{"_id":"65e0e9b99ddddcc9100dadb4","slug":"tal-jahda-case-could-not-collect-complete-documents-even-in-six-months-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-482572-2024-03-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"ताल जहदा केस : छह माह में दस्तावेज भी पूरे एकत्र नहीं कर सके","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ताल जहदा केस : छह माह में दस्तावेज भी पूरे एकत्र नहीं कर सके
विज्ञापन
- चिलुआताल थाने में 644 लोगों पर सरकारी जमीन पर कब्जा करने का दर्ज है केस
- मृतकों का नाम जांच कर अलग किया, राजस्व से मांगे गए हैं कई लोगों के दस्तावेज
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। चिलुआताल थाना क्षेत्र के ताल जहदा में कई दशक से सीलिंग की जमीन पर कब्जा करने वालों की जांच छह माह में भी पूरी नहीं हो पाई है। किन लोगों ने कब्जा किया है और उनके दस्तावेज कैसे फर्जी हैं। इसकी जांच में पुलिस भी उलझ गई है। पुलिस ने पूरे प्रकरण में एक-एक आरोपी के दस्तावेज की मांग राजस्व विभाग से की रही है, लेकिन केस दर्ज कराने वाला राजस्व विभाग भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, जिससे यह साबित हो जाए कि कूटरचित दस्तावेज तैयार करके जमीन को खरीदा-बेचा गया है, या कब्जा किया गया है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि जल्द ही जांच पूरी कर ली जाएगी।
पुलिस इस पूरे केस में अभी तक सिर्फ इतना ही कर सकी है कि कुछ मृतकों के नाम को अलग कर दिया गया है, लेकिन अभी उनका नाम केस से बाहर नहीं किया जा सका है। जानकारी के मुताबिक, ताल जहदा की जमीन सरहरी स्टेट परमेश्वरी राय की थी। बाद में यह जमीन सीलिंग में आ गई। वर्ष 1970 से 1980 के बीच रामपुर गोपालपुर गांव के तुलसी निगम प्रधान थे। तब उन्होंने जमीन गांव के लोगों को पट्टा कर दी। 1984 में मामला डीएम कोर्ट में चला गया। सरकार बनाम रामपुर गोपालपुर गांव के बीच केस चलता रहा।
प्रधानी में जब तक तुलसी निगम सक्रिय थे, तब तक तो वह कोर्ट में पैरवी के लिए हर तारीख पर जाते थे, लेकिन बाद के साल में इस पर ग्रामीणों ने बहुत ध्यान नहीं दिया और कोर्ट में मामले में तारीख पर तारीख पड़ती रही। कई तारीख के बाद डीएम ने 2021 में जमीन को सरकारी घोषित कर उसे दस्तावेजों में चढ़वा भी दी। इसके बाद कुछ लोग हाईकोर्ट भी गए, लेकिन इनकी संख्या बहुत कम है। अब डीएम ने इस मामले में केस दर्ज कराने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
.......
डीएम के आदेश पर चकबंदी अधिकारी ने दर्ज कराया है केस
सितंबर 2023 में ताल जहदा में कई दशक से सीलिंग की जमीन पर कब्जा जमाए 644 लोगों पर चिलुआताल पुलिस ने केस दर्ज किया। चकबंदी अधिकारी की तहरीर पर पुलिस ने सभी को कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने का आरोपी बनाया। डीएम के आदेश पर केस दर्ज कर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन अब भी इस केस में कोई खास प्रगति पुलिस की जांच में नहीं हो सकी है।
......
2021 में घोषित हुई थी सरकारी जमीन
गांव वालों और सरकार के बीच मामला डीएम कोर्ट में चल रहा था। इस पर 16 अप्रैल 2021 को ही डीएम कोर्ट ने केस खारिज करते हुए इसे सरकारी जमीन घोषित कर दिया था, लेकिन इसके बाद भी लोगों का कब्जा बना हुआ है। वर्तमान में जमीन पर किसान खेती करते हैं।
-- -- -- --
इनको बनाया गया है नामजद आरोपी
रामपुर गोपालपुर गांव के रामभवन, राकेश, कनीक लाल, मैना देवी, देवेंद्र, योगेंद्र, कैलाशी देवी पत्नी रामसेवक, ओमप्रकाश, धनपत, दयालाल, दिलीप कुमार, रणजीत कुमार, प्रिती देवी पत्नी सुरजलाल, कुमार, कृष्ण प्रसाद मिश्र, नजाम, उनकी वबू, गिरीश, गोपी, गनपती, रामाशंकर, रामसमुझ, गंगा को नामजद आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा 622 लोग अन्य नामजद आरोपी हैं। हालांकि अब भी किसान इस जमीन को पुश्तैनी बताते हैं। कई तो यह भी बताते हैं कि जमीन की खरीद बिक्री भी कर चुके हैं।
......
