ठेकेदारी छोड़ किसानी में रमे यह शख्स, अब जिले को मशरूम का हब बनाने का लिया संकल्प
- सोनाड़ी के किसान ने जिले को मशरूम का हब बनाने का लिया संकल्प
- इंटरनेट से जानकारी लेकर शुरू की खेती, किसानों को बता रहे बारिकियां
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देवरिया जिले के भलुअनी ब्लाक के सोनाड़ी गांव निवासी स्वतंत्र सिंह को बिजली निगम की ठेकेदारी रास नहीं आई तो उन्होंने पारंपरिक व्यवसाय खेती-बाड़ी को जीविकोपार्जन का माध्यम बना लिया। तकनीक के सहारे किसानी को नई पहचान देने में जुट गए। रबी, खरीफ से लगायत साग-भाजी की खेती में हर बार अव्वल आए और तीन बार विभिन्न मंचो पर पुरस्कृत होने का गौरव प्राप्त किया। अब वह देवरिया को मशरूम का हब बनाने के संकल्प को पूरा करने में जुटे हैं।
सन 1994 में बरहज डिग्री कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर स्वतंत्र सिंह ठेकेदारी के काम में लग गए। यूपी, बिहार, झारखंड आदि प्रांतों में जाकर बिजली निगम में ठेकेदारी की, लेकिन मन नहीं रमा। दो साल पूर्व इंटरनेट के माध्यम से तकनीकी खेती की जानकारी ली और गांव आकर जैविक विधि से धान, गेहूं की बुआई करने लगे।
23 दिसंबर को पथरदेवा में आयोजित किसान दिवस समारोह में बेहतर फसल उत्पादन करने पर प्रदेश कृषि मंत्री ने सात हजार का चेक व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। इससे पूर्व वह लखनऊ में आयोजित साग-भाजी प्रतियोगिता तृतीय व गोरखपुर महोत्सव के किसान सम्मलेन में प्रथम पुरस्कार हासिल कर चुके हैं।
चार प्रजातियां सबसे कारगर
स्वतंत्र सिंह का कहना है कि अब यह जिला चीनी का कटोरा तो नहीं रहा लेकिन मशरूम का हब जरूर बन सकता है। इसी संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए वह जिले के किसानों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
स्वतंत्र सिंह इन दिनों दस हजार वर्ग फुट में मशरूम की खेती कर रहे हैं। साथ ही अन्य किसानों को उम्दा क्वालिटी के बीज उपलब्ध कराकर खेती की बारीकियां बता रहे हैं। यहां के वातावरण में आयस्टर, मिल्की, पैडीस्ट्रा, बटन और हीरेसियम प्रजाति के मशरूम की पैदावार अच्छी हो रही है।
ऐसे हो रही मशरूम की खपत
स्वतंत्र सिंह बताते हैं कि मशरूम सिर्फ सब्जी के काम नहीं आता। इससे अचार, मोरब्बा, पाउडर, बिस्किट, फेसवॉस आदि भी तैयार होते हैं। जल्द ही प्रवासी मजदूरों को इसकी निःशुल्क ट्रेनिंग दी जाएगी।