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अधिक बारिश से गन्ने की मिठास हुई कम
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अधिक बारिश से गन्ने की मिठास हुई कम
- 10 हजार हेक्टेयर गन्ने की फसल बर्बाद होने से चीनी का उत्पादन की कम होने की संभावना
राकेश कुमार गौंड़
पडरौना। अत्यधिक बारिश के चलते खेतों में जलभराव और रेट रॉट रोग के कारण जिले में गन्ने का उत्पादन घटने के साथ ही मिठास भी कम हो गई है। इससे परता और चीनी उत्पादन भी घटा है।
मौजूदा पेराई सत्र में जनपद में किसानों ने 91,117 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती की है। इसमें से 64613 हेक्टेयर क्षेत्रफल गन्ना खड्डा, रामकोला, कप्तानगंज, सेवरही और ढाढ़ा चीनी मिल तथा 3611 हेक्टेयर क्षेत्रफल गन्ना महराजगंज जिले की गड़ौरा और गोरखपुर की पिपराइच चीनी मिल को आवंटित है। गन्ना तौल कर चीनी मिलों पर पहुंचाने के लिए 159 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। जून व जुलाई 2020 में अत्यधिक बारिश के चलते खेतों में जलभराव हो गया। इस कारण करीब दस हजार हेक्टेयर में बोया गया गन्ना या तो सूख गया या फिर रेडरॉट रोग के चलते नष्ट हो गया। नतीजतन गन्ना उत्पादन में कमी आई ही, चीनी के उत्पादन में भी गिरावट देखी जा रही है।
अब तक जिले की पांच चीनी मिलों ने कुल 106.13 लाख क्विंटल गन्ना खरीदा है, जिसमें से 105.99 लाख क्विंटल गन्ना की पेराई की है। इससे 10.77 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ है। मौजूदा समय में चीनी परता (रिकवरी रेट) 10.45 प्रतिशत है, जो पिछले साल के मुकाबले 11.67 से लुढ़ककर 10.45 प्रतिशत पर आ गया है।
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पिछले दस वर्षों में चीनी उत्पादन (लाख क्विंटल में) एवं रिकवरी रेट (प्रतिशत में)-
वर्ष- चीनी उत्पादन- रिकवरी रेट
2010-11- 24.77- 9.29
2011-12- 25.23- 9.72
2012-13- 26.28- 9.41
2013-14- 26.67- 9.61
2014-15- 22.49- 9.09
2015-16- 19.70- 10.21
2016-17- 24.17- 9.86
2017-18- 37.53- 10.73
2018-19- 45.54- 11.40
2019-20- 37.34- 11.67
2020-21 (अब तक)10.77- 10.45
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0238 और 118 प्रजाति के गन्ने की जोर देकर गन्ना विभाग ने बुआई कराई। अत्यधिक बारिश से खेतों में जलभराव और रोग के चलते बहुत से किसानों की फसलें या तो सूख गईं या रोगग्रस्त हो गईं। इस कारण हमारे खेतों में न केवल उत्पादन कम हुआ है, बल्कि फसल भी अच्छी नहीं हुई है। ऐसे में चीनी का उत्पादन और परता में कमी आना स्वाभाविक है।
छोटेलाल सिंह,
प्रगतिशील किसान एवं प्रदेश मंत्री, भारतीय किसान संघ, उत्तर प्रदेश
हम प्रतिवर्ष लगभग 12 एकड़ गन्ना की खेती करते हैं। नकदी फसल होने के कारण अच्छी आमदनी होती थी। अधिक बारिश के चलते लगभग चार एकड़ गन्ना की फसल सूख गई है। इसमें आधे खेत में 238 और आधे में 118 प्रजाति का गन्ना बोया थे। 238 प्रजाति का गन्ना खेत में पानी लगने से सूख गया, जबकि 118 में रेडरॉट लग गया है। इसी तरह अन्य गन्ना किसानों को भी काफी नुकसान हुआ है।
बीरेंद्र तिवारी,
प्रगतिशील किसान, दुबौली
गन्ने की अच्छी पैदावार के लिए औसतन 900 से 1000 मिलीमीटर बारिश की आवश्यकता होती है। वर्ष 2020 में जून और जुलाई में ज्यादा बारिश हुई। पिछले दो वर्षों से 1400 से 2000 मिलीमीटर बारिश हो रही है। जगह-जगह नाले, ड्रेन, बाड़ी आदि जाम होने के चलते खेतों से पानी निकल नहीं पा रहा, जिससे गन्ना की फसल को काफी नुकसान हुआ है। इसका असर गन्ना उत्पादन के साथ ही साथ चीनी उत्पादन पर पड़ा है। मिल में कुछ सूखा गन्ना और जड़ें भी आ रही हैं, जिससे चीनी मिल का लॉस बढ़ रहा है।
