{"_id":"6ab98c470c2d9d4d040ccec7","slug":"inter-caste-marriage-is-not-appropriate-for-sanatan-dharma-gorakhpur-news-c-7-gkp1062-1465609-2026-09-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: अंतरजातीय विवाह सनातन धर्म के लिए उचित नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: अंतरजातीय विवाह सनातन धर्म के लिए उचित नहीं
Mon, 28 Sep 2026 03:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 28 Sep 2026 03:06 AM IST
विज्ञापन
गोरखपुर। वृंदावन से आए मलूकपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य ने कथा व्यास के रूप में गोस्वामी तुलसीदास कृत गीतावली के पद का गान किया। कुलीनता को जीवन का सद्गुण बताया। उन्होंने अंतरजातीय विवाह को सनातन धर्म के लिए अनुचित कहा, जिससे वर्णसंकर संतानें पैदा होती हैं। जीवन में गुरु-कृपा का विशेष महत्व है, जिससे शिष्य का कल्याण सुनिश्चित होता है। भगवान की लीला में भक्तों को शंका रहित होकर विश्वास करना चाहिए, क्योंकि ईश्वर सर्वशक्तिमान हैं।
युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन रविवार को कथा वाचक मलूकपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य ने श्रद्धालुओं को कथा सुनाई। कथा व्यास ने कहा कि कुलीनता जीवन का सद्गुण है। अच्छे माता-पिता और कुलीन वंश में ही महापुरुष पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए विवाह और पारिवारिक संस्कारों की परंपराओं को महत्व देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिंडदान आदि श्रद्धा की प्रक्रियाओं का भी अपना धार्मिक महत्व है।
उन्होंने कहा कि गुलामी के समय क्रांति का बीज गोरक्षा था, लेकिन आजादी के 80 वर्ष बाद भी भारत गोवध से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाया है। जीवन में गुरु-कृपा का विशेष महत्व है। सच्चे गुरु की पूर्ण कृपा मिलने पर शिष्य का कल्याण सुनिश्चित होता है। उन्होंने कहा कि ब्रज मंडल में भगवान के आगमन के बाद वहां लक्ष्मी का नित्य निवास होने लगा। गोपियां कहती हैं कि ब्रज बैकुंठ से भी अधिक सुंदर हो गया। भगवान की लीला में भक्तों को विस्मित या शंकित होने के बजाय पूर्ण विश्वास रखना चाहिए, क्योंकि ईश्वर सर्वशक्तिमान हैं। धर्मनिष्ठ और सदाचारी संतों का दर्शन मात्र भी कल्याण का कारण बनता है।
विज्ञापन
कथा व्यास ने कहा कि जीवन में विपरीत परिस्थितियां आने पर व्याकुल होने के बजाय धैर्य रखना चाहिए। भगवान के प्रति विश्वास की कमी के कारण मनुष्य परेशान रहता है। उन्होंने कहा कि भगवान की शरणागति ही हमारा लक्ष्य है। सभी जीवों का वास्तविक घर भगवान की शरणागति है। जब तक यह प्राप्त नहीं होती, तब तक जीवन का प्रवास जारी रहता है।
कथा का समापन आरती और प्रसाद वितरण से हुआ। संचालन डॉ. श्रीभगवान सिंह ने किया। इस अवसर पर योगी कमलनाथ, महंत रविंद्रदास, सांसद रवि किशन, भाजपा क्षेत्रीय महामंत्री राहुल श्रीवास्तव और अजय सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
विज्ञापन
युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन रविवार को कथा वाचक मलूकपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य ने श्रद्धालुओं को कथा सुनाई। कथा व्यास ने कहा कि कुलीनता जीवन का सद्गुण है। अच्छे माता-पिता और कुलीन वंश में ही महापुरुष पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए विवाह और पारिवारिक संस्कारों की परंपराओं को महत्व देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिंडदान आदि श्रद्धा की प्रक्रियाओं का भी अपना धार्मिक महत्व है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि गुलामी के समय क्रांति का बीज गोरक्षा था, लेकिन आजादी के 80 वर्ष बाद भी भारत गोवध से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाया है। जीवन में गुरु-कृपा का विशेष महत्व है। सच्चे गुरु की पूर्ण कृपा मिलने पर शिष्य का कल्याण सुनिश्चित होता है। उन्होंने कहा कि ब्रज मंडल में भगवान के आगमन के बाद वहां लक्ष्मी का नित्य निवास होने लगा। गोपियां कहती हैं कि ब्रज बैकुंठ से भी अधिक सुंदर हो गया। भगवान की लीला में भक्तों को विस्मित या शंकित होने के बजाय पूर्ण विश्वास रखना चाहिए, क्योंकि ईश्वर सर्वशक्तिमान हैं। धर्मनिष्ठ और सदाचारी संतों का दर्शन मात्र भी कल्याण का कारण बनता है।
विज्ञापन
कथा व्यास ने कहा कि जीवन में विपरीत परिस्थितियां आने पर व्याकुल होने के बजाय धैर्य रखना चाहिए। भगवान के प्रति विश्वास की कमी के कारण मनुष्य परेशान रहता है। उन्होंने कहा कि भगवान की शरणागति ही हमारा लक्ष्य है। सभी जीवों का वास्तविक घर भगवान की शरणागति है। जब तक यह प्राप्त नहीं होती, तब तक जीवन का प्रवास जारी रहता है।
कथा का समापन आरती और प्रसाद वितरण से हुआ। संचालन डॉ. श्रीभगवान सिंह ने किया। इस अवसर पर योगी कमलनाथ, महंत रविंद्रदास, सांसद रवि किशन, भाजपा क्षेत्रीय महामंत्री राहुल श्रीवास्तव और अजय सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।