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Gorakhpur News: गोरखपुर कैंट से गोल्डेनगंज-छपरा तक सर्वे पूरा, दो साल में लगेगा कवच सिस्टम
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- गोरखपुर से बस्ती के बीच लगाए जा रहे हैं टॉवर, इसके बाद इंजन में लगेगा
- छपरा-बाराबंकी के बीच आठ खंडों में होना है काम, इसके लिए मिला बजट
गोरखपुर। ट्रेन की आमने-सामने की टक्कर रोकने के लिए बाराबंकी से गोरखपुर होकर छपरा रेल रूट तक कवच (स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली) दो साल में लग जाएगा। गोरखपुर कैंट से गोल्डेनगंज-छपरा तक भी सर्वे का काम पूरा हो चुका है। 438 किमी लंबाई में रेल ट्रैक पर 88 टावर लगाए जाएंगे। पहले फेज में टावर लगाने का काम शुरू कर दिया है। बजट में पर्याप्त धन मिला है जिसके बाद अब काम में तेजी आएगी।
गोरखपुर-लखनऊ मेन लाइन पर चौरीचौरा, सहजनवां, देवरिया, चुरेब और बस्ती में टाॅवर के लिए फाउंडेशन लगभग बना लिया गया है। अब टावर इंस्टॉल किया जाएगा। दूसरे चरण में इंजनों में लगने वाला डिवाइस इंस्टॉल होगा। एनईआर में 136 से अधिक इलेक्ट्रिक इंजनों में कवच स्थापित की जाएगी। रेल मंत्रालय ने इसके लिए 492.21 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है।
रेलवे में दुर्घटनाओं, आमतौर टक्कर को रोकने को में इस प्रणाली को अहम माना जा रहा है। इस खास तकनीक से एक ही ट्रैक पर आगे पीछे दौड़ने वाली ट्रेनों में टक्कर नहीं होगी। इसे रोकने के लिए जीपीएस, रेडियो फ्रिक्वेंसी का प्रयोग होगा। ट्रेनों के टकराने की स्थिति आने से पहले ही दोनों ट्रेनों में ऑटोमेटिक ब्रेक लगने के साथ ही पांच किलोमीटर के दायरे में मौजूद सभी ट्रेनों का संचालन भी बंद हो जाएगा।
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एनईआर के सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि आठ खंड में इस परियोजना को पूरा किया जाना है। कवच के लिए टॉवर स्थापित किए जा रहे हैं। इसके बाद लोको में भी इस सिस्टम को स्थापित किया जाएगा।
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- छपरा-बाराबंकी के बीच आठ खंडों में होना है काम, इसके लिए मिला बजट
गोरखपुर। ट्रेन की आमने-सामने की टक्कर रोकने के लिए बाराबंकी से गोरखपुर होकर छपरा रेल रूट तक कवच (स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली) दो साल में लग जाएगा। गोरखपुर कैंट से गोल्डेनगंज-छपरा तक भी सर्वे का काम पूरा हो चुका है। 438 किमी लंबाई में रेल ट्रैक पर 88 टावर लगाए जाएंगे। पहले फेज में टावर लगाने का काम शुरू कर दिया है। बजट में पर्याप्त धन मिला है जिसके बाद अब काम में तेजी आएगी।
गोरखपुर-लखनऊ मेन लाइन पर चौरीचौरा, सहजनवां, देवरिया, चुरेब और बस्ती में टाॅवर के लिए फाउंडेशन लगभग बना लिया गया है। अब टावर इंस्टॉल किया जाएगा। दूसरे चरण में इंजनों में लगने वाला डिवाइस इंस्टॉल होगा। एनईआर में 136 से अधिक इलेक्ट्रिक इंजनों में कवच स्थापित की जाएगी। रेल मंत्रालय ने इसके लिए 492.21 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है।
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रेलवे में दुर्घटनाओं, आमतौर टक्कर को रोकने को में इस प्रणाली को अहम माना जा रहा है। इस खास तकनीक से एक ही ट्रैक पर आगे पीछे दौड़ने वाली ट्रेनों में टक्कर नहीं होगी। इसे रोकने के लिए जीपीएस, रेडियो फ्रिक्वेंसी का प्रयोग होगा। ट्रेनों के टकराने की स्थिति आने से पहले ही दोनों ट्रेनों में ऑटोमेटिक ब्रेक लगने के साथ ही पांच किलोमीटर के दायरे में मौजूद सभी ट्रेनों का संचालन भी बंद हो जाएगा।
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एनईआर के सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि आठ खंड में इस परियोजना को पूरा किया जाना है। कवच के लिए टॉवर स्थापित किए जा रहे हैं। इसके बाद लोको में भी इस सिस्टम को स्थापित किया जाएगा।