दिनेश राय,
उप महाप्रबंधक, गन्ना
त्रिवेेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज ग्रुप, रामकोला
खेतों में पानी जमा होने और बीमारी के कारण इस वर्ष करीब 10 हजार हेक्टेयर गन्ने की फसल को नुकसान हुआ है। प्रति हेक्टेयर गन्ना उत्पादन में 100 क्विंटल की कमी का अनुमान है। शर्करा की मात्रा कम हुई है। इस कारण चीनी का उत्पादन और परता भी घटा है।
- वेदप्रकाश सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
जलभराव से रुक जाती है चीनी बढ़ने की प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश गन्ना प्रशिक्षण संस्थान पिपराइच, गोरखपुर के सहायक निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता बताते हैं कि गन्ना के खेत में पानी अधिक समय तक एकत्र होने से उसका विकास रुक जाता है। गन्ने की फसल में मिठास बढ़ने की प्रक्रिया रुक जाती है। अभी दस दिनों बाद गन्ने की फसल में फूल आने लगेंगे। इस कारण भी मिठास कम होने लगती है। कुलेटो ट्राइकम फलकेटम नाम के एक फफूंद की वजह से गन्ने की फसल में रेडरॉट या काना रोग लग जाता है। जिस प्रजाति में लग जाता है, वह प्रजाति समाप्त हो जाती है। गन्ना प्रजनन अनुसंधान केंद्र कोयंबटूर के निदेशक डॉ. बख्शी राय बताते हैं कि अभी तक इस रोग की कोई दवा नहीं बनी है। इसलिए 0.238 प्रजाति भी की बुआई पर भी शासन ने रोक लगा दी है। 90 फीसदी से अधिक क्षेत्रफल में सिर्फ इस प्रजाति का गन्ना की बुआई हुई थी, जिससे लो लैंड में इस प्रजाति को अधिक नुकसान पहुंचा है। एडी ने किसानों से अपील की है कि किसान गन्ने की किसी एक प्रजाति पर निर्भर न रहें।
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- 10 हजार हेक्टेयर गन्ने की फसल बर्बाद होने से चीनी का उत्पादन की कम होने की संभावना
राकेश कुमार गौंड़
पडरौना। अत्यधिक बारिश के चलते खेतों में जलभराव और रेट रॉट रोग के कारण जिले में गन्ने का उत्पादन घटने के साथ ही मिठास भी कम हो गई है। इससे परता और चीनी उत्पादन भी घटा है।
मौजूदा पेराई सत्र में जनपद में किसानों ने 91,117 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती की है। इसमें से 64613 हेक्टेयर क्षेत्रफल गन्ना खड्डा, रामकोला, कप्तानगंज, सेवरही और ढाढ़ा चीनी मिल तथा 3611 हेक्टेयर क्षेत्रफल गन्ना महराजगंज जिले की गड़ौरा और गोरखपुर की पिपराइच चीनी मिल को आवंटित है। गन्ना तौल कर चीनी मिलों पर पहुंचाने के लिए 159 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। जून व जुलाई 2020 में अत्यधिक बारिश के चलते खेतों में जलभराव हो गया। इस कारण करीब दस हजार हेक्टेयर में बोया गया गन्ना या तो सूख गया या फिर रेडरॉट रोग के चलते नष्ट हो गया। नतीजतन गन्ना उत्पादन में कमी आई ही, चीनी के उत्पादन में भी गिरावट देखी जा रही है।
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अब तक जिले की पांच चीनी मिलों ने कुल 106.13 लाख क्विंटल गन्ना खरीदा है, जिसमें से 105.99 लाख क्विंटल गन्ना की पेराई की है। इससे 10.77 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ है। मौजूदा समय में चीनी परता (रिकवरी रेट) 10.45 प्रतिशत है, जो पिछले साल के मुकाबले 11.67 से लुढ़ककर 10.45 प्रतिशत पर आ गया है।
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पिछले दस वर्षों में चीनी उत्पादन (लाख क्विंटल में) एवं रिकवरी रेट (प्रतिशत में)-
