झूठी शान बनी आफत: मां-बाप को बताया दरोगा बन गया, नौकायन पर ठगी करते पकड़ा गया
अपूर्व राय फर्जी पुलिस आईकार्ड का इस्तेमाल टोल बचाने के लिए भी करता था। टोल पर बड़े आराम से आईकार्ड की मदद से निकल जाता था। दूसरे, जब कोई ठेला वाला या व्यापारी उसपर वर्दी पहनने के बाद भी संदेह करता था तो वह आईकार्ड दिखा दिया करता था।
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दरोगा बनकर नौकायन पर दुकानदारों से वसूली करने के आरोपी बीसीए के छात्र अपूर्व राय को पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से फर्जी आईकार्ड और वर्दी भी बरामद की गई। आरोपी ने बताया कि नौकरी नहीं मिलने पर तीन हजार रुपये में उसने वर्दी खरीदी थी।
बड़ी बात यह कि उसने घरवालों से भी यही बताया था कि उसका चयन दरोगा पद पर हो गया है और मुरादाबाद में ट्रेनिंग चल रही। आरोपी के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेजा गया। आरोपी अपूर्व राय कुशीनगर जनपद के तरयासुजान का निवासी है। उसकी उम्र अभी 22 वर्ष है। वर्तमान में वह आईटीएम गीडा में बीसीए का छात्र है। उसके पिता अजय शंकर राय किसान हैं।
एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि अपूर्व राय यहां रामगढ़ताल इलाके के बगहा बाबा स्थान के पास किराए का कमरा लेकर तीन साल से रहता था। पुलिस की वर्दी खरीदकर उसने वसूली शुरू कर दी। वह अक्सर नौकायन पर पहुंच जाता और यहां दुकान लगाने वालों पर पुलिस का रौब झाड़कर उनसे वसूली करता था।
दुकानदार जब उसकी हरकतों से परेशान हो गए तब इसकी शिकायत पुलिस से की। मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। जांच के दौरान उसके पास से फर्जी आईकार्ड भी मिला, जिसे दिखाकर वह दरोगा बना घूम रहा था। एसपी ने बताया कि आरोपी को नौकायन के पास से प्रभारी निरीक्षक शशिभूषण राय की टीम ने गिरफ्तार किया।
उसके पास से पुलिस ने एक काले रंग का बैग, पुलिस टीशर्ट, एक मोनोग्राम बैच, पुलिस की वर्दी में खींची गई आठ फोटो, पुलिस का फर्जी विजिटिंग कार्ड, दो आईफोन, दो उप्र विशेष पुलिस अधिकारी का आईकार्ड, वसूले गए 1,180 रुपये, सर्जिकल ग्लब्स, निर्वाचन आयोग का पहचान पत्र, पुलिस लिखा लाल बुलेट बरामद किया।
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तीन हजार में वर्दी खरीद बन गया फर्जी दरोगा
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पहले पुलिस विभाग में भर्ती की तैयारी कर रहा था। लेकिन, जब नौकरी नहीं लगी तो उसने फर्जी पुलिसवाला बनने की ठान ली। तीन हजार रुपये में पुलिस की वर्दी, स्टार और यूनिफार्म खरीदा। इसके बाद वह तीन साल से फर्जी दरोगा बनकर लोगों से वसूली कर रहा था।
घरवालों से बताया था दरोगा पद पर हो गया है चयन
टोल बचाने के लिए करता था आईकार्ड का इस्तेमाल
अपूर्व राय फर्जी पुलिस आईकार्ड का इस्तेमाल टोल बचाने के लिए भी करता था। टोल पर बड़े आराम से आईकार्ड की मदद से निकल जाता था। दूसरे, जब कोई ठेला वाला या व्यापारी उसपर वर्दी पहनने के बाद भी संदेह करता था तो वह आईकार्ड दिखा दिया करता था।
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पहले भी पकड़े गए हैं फर्जी दरोगा
16 फरवरी 2016 : कुसम्ही में फर्जी दरोगा बनकर प्रेमी युगल से वसूली करने के आरोप में पुलिस ने रजही निवासी प्रदीप उर्फ झीनक और विजय को पकड़ा।
30 जुलाई 2017 : कुशीनगर की कप्तानगंज पुलिस ने फर्जी दरोगा महराजगंज के घुघली निवासी दिग्विजय को गिरफ्तार किया।
9 जनवरी 2022 : देवरिया की रुद्रपुर पुलिस ने रामनगीना नाम के युवक को पकड़ा। वह पुलिस बनकर वसूली करता था।
20 मार्च 2023 : शाहपुर पुलिस ने हरिराम नाम के युवक को पकड़ा, जो पुलिस की वर्दी पहनकर रील बनाता था।