लग जाता है।
आधे से एक घंटे तक बंद रहता है रेल क्रॉसिंग
शनिवार की सुबह 10:10 बजे मालगाड़ी के आने पर रेलवे फाटक बंद हो गया। मालगाड़ी के जाने के बाद एक ट्रेन गुजरी। इससे करीब आधे घंटे के बाद ही फाटक खुल सका। तब तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। एम्स में इलाज कराने भतीजे के साथ जा रहे योगेंद्र चौहान जाम में फंस गए। उन्हें डर था कि कहीं ओपीडी बंद न हो जाए। इसी तरह शाम पौने चार बजे बिहार संपर्क क्रांति और उसके बाद दो मालगाड़ी गुजरी। पौने एक घंटे बाद गेट खुला तो लोग किसी तरह जाम में से निकले।
सीपीआरओ-एनईआर पंकज कुमार सिंह ने कहा कि गोरखपुर कैंट स्टेशन को सैटेलाइट स्टेशन के तौर विकसत किया गया है। शहर की ओर द्वितीय प्रवेश द्वार के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि हस्तान्तरण की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। प्रवेश द्वार बन जाने से शहरवासियों के साथ एम्स आने वाले यात्रियों को भी सुविधा होगी।