वर्ष- चीनी उत्पादन- रिकवरी रेट
2010-11- 24.77- 9.29
2011-12- 25.23- 9.72
2012-13- 26.28- 9.41
2013-14- 26.67- 9.61
2014-15- 22.49- 9.09
2015-16- 19.70- 10.21
2016-17- 24.17- 9.86
2017-18- 37.53- 10.73
2018-19- 45.54- 11.40
2019-20- 37.34- 11.67
2020-21 (अब तक)10.77- 10.45
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0238 और 118 प्रजाति के गन्ने की जोर देकर गन्ना विभाग ने बुआई कराई। अत्यधिक बारिश से खेतों में जलभराव और रोग के चलते बहुत से किसानों की फसलें या तो सूख गईं या रोगग्रस्त हो गईं। इस कारण हमारे खेतों में न केवल उत्पादन कम हुआ है, बल्कि फसल भी अच्छी नहीं हुई है। ऐसे में चीनी का उत्पादन और परता में कमी आना स्वाभाविक है।
छोटेलाल सिंह,
प्रगतिशील किसान एवं प्रदेश मंत्री, भारतीय किसान संघ, उत्तर प्रदेश
हम प्रतिवर्ष लगभग 12 एकड़ गन्ना की खेती करते हैं। नकदी फसल होने के कारण अच्छी आमदनी होती थी। अधिक बारिश के चलते लगभग चार एकड़ गन्ना की फसल सूख गई है। इसमें आधे खेत में 238 और आधे में 118 प्रजाति का गन्ना बोया थे। 238 प्रजाति का गन्ना खेत में पानी लगने से सूख गया, जबकि 118 में रेडरॉट लग गया है। इसी तरह अन्य गन्ना किसानों को भी काफी नुकसान हुआ है।
बीरेंद्र तिवारी,
प्रगतिशील किसान, दुबौली
गन्ने की अच्छी पैदावार के लिए औसतन 900 से 1000 मिलीमीटर बारिश की आवश्यकता होती है। वर्ष 2020 में जून और जुलाई में ज्यादा बारिश हुई। पिछले दो वर्षों से 1400 से 2000 मिलीमीटर बारिश हो रही है। जगह-जगह नाले, ड्रेन, बाड़ी आदि जाम होने के चलते खेतों से पानी निकल नहीं पा रहा, जिससे गन्ना की फसल को काफी नुकसान हुआ है। इसका असर गन्ना उत्पादन के साथ ही साथ चीनी उत्पादन पर पड़ा है। मिल में कुछ सूखा गन्ना और जड़ें भी आ रही हैं, जिससे चीनी मिल का लॉस बढ़ रहा है।
दिनेश राय,
उप महाप्रबंधक, गन्ना
त्रिवेेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज ग्रुप, रामकोला
खेतों में पानी जमा होने और बीमारी के कारण इस वर्ष करीब 10 हजार हेक्टेयर गन्ने की फसल को नुकसान हुआ है। प्रति हेक्टेयर गन्ना उत्पादन में 100 क्विंटल की कमी का अनुमान है। शर्करा की मात्रा कम हुई है। इस कारण चीनी का उत्पादन और परता भी घटा है।
- वेदप्रकाश सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
जलभराव से रुक जाती है चीनी बढ़ने की प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश गन्ना प्रशिक्षण संस्थान पिपराइच, गोरखपुर के सहायक निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता बताते हैं कि गन्ना के खेत में पानी अधिक समय तक एकत्र होने से उसका विकास रुक जाता है। गन्ने की फसल में मिठास बढ़ने की प्रक्रिया रुक जाती है। अभी दस दिनों बाद गन्ने की फसल में फूल आने लगेंगे। इस कारण भी मिठास कम होने लगती है। कुलेटो ट्राइकम फलकेटम नाम के एक फफूंद की वजह से गन्ने की फसल में रेडरॉट या काना रोग लग जाता है। जिस प्रजाति में लग जाता है, वह प्रजाति समाप्त हो जाती है। गन्ना प्रजनन अनुसंधान केंद्र कोयंबटूर के निदेशक डॉ. बख्शी राय बताते हैं कि अभी तक इस रोग की कोई दवा नहीं बनी है। इसलिए 0.238 प्रजाति भी की बुआई पर भी शासन ने रोक लगा दी है। 90 फीसदी से अधिक क्षेत्रफल में सिर्फ इस प्रजाति का गन्ना की बुआई हुई थी, जिससे लो लैंड में इस प्रजाति को अधिक नुकसान पहुंचा है। एडी ने किसानों से अपील की है कि किसान गन्ने की किसी एक प्रजाति पर निर्भर न रहें।