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Gorakhpur News: गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्र सीखेंगे आरटीपीसीआर और जिनोम सिक्वसिंग की जांच
Wed, 19 Apr 2023 05:32 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 19 Apr 2023 05:32 PM IST
सार
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने कहा कि शोध को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय में सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेंशन लैब बनाने की योजना है। इसके लिए चार करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। सेल्फ फाइनेंस कोर्स के तहत पढ़ाई करने वाले छात्र इस लैब में जांच के तरीके सीखेंगे।
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DDU Gorakhpur
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्रों को आरटीपीसीआर, पीसीआर, जीन प्रोफाइल के साथ जिनोम सीक्वेंसिंग जैसी जांच सीखने को मिलेगा। इसके लिए विश्वविद्यालय परिसर में सेंट्रल इंस्टूमेंटेशन लैब बनेगा। जिसे विश्वविद्यालय के सेल्फ फाइनेंस के बजट से बनाया जाएगा, इसकी कुल लागत करीब चार करोड़ रुपये आएगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने लैब खोलने के लिए जमीन भी तलाश ली है। प्राचीन इतिहास विभाग के बगल में तीन मंजिला भवन बनाया जाएगा। इसमें दो मंजिल में परीक्षा सेंटर होगा और एक तल पर सेंट्रल इंस्टूमेंटेशन लैब रहेगा। इस सेंटर में जांच के लिए सभी तरह की मशीनें और उपकरण मौजूद रहेंगे। इसकी मदद से सेल्फ फाइनेंस कोर्स के छात्र रिसर्च भी कर सकेंगे। साथ ही साइंस के छात्र भी नई तकनीकी का लाभ लेंगे। जिनकी मदद से छात्र अपनी पढ़ाई आसानी से पूरी कर सकेंगे।
जिनोम सीक्वेंसिंग की जांच गोरखपुर में अभी तक केवल आरएमआरसी लैब में ही मौजूद है। गोरखपुर विश्वविद्यालय में जिनोम सीक्वेसिंग लैब में पढ़ाई के बाद स्टार्टअप के तौर पर जांच की भी सुविधा शुरू की जाएगी। इससे होने वाले आय से मेंटेनेंस किया जाएगा।
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ये जांचें होंगी
जिनोम सीक्वेंसिंग, आरटीपीसीआर, क्रोमेटोग्राफी, मेटल ट्रेसिंग, जीआईसी, पीआईसी, इलेक्ट्रोफॉरेसिस, पीसीआर, डीएनए आइसोलेशन, आरएनए आइसोलेशन जैसे टेस्ट आसानी से हो सकेंगे।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने कहा कि शोध को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय में सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेंशन लैब बनाने की योजना है। इसके लिए चार करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। सेल्फ फाइनेंस कोर्स के तहत पढ़ाई करने वाले छात्र इस लैब में जांच के तरीके सीखेंगे। जिससे उन्हें नौकरी मिलने में काफी मदद मिलेगी।
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विश्वविद्यालय प्रशासन ने लैब खोलने के लिए जमीन भी तलाश ली है। प्राचीन इतिहास विभाग के बगल में तीन मंजिला भवन बनाया जाएगा। इसमें दो मंजिल में परीक्षा सेंटर होगा और एक तल पर सेंट्रल इंस्टूमेंटेशन लैब रहेगा। इस सेंटर में जांच के लिए सभी तरह की मशीनें और उपकरण मौजूद रहेंगे। इसकी मदद से सेल्फ फाइनेंस कोर्स के छात्र रिसर्च भी कर सकेंगे। साथ ही साइंस के छात्र भी नई तकनीकी का लाभ लेंगे। जिनकी मदद से छात्र अपनी पढ़ाई आसानी से पूरी कर सकेंगे।
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जिनोम सीक्वेंसिंग की जांच गोरखपुर में अभी तक केवल आरएमआरसी लैब में ही मौजूद है। गोरखपुर विश्वविद्यालय में जिनोम सीक्वेसिंग लैब में पढ़ाई के बाद स्टार्टअप के तौर पर जांच की भी सुविधा शुरू की जाएगी। इससे होने वाले आय से मेंटेनेंस किया जाएगा।
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ये जांचें होंगी
जिनोम सीक्वेंसिंग, आरटीपीसीआर, क्रोमेटोग्राफी, मेटल ट्रेसिंग, जीआईसी, पीआईसी, इलेक्ट्रोफॉरेसिस, पीसीआर, डीएनए आइसोलेशन, आरएनए आइसोलेशन जैसे टेस्ट आसानी से हो सकेंगे।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने कहा कि शोध को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय में सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेंशन लैब बनाने की योजना है। इसके लिए चार करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। सेल्फ फाइनेंस कोर्स के तहत पढ़ाई करने वाले छात्र इस लैब में जांच के तरीके सीखेंगे। जिससे उन्हें नौकरी मिलने में काफी मदद मिलेगी।