कोट
डीएम के आदेश पर दर्ज किए गए केस की विवेचना चल रही है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। राजस्व से दस्तावेज मांग कर उस पर काम किया जा रहा है। जल्द ही इसकी जांच पूरी कर साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई कर दी जाएगी।
-जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, एसपी नार्थ
विज्ञापन
- मृतकों का नाम जांच कर अलग किया, राजस्व से मांगे गए हैं कई लोगों के दस्तावेज
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। चिलुआताल थाना क्षेत्र के ताल जहदा में कई दशक से सीलिंग की जमीन पर कब्जा करने वालों की जांच छह माह में भी पूरी नहीं हो पाई है। किन लोगों ने कब्जा किया है और उनके दस्तावेज कैसे फर्जी हैं। इसकी जांच में पुलिस भी उलझ गई है। पुलिस ने पूरे प्रकरण में एक-एक आरोपी के दस्तावेज की मांग राजस्व विभाग से की रही है, लेकिन केस दर्ज कराने वाला राजस्व विभाग भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, जिससे यह साबित हो जाए कि कूटरचित दस्तावेज तैयार करके जमीन को खरीदा-बेचा गया है, या कब्जा किया गया है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि जल्द ही जांच पूरी कर ली जाएगी।
पुलिस इस पूरे केस में अभी तक सिर्फ इतना ही कर सकी है कि कुछ मृतकों के नाम को अलग कर दिया गया है, लेकिन अभी उनका नाम केस से बाहर नहीं किया जा सका है। जानकारी के मुताबिक, ताल जहदा की जमीन सरहरी स्टेट परमेश्वरी राय की थी। बाद में यह जमीन सीलिंग में आ गई। वर्ष 1970 से 1980 के बीच रामपुर गोपालपुर गांव के तुलसी निगम प्रधान थे। तब उन्होंने जमीन गांव के लोगों को पट्टा कर दी। 1984 में मामला डीएम कोर्ट में चला गया। सरकार बनाम रामपुर गोपालपुर गांव के बीच केस चलता रहा।
विज्ञापन
प्रधानी में जब तक तुलसी निगम सक्रिय थे, तब तक तो वह कोर्ट में पैरवी के लिए हर तारीख पर जाते थे, लेकिन बाद के साल में इस पर ग्रामीणों ने बहुत ध्यान नहीं दिया और कोर्ट में मामले में तारीख पर तारीख पड़ती रही। कई तारीख के बाद डीएम ने 2021 में जमीन को सरकारी घोषित कर उसे दस्तावेजों में चढ़वा भी दी। इसके बाद कुछ लोग हाईकोर्ट भी गए, लेकिन इनकी संख्या बहुत कम है। अब डीएम ने इस मामले में केस दर्ज कराने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
.......
डीएम के आदेश पर चकबंदी अधिकारी ने दर्ज कराया है केस
सितंबर 2023 में ताल जहदा में कई दशक से सीलिंग की जमीन पर कब्जा जमाए 644 लोगों पर चिलुआताल पुलिस ने केस दर्ज किया। चकबंदी अधिकारी की तहरीर पर पुलिस ने सभी को कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने का आरोपी बनाया। डीएम के आदेश पर केस दर्ज कर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन अब भी इस केस में कोई खास प्रगति पुलिस की जांच में नहीं हो सकी है।
......
2021 में घोषित हुई थी सरकारी जमीन
गांव वालों और सरकार के बीच मामला डीएम कोर्ट में चल रहा था। इस पर 16 अप्रैल 2021 को ही डीएम कोर्ट ने केस खारिज करते हुए इसे सरकारी जमीन घोषित कर दिया था, लेकिन इसके बाद भी लोगों का कब्जा बना हुआ है। वर्तमान में जमीन पर किसान खेती करते हैं।
इनको बनाया गया है नामजद आरोपी
रामपुर गोपालपुर गांव के रामभवन, राकेश, कनीक लाल, मैना देवी, देवेंद्र, योगेंद्र, कैलाशी देवी पत्नी रामसेवक, ओमप्रकाश, धनपत, दयालाल, दिलीप कुमार, रणजीत कुमार, प्रिती देवी पत्नी सुरजलाल, कुमार, कृष्ण प्रसाद मिश्र, नजाम, उनकी वबू, गिरीश, गोपी, गनपती, रामाशंकर, रामसमुझ, गंगा को नामजद आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा 622 लोग अन्य नामजद आरोपी हैं। हालांकि अब भी किसान इस जमीन को पुश्तैनी बताते हैं। कई तो यह भी बताते हैं कि जमीन की खरीद बिक्री भी कर चुके हैं।
......
कोट
डीएम के आदेश पर दर्ज किए गए केस की विवेचना चल रही है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। राजस्व से दस्तावेज मांग कर उस पर काम किया जा रहा है। जल्द ही इसकी जांच पूरी कर साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई कर दी जाएगी।
-जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, एसपी नार्थ