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बीमारी: तनाव बना रहा भुलक्कड़...कीमती सामान भी भूल जा रहे

Tue, 10 Oct 2023 10:55 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 10 Oct 2023 10:55 AM IST
सार

बीआरडी मेडिकल कॉलेज डॉ. तापस कुमार आइच ने कहा कि भुलक्कड़ होना एक आदत भी है। अक्सर लोग अपना कीमती सामान घर में रखकर कहीं भूल जाते हैं। कई बार ऐसा होता है कि आपका ध्यान किसी दूसरे काम में लगा हो और आप काम कोई और कर रहे हैं।

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stress is making me forgetful in gorakhpur
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

तनाव के चलते लोग भुलक्कड़ हो रहे हैं। ट्रेन, बस और ऑटो आदि में कीमती सामान भी भूल जा रहे हैं। इस तरह के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। सुरक्षा कर्मी उनके सामान को खोजकर उन्हें सौंपते हैं। जानकारों का मानना है कि बदलते सामाजिक परिवेश में लोग ज्यादा तनाव ले रहे हैं, जिसका असर उनकी स्मरण शक्ति पर पड़ रहा है। इस पर ध्यान देना जरूरी है।

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बांसगांव क्षेत्र के राजेश प्रसाद पत्नी के साथ दिल्ली जा रहे थे। गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ने के दौरान बैग प्लेटफार्म पर ही छूट गया। बैग में ही पत्नी के गहने भी थे। दिल्ली से आ रहे एक यात्री का दो लाख रुपये का मोबाइल एसी सेकेंड क्लास की उसकी सीट पर ही छूट गया।
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इसी तरह खजनी क्षेत्र के रामनक्षत्र ऑटो से कचहरी चौराहे पर पहुंचे और अपना बैग छोड़कर अंदर चले गए। वहां वकील ने जमीन के कागजात मांगे तो याद आया कि वह तो ऑटो में ही छूट गया है।
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ये चंद उदाहरण तो वह हैं जो लोग को याद है, हर दिन ऐसे मामले आ रहे हैं कि लोग अपने कीमती सामान ट्रेन, बस और ऑटो की सीट पर ही छोड़ दे रहे हैं। भागदौड़ और तनाव भरी जिंदगी में भुलक्कड़ लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। फर्क बस इतना है कि कुछ परिस्थितिवश ऐसा कर रहे हैं और कुछ को बचपन से ही ऐसी आदत है कि वे हर दिन कुछ न कुछ महत्वपूर्ण कार्य भूल जाते हैं।

ऐसे लोगों की वजह से सुरक्षा कर्मियों का बोझ बढ़ गया है। केवल गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर ही हर महीने लोग चार से पांच लाख तक का सामान भूल जा रहे हैं, जिसे खोजकर आरपीएफ व जीआरपी कर्मी घर तक पहुंचा रहे हैं। यही हाल शहर के ऑटो स्टैंडों का भी है। हर दिन किसी न किसी ऑटो में किसी का बैग छूटता है तो किसी के जेवर छूट जाते हैं। लोग आरपीएफ, जीआरपी और स्थानीय पुलिस से अपने सामान खोने की गुहार लगाते हैं।

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आरपीएफ इंस्पेक्टर दशरथ प्रसाद बताते हैं कि अभी सितंबर में ही करीब पांच लाख रुपये का सामान खोजकर लोगों के सुपुर्द किया गया है। इससे पहले अगस्त में भी कई लोग अपने सामान ट्रेन या प्लेटफार्म पर छोड़कर चले गए थे। बाद में लोग 139 नंबर पर कॉल कर अपना सामान खोने की सूचना देते हैं। सामान खोजने के बाद यात्री की भी पहचान की जाती है, इसके बाद उसे सौंपा जाता है।

ध्यान भटकने से होती हैं ऐसी घटनाएं

बीआरडी मेडिकल कॉलेज डॉ. तापस कुमार आइच ने कहा कि भुलक्कड़ होना एक आदत भी है। अक्सर लोग अपना कीमती सामान घर में रखकर कहीं भूल जाते हैं। कई बार ऐसा होता है कि आपका ध्यान किसी दूसरे काम में लगा हो और आप काम कोई और कर रहे हैं। ऐसे में ध्यान भटकने से सामान भूल सकते हैं।

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इसके अलावा तनाव, भीड़ और अन्य परिस्थितियां भी इसके लिए जिम्मेदार होती हैं। जैसे कि आप सामान्य रूप से कहीं जा रहे हैं और रास्ते में कोई बड़ी घटना हो गई तो तत्काल आपका ध्यान घटना की तरफ चला जाता है। ऐसे में कई बार लोग भ्रमवश दूसरे रास्ते पर चले जाते हैं।

मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. गोपाल अग्रवाल ने कहा कि सड़कों पर बढ़ती भीड़ और तेज रफ्तार जिंदगी में हर दिन कुछ न कुछ बदल रहा है। तनाव और चिंता के चलते लोग जरूरी कार्य और सामान भी भूल रहे हैं। हालांकि यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है, लेकिन इसकी वजह से जीवन में तनाव जरूर बढ़ता है, जो बाद में आपसी रिश्ते और सामाजिक संबंधों के लिए हानिकारक होता है। इसलिए अगर बार-बार आप कुछ भूल रहे हैं तो सतर्क रहने की जरूरत है।
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